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Narela Assembly Seat: शरद लगाएंगे आप की हैट्रिक या किसी और को चुनेगी जनता, ऐसा है नरेला सीट का चुनावी इतिहास

Sat, 18 Jan 2025 06:01 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 18 Jan 2025 06:01 AM IST
सार

Narela Seat: नरेला बहुत पुरानी सीट है यहां 1993 में विधानसभा मिलने से पहले से चुनाव होते रहे हैं।  

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Delhi Assembly Election 2025 Narela Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। 20 जनवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख है। इसके बाद तय हो जाएगा कि किस सीट पर किन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से एक नरेला विधानसभा सीट भी है। नरेला विधानसभा सीट एक ऐसी सीट है जो हरियाणा से सटी हुई है। मेट्रो की कनेक्टिविटी यहां पर एक मुद्दा है। आइए जानते हैं इस सीट पर चुनावी नतीजे कैसे रहे हैं? इस बार कैसे समीकरण हैं? 

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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विधानसभा बनने से पहले कैसा थी नरेला का चुनावी गणित 
1972 में नरेला से कांग्रेस के हीरा सिंह को 12744 वोटों के साथ जीत मिली थी। भारतीय जनसंघ के बाबू राम त्यागी को 8405 वोट मिले थे। हीरा सिंह ने बाबू राम त्यागी को 4339 वोटों से हराया था।  1977 में जनता पार्टी के शांति स्वरूप त्यागी को 8240 वोट मिले थे। कांग्रेस के हीरा सिंह को 5676 वोट मिले थे। इन दोनों के बीच जीत का अंतर 2564 वोट रहा था। 1983 में लोक दल के हरी राम को 12369 वोटों के साथ जीत मिली थी। कांग्रेस के हीरा सिंह को 12131 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर मात्रा 238 वोट ही था। 

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Delhi Assembly Election 2025 Narela Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत
1993 में इस सीट पर 11 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में नरेला सीट पर भाजपा को जीत मिली। भाजपा के इंद्र राज सिंह 7653 वोट से जीतने में सफल रहे। भाजपा उम्मीदवार को 18,386  मिले। वहीं, कांग्रेस के चरण सिंह कंडेरा को 10,733 वोट मिले। जनता दल के धर्मपाल 7,526 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। 

1998: कांग्रेस को मिली बड़ी जीत 
1998 में नरेला सीट से 7 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के चरण सिंह कंडेरा को जीत मिली। कंडेरा ने भाजपा के लक्ष्मण सिंह को शिकस्त दी। चरण सिंह कंडेरा को कुल 19143 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार को 16549 वोट से संतोष करना पड़ा। अन्य पांच उम्मीदवारों अपनी जमानत नहीं बचा सके। 

 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2003: कांग्रेस ने बरकरार रखी नरेला सीट
2003 के विधानसभा चुनाव में नरेला सीट पर एक बार फिर मुख्य मुकाबला चरण सिंह कंडेरा  और लक्ष्मण सिंह के बीच हुआ। के बार फिर चरण सिंह कंडेरा जीतने में सफल रहे। इस चुनाव में नरेला सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। कांग्रेस के चरण सिंह कंडेरा को 36,501 वोट मिले। वहीं, भाजपा के लक्ष्मण सिंह को 28,698 वोट मिले। जीत का अंतर 7,803 वोट का रहा। अन्य उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 

2008: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
2008 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर नरेला से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में नरेला से कांग्रेस के जसवंत सिंह ने चुनाव लड़ा था। जसवंत सिंह को 34,662 वोट मिले। बसपा के शरद कुमार दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 33,830 वोट मिले थे। इस बार जीत हार का अंतर महज 832 वोटों का रह गया। भाजपा के अजीत सिंह 29,754 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।  

2013: 20 साल बाद जीती भाजपा 
2013 के विधानसभा चुनाव में नरेला सीट से भाजपा को जीत मिली। इस चुनाव में आम आदमी मैदान में उतरी। कई सीटों पर आप से कब्जा किया था, लेकिन नरेला सीट पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा के नील दमन खत्री ने 54622 वोटों के साथ जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर बसपा के वीरेंद्र रहे। उन्हें 31,077 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 23,545 वोट था। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के जसवंत सिंह ने 26,311 वोट हासिल किए। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2015: नरेला में खुला आप का खाता 
2015 के विधानसभा चुनाव में नरेला सीट पर आप के शरद कुमार को जीत मिली। उन्हें 96,143 मिले। 2008 में यहां से जीते भाजपा के नील दमन खत्री दूसरे स्थान पर रहे। खत्री को 55851 वोट मिले। दोनों के बीच जीत के अंतर की बात करें तो वो 40,292 वोट रहा। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के प्रवीण कुमार भुगरा रहे जिन्हे महज 4643 वोट मिले। 

2020: आप के शरद कुमार ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में भी आप के शरद कुमार ने जीत दर्ज की। इस बार उन्हें 86,262 वोट मिले। भाजपा के नील दमन खत्री इस बार भी दूसरे नंबर पर रहे। उन को 68,244 वोट मिले।  इस तरह आप के शरद कुमार ने बीजेपी के नील दमन खत्री को 17,429 वोट से हरा दिया। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के सिद्धार्थ कुंडू को 6270 वोट मिले। उनकी जमानत भी जब्त हो गई। 

इस बार कैसे हैं समीकरण? 
इस बार आप ने ने मौजूदा विधायक शरद कुमार को ऐन वक्त पर दोबारा टिकट दिया है। 15 जनवरी को पार्टी ने शरद के नाम का एलान किया। इससे पहले इस सीट से 2010 में अर्जुन पुरस्कार जीत चुके कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दिनेश भारतीय को उम्मीदवार बनाया गया था। दिनेश 2022 में वॉर्ड-2 से आप के टिकट पर एमसीडी चुनाव जीते। 2017 में कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़े थे। हालांकि, नामांकन की आखिरी तारीख से दो दिन पहले पार्टी ने एक बार फिर से शरद कुमार को टिकट दे दिया। वहीं, कांग्रेस की तरफ से अरुणा कुमारी मैदान में हैं। अरुणा कुमारी दो बार पार्षद भी रह चुकी हैं। भाजपा ने यहां राज करण खत्री को उतारा है। 

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