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Kalkaji Assembly Seat: दिल्ली की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है कालकाजी, जानें कैसा रहा इसका चुनावी इतिहास

Wed, 08 Jan 2025 06:07 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Wed, 08 Jan 2025 06:07 AM IST
सार

Kalkaji seat: दिल्ली विधानसभा चुनाव में जिन सीटों की सबसे ज्यादा चर्चा होगी उनमें कालकाजी सीट शामिल है। यहां से एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक अलका लांबा तो भाजपा ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को उतारा है। आइये जानते हैं इस सीट का चुनावी इतिहास कैसा रहा है... 

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Delhi Assembly Election 2025 kalkaji Assembly Seat Profile and History News In Hindi atishi marlena
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभा की तारिखों का एलान हो चुका है। राजधानी में 5 फरवरी को एक चरण में मतदान होगा। नतीजे 8 फरवरी को आएंगे। इस चुनाव में कालकाजी सीट सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। मुख्यमंत्री आतिशी यहां से चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने कांग्रेस ने पूर्व विधायक अलका लांबा को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने पूर्व सांसद 

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रमेश बिधूड़ी को उतारा है। 

दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में कालकाजी में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
कालका जी सीट की बात करने से पहले आइये जान लेते हैं दिल्ली को विधानसभा मिलने की कहानी।  कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

कैसे रहा कालकाजी में चुनावों का इतिहास?
कालकाजी सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1972 में हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनसंघ का मुकाबला हुआ। नतीजा कांग्रेस के टिकट पर उतरे वी.पी. सिंह के पक्ष में रहा। उन्होंने भारतीय जनसंघ के एस.पी. बनर्जी को 9683 मत से शिकस्त दी थी। दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में फिर से विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में कालकाजी सीट पर भाजपा ने सफलता हासिल की। पार्टी की तरफ से पूर्णिमा सेठी को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के प्रमुख नेता सुभाष चोपड़ा को 4012 वोट से हराया। पूर्णिमा सेठी बाद में साहब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज मंत्रिमंडल में समाज कल्याण और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री भी बनी थीं।

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कांग्रेस ने की वापसी 
साल 1998 में कालकाजी सीट पर दो पुराने चेहरों के बीच मुकाबला हुआ। जहां भाजपा से मौजूदा विधायक पूर्णिमा सेठी उतरीं तो वहीं कांग्रेस ने सुभाष चोपड़ा पर फिर दांव खेला। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ने अपनी पिछली हार का बदला ले लिया। कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा ने भाजपा उम्मीदवार पूर्णिमा सेठी को 5244 वोट से शिकस्त दी। सुभाष दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं।

2003 में कांग्रेस की जीत 
इस चुनाव में कालकाजी में मुकाबला दो पुराने चेहरों के बीच हुआ। मौजूदा विधायक सुभाष चोपड़ा कांग्रेस का चेहरा थे तो भाजपा ने पूर्व विधायक पूर्णिमा सेठी को टिकट दिया। चुनावी बाजी फिर कांग्रेस ने मारी और सुभाष 17644 मत से विजयी हुए। 

2008 में कांग्रेस ने हैट्रिक लगाई
इस विधानसभा चुनाव में कालकाजी विधानसभा सीट नए रूप में अस्तित्व में आई। नए रूप में आए सीट पर चुनावी नतीजा कुछ नहीं बदला और तीसरी बार सुभाष चोपड़ा विजयी हुए। कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा के जय गोपाल अबरोल को 13389 वोट से परास्त किया। 

जब भाजपा-आप में हुआ मुकाबला 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। कालकाजी विधानसभा सीट पर मुकाबला पिछले चुनावों से अलग रहा। चुनाव नतीजे आए तो भाजपा को जीत मिली लेकिन उसे टक्कर नई-नवेली आम आदमी पार्टी से मिली। भाजपा उम्मीदवार हरमीत सिंह ने आप के धर्मबीर सिंह को 2044 वोट से हराकर यह चुनावी बाजी अपने नाम की। भाजपा को 30683 और आप को 28639 वोट मिले थे। 

आप को मिली पहली सफलता
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो केजरीवाल  ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल की पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

इस चुनाव में कालकाजी सीट पर भाजपा और आप के बीच मुकाबला हुआ। 19769 वोट से चुनाव जीतकर आप ने यहां अपना खाता खोला। आप उम्मीदवार अवतार सिंह कालकाजी को 55104 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी हरमीत सिंह कालका 35335 वोट हासिल करके दूसरे नंबर पर रहे। 

आतिशी ने दर्ज की जीत 

2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। कालकाजी के नतीजों की बात करें तो यहां से आप की तरफ से प्रमुख नेता आतिशी को जीत मिली। आप नेता ने भाजपा के धर्मबीर सिंह को 11393 वोट से पटखनी दी थी। आप को 55897 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रही भाजपा को 44504 वोट मिले। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 

इस बार आम आदमी पार्टी ने कालकाजी सीट से मुख्यमंत्री आतिशी को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक अलका लांबा को उतारा है। चेहरों के कारण कालकाजी सीट एक बार फिर हॉट सीट बन गई है। वहीं भाजपा ने यहां से रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया है। कालका सीट से उम्मीदवार बनाए गए बिधूड़ी अपने बयानों की वजह से विवादों में हैं। 

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