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Hindi News ›   India News ›   Delhi Assembly Election 2020: political history of delhi from 1993 to 2020

1993 में भाजपा ने दिए तीन सीएम, फिर 15 साल चमकी कांग्रेस, 2013 में आप का उदय

Fri, 07 Feb 2020 02:18 PM IST
Amit Mandal अमित मंडल
Updated Fri, 07 Feb 2020 02:18 PM IST
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Delhi Assembly Election 2020: political history of delhi from 1993 to 2020
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स (रोहित झा)

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जनादेश क्या रहेगा, इसका फैसला चंद दिनों बाद हो जाएगा। क्या आप बाजी मारेगी या भाजपा वापसी करने में कामयाब रहेगी, या फिर कांग्रेस बाकी दलों को चौंकाएगी? इन सवालों के जवाब 11 फरवरी को ही मिलेंगे। बहरहाल, चुनावी घमासान के बीच आपको बता रहे हैं दिल्ली का सियासी इतिहास। यहां कब-कब चुनाव हुए और किस पार्टी ने जीत का परचम लहराया।  

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दिल्ली में अब तक सात बार चुनाव

दिल्ली में अब तक सात बार चुनाव हुए हैं। सबसे ज्यादा कांग्रेस ने चार बार, आप ने दो बार (एक बार कांग्रेस के साथ मिलकर) और भाजपा ने एक बार सरकार बनाई है। शीला दीक्षित तीन बार और अरविंद केजरीवाल दो बार मुख्यमंत्री बने। 1993 के पहले चुनाव के बाद भाजपा कभी वापसी नहीं कर सकी। हालांकि हर चुनाव में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा सबसे बड़ा मुद्दा रहता है, लेकिन इस बार हालात और मुद्दे बदल गए हैं। शाहीन बाग का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जा रहा है।   

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दिल्ली में पहला विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ था। पिछले 63 वर्षों में चार बार महानगर परिषद और सात बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। 1967 से 1992 तक दिल्ली में विधानसभा भंग थी और यहां महानगर परिषद के लिए चुनावी रण हुआ करता था। दिल्ली के करोड़ों मतदाताओं ने सियासी दलों को खूब छकाया। पुराने समय से चुनाव में मुख्य रण भाजपा-कांग्रेस के बीच ही हुआ करता था।  

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1993 विधानसभा चुनाव 

1993 में नई गठित विधानसभा के लिए चुनाव हुआ जिसमें भाजपा ने बाजी मारी। 1991 के दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी अधिनियम के तहत विधानसभा बनी थी और पहला चुनाव हुआ। भाजपा के मदनलाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। वह मोतीनगर से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे। 


इस चुनाव में भाजपा ने 70 में से 49 सीटें जीती थीं और उसे 42.80 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस को 34.50 फीसदी और जनता दल को 12.60 फीसदी वोट मिले थे। खुराना 26 फरवरी 1996 तक ही मुख्यमंत्री रह सके। उनकी जगह साहिब सिंह वर्मा सीएम बने। लेकिन चुनाव से पहले उनकी भी विदाई हो गई।  

1998 चुनाव में भाजपा की हार

12 अक्तूबर 1998 को सुषमा स्वराज को सीएम बनाया गया। लेकिन प्याज के दामों ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। 1998 में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने जीत हासिल की। कांग्रेस को 52, भाजपा को 15, जनता दल को एक और निर्दलीयों को दो सीटें मिलीं। 

2003 और 2008 में भी कांग्रेस 

इसके बाद 2003 और 2008 में भी शीला दीक्षित ने कांग्रेस को जीत दिलाई। 2003 में कांग्रेस को 47 और भाजपा को 20 सीटें मिलीं। 2008 में भी भाजपा सत्ता से दूर रही। इस चुनाव में कांग्रेस को 43, भाजपा को 23 और बसपा को दो सीटें मिलीं। 

2013 में आप-कांग्रेस की सरकार 

लेकिन 2013 में कांग्रेस की जीत पर ब्रेक लग गया। नई नवेली आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन बहुमत से काफी दूर रही। 31 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। आप को 28 और कांग्रेस को महज 8 सीटें ही मिलीं। आप ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन ये सरकार सिर्फ 49 दिन तक ही चल सकी। 

2015 में केजरीवाल ने रचा इतिहास

2015 चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आप ने प्रचंड बहुमत हासिल कर नया इतिहास रचा। उसने 70 में से 67 सीटें जीतकर भाजपा-कांग्रेस का सूपड़ा पूरी तरह साफ कर दिया। 2013 में आप को 30 फीसदी वोट मिले थे जो 2015 में बढ़कर 54 फीसदी हो गया। अरविंद केजरीवाल दोबारा सीएम बने। 

विधानसभा में जनता की पसंद

 
वर्ष   सरकार   मत प्रतिशत कुल सीटें 
1952 कांग्रेस 52.09  39
1993  भाजपा 47.82 49
1998 कांग्रेस 47.76   52
2003 कांग्रेस  48.13 47
2008 कांग्रेस   40.31 43
2013   आप-कांग्रेस गठबंधन    
2015 आप 54.3 67

2020 में आप दिख रही मजबूत

अब 2020 चुनाव में आप प्रमुख पार्टी बन चुकी है जिसे भाजपा और कांग्रेस चुनौती दे रहे हैं। मुफ्त बिजली-पानी, मोहल्ला क्लीनिक, सरकारी स्कूलों में सुधार, मोहल्लों में सीसीटीवी कैमरे जैसे कामों के दम पर आप बाकी दलों पर भारी पड़ती दिख रही है। वहीं, भाजपा ने राष्ट्रवाद और शाहीन बाग को प्रमुख मुद्दा बनाया है। कांग्रेस रेस में पिछड़ती दिख रही है। देखना है कि जब 11 फरवरी को नतीजे आएंगे तो सरकार किसकी बनेगी। क्या भाजपा दोबारा दिल्ली की गद्दी हासिल कर पाएगी या केजरीवाल तीसरी बार सीएम पद संभालेंगे।  

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