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जानिए क्या है वो पूरा मामला जिसमें अपनी कुर्सी गंवा बैठे केजरीवाल के 20 विधायक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 21 Jan 2018 06:28 PM IST
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दिल्ली की केजरीवाल सरकार के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। चुनाव आयोग ने इस मामले में बीते शुक्रवार को हुई अहम बैठक में फैसला लेते हुए आप के इन लाभार्थियों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी। जिसके बाद से आप के 20 विधायकों का भविष्य राष्ट्रपति के दरबार में अटका हुआ था। इसी मामले में राष्ट्रपति ने निर्णय लेते हुए आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। ऐसे में जानना जरूरी है कि वो मामला आखिर है क्या जिसके चलते आप के बीस विधायक अपनी कुर्सी गंवा बैठे।
प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति से इस मामले की शिकायत करते हुए सभी 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। लेकिन आप के पूर्व विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफा देने के बाद ऐसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी, जो आज अपनी सदस्यता गंवा बैठे। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने इन 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी।
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असल में 'लाभ के पद' मामले में संविधान के अनुच्छेद 102(1)(A) के अनुसार अगर कोई सांसद या विधायक किसी भी तरह का लाभ का पद उपयोग करता है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। लाभ का यह पद केंद्र या राज्य सरकार किसी के भी अधीन हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार संविधान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऐक्ट 1991 की धारा 15 में भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति विधायक या सांसद के पद पर रहते हुए कोई लाभ का पद धारण करता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। हालांकि पूर्व की सरकारों में भी विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जाता था लेकिन उनकी संख्या दो-तीन से ज्यादा नहीं होती थी। केजरीवाल सरकार ने इस मामले में सारे रिकार्ड तोड़ते हुए एक साथ 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया।
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गौरतलब है कि दिल्ली में पूर्ण बहुमत में आने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने 67 में से 20 विधायकों को मार्च 2015 में संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था। इस मामले में वकील प्रशांत पटेल ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए विधायकों के संसदीय सचिव के पद को 'लाभ का पद' बताते हुए राष्ट्रपति से शिकायत की थी।
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प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति से इस मामले की शिकायत करते हुए सभी 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। लेकिन आप के पूर्व विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफा देने के बाद ऐसे विधायकों की संख्या 20 रह गई थी, जो आज अपनी सदस्यता गंवा बैठे। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने इन 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी।
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असल में 'लाभ के पद' मामले में संविधान के अनुच्छेद 102(1)(A) के अनुसार अगर कोई सांसद या विधायक किसी भी तरह का लाभ का पद उपयोग करता है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। लाभ का यह पद केंद्र या राज्य सरकार किसी के भी अधीन हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार संविधान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऐक्ट 1991 की धारा 15 में भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति विधायक या सांसद के पद पर रहते हुए कोई लाभ का पद धारण करता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। हालांकि पूर्व की सरकारों में भी विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जाता था लेकिन उनकी संख्या दो-तीन से ज्यादा नहीं होती थी। केजरीवाल सरकार ने इस मामले में सारे रिकार्ड तोड़ते हुए एक साथ 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया।
ये हैं केजरीवाल के 20 विधायक जिनकी गई कुर्सी
1. प्रवीण कुमार- जंगपुरा से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री के संसदीय सचिव थे।
2. शरद कुमार- नरेला से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में राजस्व मंत्री के संसदीय सचिव थे।
3. आदर्श शास्त्री- द्वारका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सूचना मंत्री के संसदीय सचिव थे।
4. मदन लाल- कस्तूरबा नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सतर्कता मंत्री के संसदीय सचिव थे।
5. चरण गोयल- मोती नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में वित्त मंत्री के संसदीय सचिव थे।
6. सरिता सिंह- रोहतास नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में रोजगार मंत्री के संसदीय सचिव थे।
7. नरेश यादव- महरौली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में श्रम मंत्री के संसदीय सचिव थे।
8. जरनैल सिंह- तिलक नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में विकास मंत्री के संसदीय सचिव थे।
9. राजेश गुप्ता- वजीरपुर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
10. अलका लांबा- चांदनी चौक से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पर्यटन मंत्री के संसदीय सचिव थे।
11. नितिन त्यागी- लक्ष्मी नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में महिलाओं और बच्चे और सामाजिक कल्याण के संसदीय सचिव थे।
12. संजीव झा- बुराड़ी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री के संसदीय सचिव थे।
13. कैलाश गहलोत- नजफगढ़ से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री के संसदीय सचिव थे।
14. विजेंद्र गर्ग- राजेन्द्र नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यू मंत्री के संसदीय सचिव थे।
15. राजेश ऋषि- जनकपुरी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
16. अनिल कुमार वाजपेयी- गांधीनगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
17. सोमदत्त- सदर बाजार से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में उद्योग मंत्री के संसदीय सचिव थे।
18. सुखबीर सिंह डाला- मुंडका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भाषाएं और अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के संसदीय सचिव थे।
19. मनोज कुमार- कोंडली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भोजन और नागरिक आपूर्ति मंत्री के संसदीय सचिव थे।
20. अवतार सिंह- कालकाजी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में गुरुद्वारा चुनाव मंत्री के संसदीय सचिव थे।
2. शरद कुमार- नरेला से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में राजस्व मंत्री के संसदीय सचिव थे।
3. आदर्श शास्त्री- द्वारका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सूचना मंत्री के संसदीय सचिव थे।
4. मदन लाल- कस्तूरबा नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सतर्कता मंत्री के संसदीय सचिव थे।
5. चरण गोयल- मोती नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में वित्त मंत्री के संसदीय सचिव थे।
6. सरिता सिंह- रोहतास नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में रोजगार मंत्री के संसदीय सचिव थे।
7. नरेश यादव- महरौली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में श्रम मंत्री के संसदीय सचिव थे।
8. जरनैल सिंह- तिलक नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में विकास मंत्री के संसदीय सचिव थे।
9. राजेश गुप्ता- वजीरपुर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
10. अलका लांबा- चांदनी चौक से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पर्यटन मंत्री के संसदीय सचिव थे।
11. नितिन त्यागी- लक्ष्मी नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में महिलाओं और बच्चे और सामाजिक कल्याण के संसदीय सचिव थे।
12. संजीव झा- बुराड़ी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री के संसदीय सचिव थे।
13. कैलाश गहलोत- नजफगढ़ से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री के संसदीय सचिव थे।
14. विजेंद्र गर्ग- राजेन्द्र नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यू मंत्री के संसदीय सचिव थे।
15. राजेश ऋषि- जनकपुरी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
16. अनिल कुमार वाजपेयी- गांधीनगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।
17. सोमदत्त- सदर बाजार से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में उद्योग मंत्री के संसदीय सचिव थे।
18. सुखबीर सिंह डाला- मुंडका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भाषाएं और अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के संसदीय सचिव थे।
19. मनोज कुमार- कोंडली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भोजन और नागरिक आपूर्ति मंत्री के संसदीय सचिव थे।
20. अवतार सिंह- कालकाजी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में गुरुद्वारा चुनाव मंत्री के संसदीय सचिव थे।
अब क्या होगा ?
आप के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। आम आदमी पार्टी के संयोजक गोपाल राय ने कहा है कि जरूरत पड़े तो वे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि संसदीय सचिव नियुक्त करने संबंधी केजरीवाल के आदेश की वैधानिकता को हाईकोर्ट में पहले ही चुनौती दी जा चुकी है।
अदालत इस मामले को उपराज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के अधिकारक्षेत्र से संबंधित याचिका के साथ मिलाकर सुनवाई कर रही है। इसलिए हाईकोर्ट का फैसला आने तक निर्वाचन आयोग कोई सिफारिश नहीं करेगा।
दिल्ली में 1997 में सिर्फ दो पद (महिला आयोग और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष) ही लाभ के पद से बाहर थे। 2006 में नौ पद इस श्रेणी में रखे गए, पहली बार मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव पद को भी शामिल किया गया था। दिल्ली सरकार मौजूदा कानून में संशोधन कर "मुख्यमंत्री और मंत्रियों के संसदीय सचिव" शब्द को शामिल करना चाहती है।
अदालत इस मामले को उपराज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के अधिकारक्षेत्र से संबंधित याचिका के साथ मिलाकर सुनवाई कर रही है। इसलिए हाईकोर्ट का फैसला आने तक निर्वाचन आयोग कोई सिफारिश नहीं करेगा।
दिल्ली में 1997 में सिर्फ दो पद (महिला आयोग और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष) ही लाभ के पद से बाहर थे। 2006 में नौ पद इस श्रेणी में रखे गए, पहली बार मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव पद को भी शामिल किया गया था। दिल्ली सरकार मौजूदा कानून में संशोधन कर "मुख्यमंत्री और मंत्रियों के संसदीय सचिव" शब्द को शामिल करना चाहती है।