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जम्मू कश्मीर से 370 हटाना साहसिक फैसला लेकिन सामने और भी चुनौतियां, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Tue, 06 Aug 2019 06:58 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Tue, 06 Aug 2019 06:58 AM IST
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Deleting 370 from Jammu Kashmir is a bold decision, but even more challenges, Know experts said?
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य में अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। इस निर्णय से लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है और दोनों अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश रहेंगे। मोदी सरकार के इस फैसले को देश-दुनिया में सराहा गया तो वहीं, विपक्ष ने इसकी आलोचना की। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 

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सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस अशोक कुमार गांगुली ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना असंवैधानिक नहीं है। राज्य को विशेष दर्जा देने का फैसला अस्थायी और सामयिक था। इसलिए इसे हमेशा बनाए नहीं रखा जा सकता था। अनुच्छेद 370 (उप-धारा 3) में विशेष दर्जा वापस लेने का एक प्रावधान है। 
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गांगुली ने कहा, अस्थायी प्रावधान 70 वर्षों से ज्यादा समय तक जारी रहा है। अब इसे और कितने दिन तक जारी रखा जाएगा? यह कहना मुश्किल है कि इसे खत्म करने का फैसला राजनीतिक तौर पर उचित है या नहीं। लेकिन यह असांविधानिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अदालत में सरकार के फैसले को चुनौती दी जाती है, तो गहराई से जांच के बाद उसका (अदालत का) रवैया भिन्न हो सकता है। लेकिन फिलहाल यह असांविधानिक नजर नहीं आता है।

भाजपा सरकार के समक्ष अब होंगी तीन चुनौतियां: अभय दुबे

Deleting 370 from Jammu Kashmir is a bold decision, but even more challenges, Know experts said?
Abhay Dubey - फोटो : Social Media

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अभय दुबे ने कहा कि यह मोदी सरकार का साहसपूर्ण फैसला है। हालांकि इसके साथ ही भाजपा सरकार को अब आने वाली तीन चुनौतियों का सामना करना होगा। एक तो यह कि पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां घाटी में गोलबंदी करने की कोशिश करेंगी। नजरबंदी हटने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला घाटी में इस मुद्दे को गर्माने की कोशिश करेंगे। दूसरी चुनौती यह होगी कि इस फैसले के खिलाफ विपक्ष या कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। ऐसे में सरकार को अपने फैसले को सही साबित ठहराने की चुनौती होगी। तीसरी चुनौती सरकार को पाकिस्तान से मिलेगी। सर्दियों में घुसपैठ बढ़ सकती है। इसके अलावा 370 खत्म करने से यह गारंटी कतई नहीं होगी कि जम्मू-कश्मीर से आतंक खत्म हो जाएगा। 

पाकिस्तान और ज्यादा आतंकियों को भेजने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में अगर आतंकियों से निपटने की तैयारी मुकम्मल नहीं होगी तो वहां के हालात नहीं बदल पाएंगे। भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाक को अलग-थलग करना होगा। हालांकि, इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां पुरानी सियासत का राग छेड़ेंगी। वह पूर्ण राज्य की मांग कर सकती हैं। गठबंधन सरकार के दौरान भाजपा से हाथ मिलाने वाली पीडीपी की हालत अब उतनी अच्छी नहीं रही, यह बात भाजपा अच्छी तरह से जानती है। पीडीपी दक्षिण कश्मीर में चुनाव हार गई थी। इसे देखते हुए भाजपा वहां के उभरते हुए दलों जैसे नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और इंजीनियर राशिद की पार्टी को आगे बढ़ा रही है, ताकि सियासत का वहां पर नया माहौल बन सके।

बेहतर होगी सुरक्षा व्यवस्था, रोजगार के खुलेंगे अवसर

बाबा भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो शशिकांत पांडेय ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर सीधे केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आएगा, जिससे वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी। व्यापार बढ़ेगा, नई इंडस्ट्री लग सकेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। जब युवाओं को रोजगार मिलेगा तो आतंकवाद कम होगा। अभी तक हमारा पूरा पैसा वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने में जाता है। अब उस पैसे का प्रयोग विकास कार्यों के लिए भी होगा। हालांकि, इसका दूसरा पहलू ये भी है कि वहां के लोग इसे कितनी आसानी से स्वीकार करते हैं।

मुख्य धारा से जुडे़गा जम्मू-कश्मीर

डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि, लखनऊ में राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अश्वनी कुमार दुबे ने कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म होने से जम्मू-कश्मीर देश की मुख्य धारा से जुड़ेगा। वहां इकहरी नागरिकता लागू होगी। संपत्ति और शिक्षा के अधिकार प्रभावी होंगे, जो वहां बदलाव का मुख्य कारण बनेंगे। वहां विकास के नए अवसर खुलेंगे, जिससे आतंकवाद व अलगाववाद की समस्या समाप्त हो जाएगी। वहीं, केंद्र की योजनाएं ठीक से प्रभावी होंगी तो वहां विकास का पहिया तेजी से चलेगा।

आरोप: खतरा बताकर जम्मू-कश्मीर का नक्शा बदल दिया

प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने भाजपा पर साजिश एवं धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भाजपा ने खतरा बताकर जम्मू-कश्मीर का नक्शा बदल दिया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा ने साजिश एवं धोखाधड़ी की है। लोगों को बताया गया कि वहां खतरा है। उसके बाद जम्मू कश्मीर का पूरा नक्शा बदल दिया। 

उन्होंने कहा- भाजपा नेता कहते थे कि जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जा को बदलना चाहते हैं। लेकिन उन्होंने विशेष दर्जा खत्म नहीं किया। उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाकर फिर विशेष दर्जा दे दिया। उन्होंने कहा कि वर्षो से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है। अब उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश बनाकर मामूली राज्य से भी नीचे कर दिया। उन्होंने कहा कि पता नहीं भविष्य में क्या होगा। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर बहुत ही कमजोर हो गया। हम कहते थे कि कश्मीर का पार्ट पीओके भी है।

आगे उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के नॉर्दर्न टेरिटरी को भी हमने जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया। केंद्र शासित प्रदेश बनाकर लद्दाख को अलग कर दिया। अब किस मुंह से कहेंगे कि नॉर्दर्न टेरिटरी पाकिस्तान नहीं रख सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र के फैसले से भारत बदनाम होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्रियों की कोई हैसियत नहीं रहेगी। पता नहीं वहां कब चुनाव होगा। अब केंद्र शासित प्रदेश बन जाने पर जो चाहेंगे वहीं करेंगे।

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