रक्षा मंत्री राजनाथ राज्यसभा में बोले, भारत-चीन चरणबद्ध ढंग से हटाएंगे सेना
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राज्यसभा में एक वक्तव्य के जरिए दोनों देशों के बीच हुए समझौते का विवरण देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि चीनी सेना झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-8 के पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगी तो दूसरी ओर भारतीय सेना फिंगर-3 के पास मेजर धन सिंह थापा चौकी पर बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से अपनी आगे की तैनाती को रोक देंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा झील के दक्षिणी किनारे पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
शांति व यथास्थिति कायम रखी
तनाव के बीच दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक दूसरे के साथ संचार संबंध बनाए रखा। हमारा उद्देश्य एलएसी के साथ-साथ शांति और शांति बहाल करने के लिए असहमति और यथास्थिति बनाए रखना था।
Our Armed Forces responded to challenges by unilateral Chinese action & have shown valour & courage on both South & North bank of Pangong Tso. Many strategic points were identified & our troops positioned themselves at locations very important from our point of view: Defence Min pic.twitter.com/KsRfZ4KgCy
— ANI (@ANI) February 11, 2021
लगभग पांच महीने पहले चीनी सेना द्वारा भारतीय सेना को धमकाने के प्रयासों के मद्देनजर पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की तरफ रणनीतिक लिहाज से अहम मुखपारी, रेछिन ला और मगार की पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था।
भारत ने कुछ भी नहीं खोया
रक्षा मंत्री ने यह आश्वासन भी दिया कि इस प्रक्रिया के दौरान भारत ने कुछ भी खोया नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी के अन्य क्षेत्रों में तैनाती और निगरानी के बारे में कुछ लंबित मुद्दे बचे हैं। इन पर हमारा ध्यान आगे की बातचीत में रहेगा।
सिंह ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे रुख और अनवरत वार्ताओं के फलस्वरूप चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तर एवं दक्षिण किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने को लेकर समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बात पर भी सहमति हो गई है कि पैंगोंग झील से पूर्ण तरीके से सेनाओं के पीछे हटने के 48 घंटे के अंदर वरिष्ठ कमांडर स्तर की बातचीत हो तथा बाकी बचे हुए मुद्दों पर भी हल निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि चीन अपनी सेना की टुकडि़यों को उत्तरी किनारे में फिंगर आठ के पूरब की दिशा की तरफ रखेगा। इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकडि़यों को फिंगर तीन के पास अपने स्थायी ठिकाने धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा। इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी किनारे वाले क्षेत्र में भी दोनों पक्षों द्वारा की जाएगी। ये कदम आपसी समझौते के तहत बढ़ाए जाएंगे तथा जो भी निर्माण आदि दोनों पक्षों द्वारा अप्रैल-2020 से उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर किया गया है, उन्हें हटा दिया जाएगा और पुरानी स्थिति बना दी जाएगी।।
ज्ञात हो कि पिछले नौ महीने से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए सितम्बर-2020 से लगातार सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्षों में कई बार बातचीत हुई।
सेना ने शौर्य व बहादुरी का परिचय दिया
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेनाओं को पीछे हटाने के लिए आपसी समझौते के तहत तरीका निकाले जाने को लेकर वरिष्ठ कमांडर स्तर की नौ दौर की बातचीत भी हो चुकी है। इसके अलावा राजनयिक स्तर पर भी बैठकें होती रही हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाओं ने चीनी सेना की सभी चुनौतियों का डटकर सामना किया है तथा अपने शौर्य एवं बहादुरी का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई क्षेत्रों को चिन्हित कर हमारी सेनाएं कई पहाडि़यों के ऊपर तथा हमारे दृष्टिकोण से उपयुक्त अन्य क्षेत्रों पर मौजूद हैं। भारतीय सेनाएं अत्यंत बहादुरी से लद्दाख की ऊंची दुर्गम पहाडि़यों तथा कई मीटर फैली बर्फ के बीच में भी सीमाओं की रक्षा करते हुए अडिग हैं और इसी कारण हमारी बढ़त बनी हुई है।
एक इंच जमीन किसी को लेने नहीं देंगे
सिंह ने कहा कि देश की सेनाओं ने इस बार भी यह साबित कर दिखाया है कि भारत की संप्रभुता एवं अखंडता की रक्षा करने में वे सदैव तत्पर हैं और यह अनवरत कर भी रहे हैं। भारत अपनी एक इंच जमीन भी किसी को लेने नहीं देगा और इसी दृढ़ संकल्प का ही नतीजा है कि हम पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध के मद्देनजर समझौते की स्थिति पर पहुंचे हैं।
तीन सिद्धांतों के आधार पर समस्या का समाधान
रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर चीन के साथ हुई वार्ता के दौरान भारत ने चीन को बताया कि वह तीन सिद्धांतों के आधार पर इस समस्या का समाधान चाहता है। पहला दोनों पक्षों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा को माना जाए और उसका सम्मान किया जाए। दूसरा किसी भी पक्ष द्वारा यथास्थिति को बदलने का एकतरफा प्रयास नहीं किया जाए। तीसरा सभी समझौतों का दोनों पक्षों द्वारा पूर्ण रूप से पालन किया जाए।
चीनी सेना के फिंगर-8 तक लौटने की घोषणा अहम
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान स्पष्ट करता है कि फिंगर-3 और फिंगर आठ के बीच का क्षेत्र भविष्य में तैनाती को लेकर किसी समझौते पर पहुंचने तक प्रभावी तौर पर नो पेट्रोलिंग क्षेत्र हो जाएगा। ज्ञात हो कि चीनी सेना ने फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच के क्षेत्रों में बंकरों समेत कई विभिन्न निर्माण कार्यों का अंजाम दिया था और फिंगर-4 से आगे भारतीय सेना की पेट्रोलिंग पर रोक लगा दी थी। भारतीय सेना ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की।
चीन के साथ नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच चीनी सेनाओं को हटाए जाने पर जोर दिया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र में सहायक प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मण बेहेरा चीनी सेना के फिंगर-8 तक लौट जाने की घोषणा को अहम बताया। उन्होंने बताया कि यह एक अहम कदम है। यह देर से हुआ लेकिन मेरा मानना है कि सेनाओं को हटाने की पूरी प्रक्रिया की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।