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चीन से लोहा लेने की तैयारी: रक्षा मंत्रालय ने पनडुब्बी कार्यक्रम के लिए जारी किया अनुरोध प्रस्ताव
Wed, 21 Jul 2021 04:22 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 21 Jul 2021 04:22 AM IST
सार
- नौसेना के लिए 40 हजार करोड़ की लागत से देश में होना है छह पनडुब्बियों का निर्माण
- भारतीय नौसेना ने 2030 में समाप्त होने वाले 30 साल के कार्यक्रम के तहत पानी के भीतर युद्ध की क्षमता को बढ़ाने के लिए छह परमाणु हमले वाली पनडुब्बियों सहित 24 नई पनडुब्बियों की खरीद की योजना बनाई है
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भारतीय नौसेना पनडुब्बी: आईएनएस चक्र
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रक्षा मंत्रालय ने वृहद खरीद परियोजना को मंजूरी मिलने के एक महीने बाद मंगलवार को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से नौसेना के लिए छह पारंपरिक पनडुब्बियों के देश में निर्माण के लिए औपचारिक निविदा या अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) को जारी किया।
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रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत यह पहली खरीद होगी। ये पनडुब्बियां उस रणनीतिक साझेदारी के तहत बनाई जाएंगी जो घरेलू रक्षा उपकरण निर्माताओं को विदेशों की रक्षा निर्माण क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों के साथ साझेदारी में अत्याधुनिक सैन्य मंच बनाने की अनुमति देता है।
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रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार एक लंबी प्रक्रिया के बाद दो भारतीय कंपनियों मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को आरएफपी जारी करने को मंजूरी दी गई। एलएंडटी और एमडीएल दोनों को पहले से ही सूचीबद्ध पांच विदेशी शिपयार्ड में से एक के साथ सहयोग करना होगा। इन कंपनियों में देवू शिपबिल्डिंग (दक्षिण कोरिया), थायसीनक्रूप मरीन सिस्टम्स (जर्मनी), नवांटिया (स्पेन) और नेवल ग्रुप (फ्रांस) और जेएससी आरओई (रूस) शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने कहा, यह पांचों विदेशी कंपनियां पारंपरिक पनडुब्बी डिजाइन, निर्माण और अन्य सभी संबंधित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे हैं। विदेशी ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) एसपी मॉडल में प्रौद्योगिकी भागीदार होंगे।
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रक्षा खरीद परिषद (डीएएसी) ने पिछले महीने ‘प्रोजेक्ट-75 (आई)’ नामक परियोजना के लिए अनुरोध पत्र जारी करने को मंजूरी दे दी थी। मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना न केवल पनडुब्बी, जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने में सहायता करेगी, बल्कि पनडुब्बियों से संबंधित कल-पुर्जों प्रणालियों और उपकरणों के निर्माण के लिए एक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में योगदान देगी।
24 पनडुब्बियों की खरीद की है योजना
भारतीय नौसेना ने 2030 में समाप्त होने वाले 30 साल के कार्यक्रम के तहत पानी के भीतर युद्ध की क्षमता को बढ़ाने के लिए छह परमाणु हमले वाली पनडुब्बियों सहित 24 नई पनडुब्बियों की खरीद की योजना बनाई है। वर्तमान में नौसेना के पास 15 पारंपरिक पनडुब्बियां और दो परमाणु क्षमता से संपन्न पनडुब्बियां हैं। हिंद महासागर में अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के चीन के प्रयासों के मद्देनजर नौसेना अपनी सभी क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। भारत के सामरिक हितों के लिहाज से हिंद महासागर की अहमियत बढ़ गई है।
चीन के पास हैं 50 पनडुब्बियां
वैश्विक विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की नौसेना के पास अभी 50 पनडुब्बी और करीब 350 पोत हैं। अगले आठ से दस वर्ष में उसके पास 500 से अधिक पोत तथा पनडुब्बियां हो सकते हैं। भारतीय नौसेना रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 57 लड़ाकू विमान, 111 हेलीकॉप्टर (एनयूएच) और 123 बहु-भूमिका वाले हेलिकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया में है।