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Dattatreya Hosabale: 'पश्चिमी उदारवादी विचार देश की संस्कृति के लिए खतरा', आरएसएस महासचिव बोले- इसे रोकना होगा

Wed, 05 Feb 2025 05:53 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 05 Feb 2025 05:53 AM IST
सार

संघ महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि भारत में कई रास्तों से कार्यरत पश्चिमी उदारवादी विचार देश की सांस्कृतिक निरंतरता के लिए खतरे का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि जब हमारी नई पीढ़ी के दिमाग में ऐसे विचार भर जाएंगे, तो देश की सांस्कृतिक निरंतरता समाप्त हो जाएगी। 

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Dattatreya Hosabale Said Western liberal ideas operating in India a threat to cultural continuity Hindi News
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने बुधवार को पश्चिमी उदारवादी विचार को देश के लिए खतरा बताया। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत में विभिन्न माध्यमों और रास्तों से कार्यरत पश्चिमी उदारवादी विचार देश की सांस्कृतिक निरंतरता के लिए खतरे का कारण बन रहे हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से जागने और इस प्रक्रिया को रोकने की अपील की।
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होसबोले ने कहा कि यह उदारीकरण और वैश्वीकरण के नाम पर एक नया उपनिवेशीकरण तरीका है, जिसमें सभी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विचारों को एक समान रूप में पेश किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब हमारी नई पीढ़ी के दिमाग में ऐसे विचार भर जाएंगे, तो देश की सांस्कृतिक निरंतरता समाप्त हो जाएगी। 
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किताब के कार्यक्रम में बोले होसबोले
बता दें कि होसबोले बुधवार को आरएसएस महासचिव राजीव मल्होत्रा और विजया विश्वनाथन द्वारा लिखी गई पुस्तक हू इज राइज़िंग योर चिल्ड्रन: ब्रेकिंग इंडिया विद यूथ वॉरियर्स" के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अब समाज में जागरूकता फैलाने का आंदोलन अलग-अलग तरीकों से काम कर रहा है और यह एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है।
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साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश की सांस्कृतिक सीमाएं अब कमजोर हो गई हैं और अगर इन्हें ठीक से नहीं बचाया गया, तो यह देश के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है। उनका मानना है कि भारत अन्य सभ्यताओं और विचारों के लिए हमेशा खुला रहा है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जो विचार यहां आ रहे हैं, वे हमारे सांस्कृतिक और नैतिक मानकों के अनुरूप हों। 

होसबोले नें आयात को लेकर जताई चिंता
होसबोले ने पश्चिमी शिक्षा प्रणाली और कामुकता से संबंधित विचारों के आयात को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि जो विचार हमारी नई पीढ़ी के दिमाग में प्रवेश कर रहे हैं, वे स्वस्थ और सांस्कृतिक रूप से मजबूत होने चाहिए।


किताब को बताया चेतावनी की घंटी
आरएसएस महासचिव होसबोले ने कहा कि ये किताब एक चेतावनी की घंटी है, जो देश की सांस्कृतिक निरंतरता के लिए उठने वाले खतरों को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति देश में सफलतापूर्वक लागू होगी और यह उन खतरों को रोकने में मदद करेगी जिनका जिक्र पुस्तक में किया गया है।
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