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गोरखालैंड पर केंद्र सरकार के हाथ तंग, अपने ही मंत्री ने बढ़ा दी मुश्किलें

Sat, 17 Jun 2017 10:56 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 17 Jun 2017 10:56 PM IST
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darjeeing unrest gorkhaland no comittee without state agreement
दार्जिलिंग के हिंषक हालातों पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की नजर पल-पल जमी हुई है। मगर सौ वर्षो से चली आ रही अलग गोरखालैंड पर आगे बढने के मामले में केंद्र के हाथ बंधे हुए हैं। उपर से सरकार के अपने ही मंत्री ने मामले पर समिति बनाने की मांग कर गृह मंत्रालय की मुश्किलें बढा दी हैं।
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गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि गोरखालैंड मामले में केंद्र सरकार के हाथ तंग हैं। राज्य सरकार की सहमति के बिना समिति का गठन नहीं हो सकता है। हालांकि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय सूबे की सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। याद रहे कि केंद्रीय राज्य मंत्री एसएस अहलूवालिया ने गृहमंत्री को खत लिखकर गोरखालैंड की समस्या के समाधान के लिए एक समिति बनाने की मांग की थी। 
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ममता से दोबार बात कर चूके हैं राजनाथ 
दार्जिलिंग के हालातों को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। बीते दो दिनों में उन्होंने ममता से दो बार फोन पर बात की है। सूत्र बताते हैं कि दार्जिलिंग की स्थिति बिगड़़ने लेकिन राजनाथ ने शनिवार को गृहसचिव से तत्काल बात कर उनसे स्थिति का ब्यौरा मांगा। उसके बाद देर शाम उन्होंने ममता से भी मामले में बात की। 
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भाषा विवाद पर ममता ने केंद्र को दिया स्पष्टीकरण

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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह
दार्जिलिंग के हालातों के लिए ममता ने गोरखा नेताओं को दोषी ठहराया है। भाषा विवाद पर केंद्र को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए ममता ने कहा है कि जिस मुद्दे को लेकर आंदोलन की शुरूआत हुई है वैसा कोई नियम उनकी सरकार ने नहीं बनाया है। ममता ने केंद्रीय गृहमंत्री से स्पष्ट कहा है कि दसवीं तक बांग्ला भाषा की अनिवार्य पढाई के लिए कोई लिखित नियम नहीं बना है।

दरअसल बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रदेश सरकार पर इस बात के दबाव बनाए जा रहे थे कि वह स्पष्टीकरण जारी कर दे कि दार्जिलिंग इलाके में दशवीं कक्षा तक की अनिवार्यता दार्जिलिंग में लागू नहीं होगी। इसपर ममता ने केंद्र सरकार से स्पष्ट कहा है कि उनकी सरकार ने ऐसा कोई नियम ही नहीं बनाया है।

शांति बहाली के लिए केंद्र पर भी बनने लगा दबाव

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darjeeling
दार्जिलिंग के हालातों को सामान्य बनाने का दबाव अब केंद्र पर भी पडने लगा है। कानून व्यवस्था का मामला बेशक राज्य सरकार का मामला है। मगर आॅल इंडिया टी ट्रेडर्स के नेताओं ने केंद्रीय राज्य मंत्री एसएस अहलूवालिया से मुलाकात कर दार्जिलिंग में तुरंत स्थिति सामान्य बनाने के लिए ज्ञापन दिया है।

शुक्रवार को चाय ट्रेडिंग से जुडे नेताओं ने कृषि मंत्रालय में अहलूवालिया से मुलाकात कर कहा है कि यह समय चाय की पत्तियां निकालने के लिए अहम होता है। लेकिन दार्जिलिंग में फैली अशांति की वजह से पूरा कारोबार ठप्प पडा है। इससे चाय के व्यपार पर गहरा असर पडेगा। वैसे अहलूवालिया भी मामले को लेकर गृहमंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हैं
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