उम्मीद: डांस थेरेपी अवसाद में दवाओं से ज्यादा असरदार, थिरकने से मस्तिष्क में खुशी के रसायन बढ़ते हैं
भारत में नृत्य केवल कला नहीं, आत्मा और शरीर की साधना है। अब मनोवैज्ञानिक शोध भी मानते हैं कि संगीत पर थिरकना अवसाद को कम करने में बेहद कारगर है। नेशनल ज्योग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार, नृत्य के दौरान मस्तिष्क में डोपामिन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे रसायन सक्रिय होते हैं, जो मानसिक संतुलन और खुशी बढ़ाते हैं।
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भारत में नृत्य सदियों से केवल मनोरंजन या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं रहा, बल्कि इसे आत्मा और शरीर की साधना माना गया है। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी से लेकर लोकनृत्य गरबा और भंगड़ा तक इन परंपरागत नृत्यों में आनंद और ऊर्जा का अनोखा संगम है। अब ताजा मनोवैज्ञानिक अध्ययनों ने इसे नया नाम दिया है,मानसिक दवा। नेशनल ज्योग्राफिक की एक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि संगीत की धुन पर थिरकना अवसाद के लक्षणों को घटाने में इतना असरदार है कि यह दवाओं, योग या वॉकिंग जैसे पारंपरिक उपायों से भी ज्यादा कारगर साबित हो रहा है।
कई देशों में किए गए मनोवैज्ञानिक अध्ययनों ने नृत्य को मानसिक दवा की तरह मान्यता दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जब लोग संगीत पर थिरकते हैं और समूह में नृत्य करते हैं तो उनके मस्तिष्क में ऐसे रसायनों का स्तर बढ़ जाता है, जो खुशी और संतुलन की भावना को मजबूत करते हैं। नृत्य करते समय मस्तिष्क में डोपामिन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे रसायन सक्रिय होते हैं।
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ये वही फील-गुड हार्मोन हैं जिनकी कमी अवसाद को जन्म देती है। जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस के अनुसार नृत्य आधारित थेरेपी करने वालों में एंडोर्फिन का स्तर 15 से 20% तक बढ़ा, जिससे नींद और मूड दोनों में सुधार हुआ। संगीत की धुन में नृत्य की थिरकन एक ऐसा संगम है जो दिमाग के मिरर न्यूरॉन सिस्टम को सक्रिय करता है। इससे इंसान को दूसरों के साथ जुड़ाव का अनुभव होता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की मनोचिकित्सक डॉ. लिसा फेल्डमैन कहती हैं, समूह में नृत्य करने से मस्तिष्क सामूहिक अनुभव को सुरक्षा और अपनापन समझता है। यह अकेलेपन की जड़ को काटता है।
बढ़ता है आत्मविश्वास
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने 50 मरीजों पर डांस थेरेपी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। 12 हफ्तों के इस प्रयोग में पाया गया कि 30% मरीजों में अवसाद के लक्षणों में स्पष्ट कमी आई और 70% प्रतिभागियों ने खुद को ज्यादा आत्मविश्वासी और सामाजिक महसूस किया। परियोजना की अगुवाई करने वाली प्रोफेसर डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि भारत जैसे समाज में जहां नृत्य और संगीत संस्कृति का हिस्सा हैं, वहां इस थेरेपी को आसानी से अपनाया जा सकता है।
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कैंसर रोगियों पर भी कारगर
मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल ने 65 कैंसर सर्वाइवर्स पर डांस एंड हीलिंग प्रोग्राम चलाया। इसका उद्देश्य कैंसर से उबर चुके मरीजों में पोस्ट ट्रॉमैटिक डिप्रेशन को कम करना था। छह महीने के इस कार्यक्रम में 80% प्रतिभागियों ने बताया कि उनकी चिंता और अवसाद का स्तर कम हुआ है।