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पड़ोसी से 200 रुपये उधार लेकर खरीदी लॉटरी, बना डेढ़ करोड़ का मालिक

Thu, 13 Sep 2018 08:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संगरूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संगरूर Updated Thu, 13 Sep 2018 08:21 AM IST
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daily labourer borrows 200 rupees to buy a lottery ticket and win jackpot of 1.5 crore

मनोज कुमार ने एक पड़ोसी से 200 रुपए उधार लेकर लॉटरी का एक टिकट खरीदा था। लेकिन वह टिकट उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा इसका अंदाजा शायद ही उन्हें था। किस्मत ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी और उस टिकट ने उन्हें डेढ़ करोड़ रुपये का मालिक बना दिया है। यह खबर मिलने के बाद मनोज ने अपनी बड़ी बेटी को बताया कि वह अब अपने अधूरे सपने को पूरा कर सकती है। उनकी बेटी पढ़ाई बीच में छोड़ने की कगार पर थी। उसने बेटी को बताया कि वह अब भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने की तैयारी कर सकती है, जिसका उसने हमेशा से सपना देखा है। 

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कुमार ने अपनी दूसरी बेटी से कहा है कि वह नर्स बनने की बजाए डॉक्टर बनने की कोशिश कर सकती है। पंजाब के संगरुर के रहने वाले 40 साल के मनोज और उनकी पत्नी राज कौर कुछ दिनों पहले तक गांव के नजदीक बने ईंट के भट्ठे पर मजदूरी करके मुश्किल से 250 रुपये कमा पाते थे। उनके लिए जिंदगी काफी मुश्किल थी। वह जो कमाते उससे मुश्किल से भरपेट खाना खाते थे। लेकिन उनकी जिंदगी उस समय बदल गई जब उन्होंने राज्य सरकार की राखी बंपर लॉटरी जीत ली। 
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रातोंरात एक दिहाड़ी मजदूर करोड़पति बन गया। अब उनके आस-पास प्रोपर्टी एजेंट और बैंकर्स निवेश की योजना लेकर आ रहे हैं। उनके गांव में वह किसी हीरो से कम नहीं समझे जा रहे हैं। कुमार को यदि अब कोई दुख है तो वह यही है कि वह अपने बीमार पिता हवा सिंह को ठीक नहीं कर पाए। सिंह की हाल ही में अस्थमा की वजह से मौत हो गई थी। कुमार ने कहा, 'मुझे यह लॉटरी पहले जीतनी चाहिए थी। शायद मेरे पिता बच जाते। पिता की मौत के बाद मैं ईंट के भट्ठे पर वापस गया। वहां काम से ज्यादा घंटे देने के बावजूद मुझे एक दिन के 250 रुपये से ज्यादा कभी नहीं मिले। मुझे हर ईंट के 50 पैसे मिला करते थे।' 
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वह अब लॉटरी के पैसों से खेती के लिए जमीन खरीदना चाहते हैं। वह अपने परिवार के लिए एक पक्का मकान बनाना चाहते हैं ताकि उन्हें टूटे-फूटे घर में ना रहना पड़े। वह अपना एक छोटा सा व्यापार शुरू करना चाहते हैं जिसके लिए करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों से बातचीत चल रही है। मनोज की मां कृष्णा देवी ने बताया कि वह 1984 में मांडवी गांव आकर बस गए थे। उन्होंने कहा, 'हमारे कुछ रिश्तेदार यहां रहते हैं। हरियाणा के नरवाना जिला के गांव में हर साल बाढ़ की वजह से फसलें बर्बाद हो जाती थीं। यहां पंचायत ने गांव के बाहरी क्षेत्र में हमें 200 स्कवायर यार्ड की जमीन दी है। वह अच्छे दिन थे और उस समय लोग पैसों को आज की तरह इतनी अहमियत नहीं देते थे।' 

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