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कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ने वाले साइटोकाइन से शरीर को खतरा

Sat, 02 May 2020 05:55 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 02 May 2020 05:55 AM IST
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Cytokines that fight against corona virus infection threaten the body
human body - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ काम करने वाले साइटोकाइन प्रोटीन बाद में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी के लिए खतरा साबित होता है। चीन के आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना मरीजों के इम्यन सिस्टम की कोशिकाएं घटने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और व्यक्ति की हालत गंभीर हो जाती है। जर्नल फ्रंटियर इन इम्युनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, शरीर में टी सेल्स सफेद रक्त कोशिकाओं जैसी होती हैं।

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इसकी कमी से इम्युन सिस्टम प्रभावित होता है। अध्ययन में पाया गया कि साइटोकाइन प्रोटीन संक्रमण के खिलाफ काम करता है। यह प्रोटीन ज्यादा बढ़ने पर रोग स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘साइटोकॉइन स्टॉर्म’ कहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है, कोराना सीधे टी-कोशिका पर हमला नहीं करता है। वो साइटोकाइन के उत्सर्जन पर जोर देता है जिससे टी-सेल्स अपने आप खत्म होने लगती हैं। इससे प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

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इलाज के दौरान टी-सेल्स पर देना होगा ध्यान

वैज्ञानिकों का दावा है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों को टी-सेल कोशिका पर भी ध्यान देना होगा, जैसा अभी तक नहीं हो रहा है और श्वास प्रणाली के इलाज पर जोर दिया जा रहा है। प्रमुख शोधकर्ता योंगवेन चेन का कहना है कि जिन मरीजों पर अधिक ध्यान देना होगा, जिनमें टी कोशिका की कमी है। ये कोशिका शुरुआती स्तर पर वायरल संक्रमण के खिलाफ काम करती है। खास बात ये है कि इस वक्त एंटीबॉडीज भी नहीं बनी होती हैं।

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522 मरीजों पर किया अध्ययन

वैज्ञानिकों ने 522 मरीजों पर ये अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टी-कोशिका के जरिए रोग की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है। इससे नई दवा भी बनाने में मदद मिलेगी जो टी-कोशिका की संख्या बढ़ाने के साथ उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ाएगी।

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