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चक्रवाती तूफान 'बुलबुल' हुआ और खतरनाक, प. बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी

Fri, 08 Nov 2019 05:38 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 08 Nov 2019 05:38 PM IST
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Cyclone Bulbul Indian metrological department warning of heavy rain in West Bengal and Odisha
चक्रवाती बुलबुल - फोटो : ANI

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान 'बुलबुल' का और खतरनाक होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात बुलबुल अगले दो दिनों में और शक्तिशाली हो सकता है। यह चक्रवात पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय इलाकों पर खासा असर डाल सकता है, साथ ही ओडिशा के तटीय इलाके भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। 

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इसे लेकर पीएमओ भी सक्रिय है। कैबिनेट सेक्रेटरी ने प. बंगाल और ओडिशा के प्रमुख सचिवों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात कर हालात का जायजा लिया।  

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भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी कि चक्रवाती तूफान 'बुलबुल' शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया। यह तूफान सागर द्वीपों के लगभग 530 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित था। 10 नवंबर तक इस चक्रवात के सुंदरबन डेल्टा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश को पार करने की संभावना है। 
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मछुआरों को सरकार की तरफ से चेतावनी दी गई है कि वे समुद्र में न जाएं और जो गए हैं वे फौरन वापस आएं। आईएमडी महानिदेशक मृत्युजंय महापात्रा ने कहा है कि तूफान पर नजर रखी जा रही है। इसके असर से पूर्वी मिदनापुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में नौ से 11 नवंबर तक भारी बारिश हो सकती है। ओडिशा सरकार ने भी सभी जिला प्रशासनों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। करीब 15 जिलों से कहा गया है कि वे बाढ़ जैसे हालात का सामना करने के लिए तैयारी करें।

हरकत में आया पीएमओ
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में प्रमुख सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान- नीकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की, जिसमें प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। 


यह है तूफान बनने की वजह
उन्होंने कहा कि ये चक्रवात अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (भूमध्य रेखा के पास एक संकीर्ण पैच जहां उत्तरी और दक्षिणी वायु द्रव्यमान जुटाते हैं) के परिणाम स्वरूप सक्रिय हैं। जब यह क्षेत्र सक्रिय होता है, तो बहुत सारे भंवर बन जाते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में जैसे कि जब पर्याप्त नमी और समुद्र की सतह का तापमान गर्म हो, तो ऐसे चक्रवात बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में इस साल अरब सागर काफी सक्रिय है।

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