फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Cyber Fraud: Software Developer Made Fake Apps for Cybercriminals; Thousands Defrauded, Accused Arrested

साइबर ठगी: फर्जी एप बनाता था सॉफ्टवेयर डेवलपर; 9,673 लोगों से ₹15.75 करोड़ की धोखाधड़ी, आरोपी गिरफ्तार

Mon, 05 Oct 2026 07:56 PM IST
सुनील मेहरोत्रा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: सुनील मेहरोत्रा Updated Mon, 05 Oct 2026 07:56 PM IST
सार

फर्जी एप के जरिए होने वाली साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि इन एप्स का इस्तेमाल लोगों से बैंक और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था। मामले में पुलिस ने फर्जी एप तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार किया है।

विज्ञापन
Cyber Fraud: Software Developer Made Fake Apps for Cybercriminals; Thousands Defrauded, Accused Arrested
साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी एपीके फाइल्स बनाकर साइबर ठगों के अलग-अलग गिरोहों को बेचने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के मुख्य सरगनाथ का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 36 साल के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अब तक 2,805 फर्जी एपीके फाइल्स तैयार कर साइबर अपराधियों के अलग-अलग गिरोहों को बेची थीं। इन फर्जी फाइल्स के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में अब तक करीब 15 करोड़ 75 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।

विज्ञापन

किससे जुड़ा है यह मामला?

इस मामले का बैकग्राउंड 13 अगस्त से जुड़ा हुआ है, जब 72 साल के एक बुजुर्ग के पास अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का सीनियर मैनेजर दिनेश कुमार बताते हुए बुजुर्ग को सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान उसने बुजुर्ग का भरोसा जीत लिया और उनके व्हाट्सऐप पर 'सीनियर सिटीजन कार्ड वेरिफिकेशन' नाम से एक एपीके फाइल भेजी। इसके बाद बुजुर्ग से इस फाइल में अपनी निजी जानकारी और डेबिट कार्ड की जानकारी भरने को कहा गया। जैसे ही उन्होंने जानकारी भरी, उनके बैंक खाते से 5 लाख 62 हजार रुपये निकाल लिए गए।

विज्ञापन


ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने भायखला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि ठगी में इस्तेमाल की गई एपीके फाइल की तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में अहम सुराग मिले। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने मध्य प्रदेश से एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


आरोपी के दफ्तर पर छापे के दौरान पुलिस ने एक पेनड्राइव, एक सीपीयू, तीन हार्ड डिस्क, एक वाई-फाई राउटर और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के सर्वर का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस को शक है कि इन्हीं के जरिए वह फर्जी एपीके फाइल्स तैयार कर उन्हें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक पहुंचाता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed