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CSS: पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़े सीएसएस कर्मियों का 'नॉर्थ ब्लॉक' के बाहर हल्लाबोल, 10 साल में नहीं बने 'एसओ'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 09 Jun 2023 04:09 PM IST
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सार
CSS: सीएसएस फोरम का कहना है कि जब विभाग को स्थायी पदोन्नति न देकर, अस्थायी यानी एडहॉक पदोन्नति ही देनी थी तो उसमें सभी योग्य 'एएसओ' को शामिल किया जाना था। एडहॉक पदोन्नति की गाइड लाइन में लिखा है कि यह पदोन्नति किसी ग्रेड में कुल वैकेंसी के अगेंस्ट होती है...
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CSS personnel protest outside 'North Block' for not getting Promotion
CSS: नॉर्थ ब्लॉक के बाहर प्रदर्शन करते केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' में बड़े पैमाने पर खाली पड़े सेक्शन अफसर यानी 'एसओ' की रिक्तियों को पदोन्नति के जरिए नहीं भरा जा रहा है। पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे अधिकारियों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। तेज गर्मी में सैंकड़ों सीएसएस अधिकारी, नॉर्थ ब्लॉक के बाहर पहुंचे। उन्होंने अपने हक के लिए आवाज उठाई। 2013 बैच के लगभग 1100 एएसओ, 'सेक्शन अफसर' बनने का इंतजार कर रहे हैं। लगभग एक हजार 'एएसओ' तो 'एसओ' बनने की सभी शर्तें पूरी करते हैं। इसके बावजूद इन अधिकारियों को पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें: CSS Promotion: 900 में केवल 288 एएसओ को ही सशर्त पदोन्नति, बिना सहायक डेस्क पैटर्न पर काम करेंगे 'एसओ'

सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रही है। पदोन्नति का यह मुद्दा संसद में भी उठ चुका है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी इस संबंध में कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से आग्रह कर चुके हैं। राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला और सुशील कुमार गुप्ता ने भी 'एएसओ' को पदोन्नति न दिए जाने का मुद्दा उठाया था। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति की राह देखते-देखते अनेक अधिकारी तो रिटायर हो गए हैं। इससे पहले भी सीएसएस फोरम को पदोन्नति के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था। करीब 1500 सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक में हल्लाबोल किया था। वे पदोन्नति की मांग को लेकर नॉर्थ ब्लॉक की गैलरी में बैठ गए थे। बाद में उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होगा।

900 से ज्यादा 'एएसओ', एडहॉक पदोन्नति केवल 288 को

सीएसएस फोरम का कहना है कि जब विभाग को स्थायी पदोन्नति न देकर, अस्थायी यानी एडहॉक पदोन्नति ही देनी थी तो उसमें सभी योग्य 'एएसओ' को शामिल किया जाना था। एडहॉक पदोन्नति की गाइड लाइन में लिखा है कि यह पदोन्नति किसी ग्रेड में कुल वैकेंसी के अगेंस्ट होती है। उसमें कोटा नहीं देखा जाता कि वह पदोन्नति एग्जाम कोटे से है या वरिष्ठता आधार पर मिल रही है। सभी योग्य लोगों को प्रमोशन मिलना चाहिए था। फोरम ने डीओपीटी से भी आग्रह किया था कि लगभग 1000 एएसओ, 'एसओ' बनने के पात्र हैं, उन्हें पदोन्नत किया जाए। उसके बाद सरकार ने केवल 288 को तदर्थ पदोन्नति देने की बात कही। उक्त अधिकारी नौ साल से एक ही पद पर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में एसओ के कुल 1624 पद रिक्त होने की बात कही है। इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद अब केवल 288 लोगों को ही पदोन्नति दी गई।

तदर्थ आधार पर बने एसओ के लिए शर्त भी रखी

डीओपीटी द्वारा जिन एएसओ को तदर्थ आधार पर एसओ बनाया गया, उनके लिए डेस्क पैटर्न पर काम करने की बात कही गई। यानी उन्हें किसी सहायक की मदद नहीं मिलेगी। 'एसओ' को ही सारा काम करना होगा। सामान्य तौर पर 'एसओ' के पास स्पोर्ट स्टाफ रहता है। इसमें दो-तीन 'एएसओ', एलडीसी, यूडीसी व एमटीएस शामिल होते हैं। सीएसएस फोरम के पदाधिकारी बताते हैं कि अगर नीचे सहायक स्टाफ नहीं है, तो सरकार को तेज गति से पदोन्नति करनी चाहिए। वजह, जब निचला स्टाफ पदोन्नत होगा तो उसका पद खाली हो जाएगा। ऐसे में नई भर्ती की संभावना बनेगी। बेरोजगार युवाओं को नौकरी में आने का मौका मिलेगा। जब सभी योग्य एएसओ, एसओ बनेंगे तो एएसओ के पद रिक्त हो जाएंगे। वहां नए पद सृजित हो सकेंगे। एसएससी के जरिए उन पदों को भरा जा सकेगा।

क्या कहती है डीओपीटी की गाइडलाइन

2013 बैच के एएसओ को अभी तक पदोन्नति नहीं मिल सकी है। डीओपीटी मंत्री कह देते हैं कि फीडर ग्रेड में कोर्ट केस होने के कारण 'एसओ' के पद पर नियमित पदोन्नति नहीं दी जा सकती है। डीओपीटी की गाइडलाइन कहती है कि ऐसे मामले में एडहॉक पदोन्नति दी जा सकती है। पहले भी दी गई हैं। पिछले दिनों विभागीय परीक्षा 2018 का एक नोटिफिकेशन निकला था। डीओपीटी ने इस मामले में कोर्ट केस का सहारा लेकर फीडर ग्रेड में एग्जाम करने का शेड्यूल तैयार कर दिया। जब इस मामले में कोर्ट केस का सहारा लेकर परीक्षा का शेड्यूल जारी हो सकता है, तो उसी आधार पर पदोन्नति भी दी जा सकती है। कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गत वर्ष संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था, जुलाई में सीएसएस, सीएसएसएस और सीएससीएस के करीब आठ हजार अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी। 2013 बैच का न्यायाधीन मामला है।   

गत वर्ष तक केंद्रीय मंत्रालयों में खाली पड़े थे इतने पद

रक्षा मंत्रालय में सेक्शन अफसर (अनुभाग अधिकारी) के कुल 232 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 141 पद खाली पड़े थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के 41 पद हैं, जिनमें से 27 पद रिक्त बताए गए। एमओएसटी में 51 पदों में से 40 पद खाली पड़े थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेक्शन अफसर के कुल 296 पद थे, जिनमें से से 112 पद खाली पड़े थे। केमिकल मिनिस्ट्री में सेक्शन अफसर के कुल पद 12 हैं, इनमें से 10 पद खाली बताए गए। फार्मा में सेक्शन अफसर के कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 पद रिक्त थे। शिपिंग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के लिए स्वीकृत 37 पदों में से 26 पद खाली पड़े थें जल संसाधन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 69 पद हैं। इनमें से 20 पद रिक्त थे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 39 पद थे, जिनमें से 24 पद खाली थे। इसी तरह श्रम मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के कुल 79 पद स्वीकृत हैं, गत वर्ष 35 पद खाली पड़े थे।

यह भी पढ़ें: CSS Promotion: केंद्र सरकार में सीएसएस अधिकारियों के 45 फीसदी पद खाली, 2013 बैच के एएसओ की नहीं मिला प्रमोशन

इन विभागों में भी हैं अनुभाग अधिकारी के खाली पद

पिछले साल तक की जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 184 पदों में से 46 पद रिक्त थे। कोल मिनिस्ट्री में अनुभाग अधिकारी के 24 पदों में से 15 पद रिक्त बताए गए। दूर संचार मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए स्वीकृत 39 पदों में से 27 पद खाली पड़े थे। लीगल अफेयर में सेक्शन अफसर के 31 पदों में से 13 पद रिक्त थे। डाक विभाग में 49 पदों में से 9 पद खाली पड़े थे। नीति आयोग में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 पद खाली पड़े थे। डीएफएस में अनुभाग अधिकारी के कुल 29 पदों में से 13 पद रिक्त बताए गए। शिक्षा मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए 127 पद स्वीकृत थे, लेकिन 41 पद खाली पड़े थे। डीजीएचएस, एमओएचएफडब्लू में अनुभाग अधिकारी के 28 स्वीकृत पदों में से 20 पद रिक्त बताए गए थे। ट्राइबल अफेयर में भी अनुभाग अधिकारी के लिए 19 पद मंजूर किए गए थे, गत वर्ष तक आठ पद खाली थे।

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