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'जानवरों जैसा सलूक' करने के आरोप में CRPF कमांडर ने पुलिस आईजी को भेजा लीगल नोटिस

Thu, 02 Jan 2020 07:48 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 02 Jan 2020 07:48 PM IST
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CRPF police commandant sent notice to ranchi police Inspector general
CRPF Jawans - फोटो : Social Media
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 222वीं बटालियन के एक सहायक कमांडेंट (कंपनी कमांडर) ने झारखंड पुलिस के आईजी नवीन कुमार सिंह, आईपीएस को लीगल नोटिस भेजकर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। आईजी नवीन, झारखंड पुलिस मुख्यालय रांची में तैनात हैं। सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी ने अपने लीगल नोटिस में पुलिस अधिकारी पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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इन आरोपों में कहा गया है कि मतदान ड्यूटी पर गए सीआरपीएफ कर्मियों के साथ 'जानवरों जैसा सलूक' किया गया। खाना पकाने के लिए जवानों के पास स्वच्छ पेयजल तक नहीं था।
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इस बारे में शिकायत करने पर आग बुझाने वाले फायर टेंडर का पानी मुहैया कराया गया। उस पानी में केवल खिचड़ी ही बन पाई। नोटिस में लिखा है कि उक्त पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर जवानों के सामने सहायक कमांडेंट की निजी जानकारी भी शेयर कर दी। इसके अलावा मीडिया में भी गलत सूचना दी गई। बता दें कि सात दिसंबर को झारखंड में दूसरे चरण के मतदान के बाद अपनी ड्यूटी खत्म कर रांची लौट रही गोल्फ कंपनी, जिसमें 80 जवान शामिल थे, उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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आरोप है कि जवानों को वाहन होते हुए भी 15-20 की दूरी पैदल तय करने के लिए मजबूर किया गया। सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी की तरफ से भेजे गए लीगल नोटिस में लिखा है कि रांची में प्रशासनिक व्यवस्था अत्याधिक अपमानजनक और दयनीय थी। जब उनकी कंपनी रांची के खेलगांव परिसर पहुंची, तो वहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलीं। न तो पेयजल था और न ही खाना पकाने के लिए अलग से पानी की कोई व्यवस्था थी।

यहां पढ़ें नोटिस

इस बाबत पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी गई। तब जाकर जवानों को फायर टेंडर में एकत्रित पानी दिया गया। इस पानी को आग बुझाने के अलावा खुदाई से पहले सूखी जमीन को नरम बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।

इस पानी में जवानों का खाना नहीं बन पाया, केवल खिचड़ी ही बन पाई। सोलंकी का आरोप है कि उनकी कंपनी के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया गया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने मीडिया में गलत बयानबाजी की। कंपनी को उनके कमांडर की वह जानकारी बताई गई, जो निजत्व के दायरे में रहनी चाहिए। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो झारखंड पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक एमएल मीणा ने अपनी सफाई में कई आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि कुछ परेशानियां थीं, लेकिन उन्हें समय रहते सुलझा लिया गया।

इंस्पेक्टर को सौंपी कंपनी की कमान

सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी के लीगल नोटिस में लिखा है कि जैसे ही यह मामला उच्च अधिकारियों के पास पहुंचा, तो उन्हें तुरंत चुनावी ड्यूटी से हटाकर इंस्पेक्टर को कंपनी की कमान सौंप दी गई। दस दिसंबर को उन्हें कहा गया कि वे यूनिट हेडक्वार्टर बीजापुर (छत्तीसगढ़) में रिपोर्ट करें। इसके बाद जवानों के सामने मेरी निजी जिदंगी से जुड़ी सूचनाएं रख दी गईं। इतना ही नहीं, जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो उसे लेकर मीडिया में गलत तथ्य पेश किए गए।

इस घटना से जवानों का मनोबल कमजोर पड़ा है। इतना ही नहीं, सहायक कमांडेंट का कहना है कि इससे मेरे परिवार को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी है। इन सबके लिए पुलिस अधिकारी को बिना शर्त सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सिविल और आपराधिक मामला शुरू किया जाएगा।

 

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