CRPF: दिल्ली में रहेंगी यौन शोषण मामले की आईओ नीरज बाला, कौन था वो 'सरदार' जेंटलमैन जो हाई कोर्ट से भाग निकला
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विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में व्यापक स्तर पर हुए यौन शोषण मामले की जांच अधिकारी एवं नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन रहीं कमांडेंट नीरजबाला का तबादला दिल्ली से बाहर नहीं होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनका तबादला बल के उत्तरी सेक्टर के आईजी दफ्तर में करने के आदेश जारी किए हैं। खास बात ये रही है कि 21 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुरेश कुमार कैत और सौरभ बनर्जी की अदालत में जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तो वहां पर एक 'सरदार' जेंटलमैन, जिसने सफेद रंग की पगड़ी और काले रंग की जैकेट पहन रखी थी, मौजूद थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या आप भी इस केस में पार्टी हैं, गवाह हैं। अगर नहीं हैं तो आप यहां कैसे पहुंचे। बस फिर क्या था, 'सरदार' जेंटलमैन के होश उड़ गए। इससे पहले कि उनसे कुछ और पूछा जाता, वह अदालत से भाग निकले। बाद में जस्टिस सुरेश कुमार कैत और सौरभ बनर्जी की अदालत ने कहा, उनके बारे में पता लगाओ। यदि उनका अपना कोई केस नहीं था, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। सूत्रों का कहना है, सफेद पगड़ी और काली जैकेट वाले 'सरदार जेंटलमैन' सीआरपीएफ के ही पूर्व अधिकारी बताए जाते हैं।
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सील बंद लिफाफा कह रहा था यौन शोषण की कहानी
नीरजबाला, सीआरपीएफ में 19 महिला जवानों के यौन शोषण मामले की जांच कर रही थीं। उनका तबादला द्वारका स्थित 88 महिला बटालियन से कभी नोएडा तो कभी बेंगलुरु कर दिया जाता। गत वर्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में लगी याचिका में कहा गया, ट्रांसफर तो यौन शोषण केस की जांच को कमजोर करने का बहाना है। आरोपी आईजी के. सिंह को बचाने का प्रयास हो रहा है। जांच अधिकारी का तबादला, पहले द्वारका से ग्रेटर नोएडा किया गया। उसके बाद बेंगलुरु कर दिया गया। नीरजबाजा ने अपने शपथ पत्र में कहा था, ये सब इसलिए किया गया है, ताकि पीड़ित लड़कियों पर दबाव बनाकर उन्हें केस वापस लेने के लिए राजी कर लिया जाए। बल में व्याप्त स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। उस वक्त बल के सूत्रों का यह भी कहना था कि मामले के तार ऊपर तक जुड़े हैं, इसीलिए जांच अधिकारी को परेशान किया जा रहा है। जनवरी 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट में सील बंद लिफाफे में पेश किया गया अतिरिक्त शपथ पत्र, यौन शोषण के तरीके से लेकर आरोपियों की सारी कहानी बयां कर रहा था।
उत्तरी सेक्टर के आईजी दफ्तर में हुआ तबादला
पिछले साल इस मामले में हाई कोर्ट से कमांडेंट नीरजबाला के तबादले पर रोक लगी थी। अब दोबारा से उनके तबादले की बात हुई तो कई तर्क पेश किए गए। अदालत में पिछली सुनवाई पर पेश हुए नीरजबाला के पति ने कहा, 26 साल की सर्विस में वह और उनकी पत्नी पहली बार दिल्ली में तैनात हुए हैं। दो वर्ष के बाद ही जुलाई 2021 में नीरजबाला का तबादला द्वारका से ग्रेटर नोएडा कर दिया गया। जून 2022 में उनका तबादला बेंगलुरु कर दिया। उनकी बेटी दिल्ली में एमबीबीएस फाइनल ईयर में है, जबकि बेटा बीबीए एलएलबी के पहले वर्ष में है। अगर ऐसे में उनका तबादला होता है, तो दोनों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। वह खुद मथुरा में तैनात हैं, जब उनकी पत्नी अगर दिल्ली में रहें तो बच्चों की शिक्षा अच्छे से पूरी हो सकती है। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से दिल्ली सहित पांच पोस्टिंग लोकेशन देने को कहा था। वे सभी लोकेशन दे दी गई, जहां पर पति पत्नी अपने परिवार की देखभाल कर सकते हैं। 21 जुलाई को नीरजबाला अदालत में मौजूद थीं। हाई कोर्ट ने उनका तबादला उत्तरी सेक्टर के आईजी दफ्तर में करने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही उनके पति भी अपने तय कार्यकाल तक मथुरा में ही रहेंगे।
इस केस से क्या ताल्लुक था 'सरदार जेंटलमैन' का
जब हाई कोर्ट ने नीरजबाला के तबादला आदेश को लेकर अपना फैसला सुनाया, तो वहां पर काली जैकेट और सफेद रंग की पगड़ी पहने हुए एक सरदार जेंटलमैन खड़े थे। उनकी आयु लगभग 70 वर्ष थी। जब उनसे पूछा गया कि आप यहां कैसे खड़े हैं। क्या आप इसी मैटर में आए हैं। जब पता लगाया कि वह सरदार तो किसी भी मामले की सुनवाई में नहीं है। उसके नाम से कोई केस लिस्ट नहीं है। इससे पहले कि उसे रोका जाता, वह नेगेटिव जवाब देकर भाग निकले। वहां पर मौजूद सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट विश्वरंजन से कहा, आप अदालत की मदद करें। इस बात की जांच करें कि वह सरदार कौन था और यहां पर क्यों आया था। इस केस की जांच से उसका क्या लेना देना था। अगर ये साबित होता है कि उस सरदार का कोई केस लगा हुआ था और वह नियमानुसार अदालत में आया है, तो यह मामला उसी वक्त खत्म समझा जाए। अगर ऐसा नहीं है तो उसके खिलाफ संबंधित अथॉरिटी द्वारा कानून के मुताबिक, कार्रवाई की जाए। सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि वह सरदार बल में ही एक बड़े अधिकारी रहे हैं। हालांकि यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि वे नीरजबाला के केस में इतनी रूचि क्यों ले रहे थे। बिना बुलाए वे कोर्ट रूम तक चले आए। सूत्र बताते हैं कि नीरजबाला यौन शोषण मामले की जांच अधिकारी थीं और ऐसे में सरदार जेंटलमैन का वहां पहुंचना, कई तरह के सवाल पैदा करता है।
जांच अधिकारी का तबादला रद्द करने की बात
गत वर्ष नीरजबाला की याचिका में 'तत्काल सुनवाई' की गुजारिश की गई थी। साथ ही सीआरपीएफ द्वारा जारी 30 जून का वह ट्रांसफर ऑर्डर, जिसमें उसे द्वारका 88 बटालियन से बेंगलुरु जाने के लिए कहा गया, उसे चैलेंज किया गया था। इसी से जुड़ी याचिका संख्या 6712/2021 है, जो 14 जुलाई 2022 को सुनी गई। याचिका के मुताबिक, पहले का ट्रासंफर ऑर्डर 13 जुलाई 2021 का है। उसमें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल 'एएसजी' ने सरकार की ओर से वादा किया था कि वह ट्रांसफर ऑर्डर वापस ले लेंगे। हालांकि 19 जुलाई 2021 को हाई कोर्ट ने उस ऑर्डर पर स्टे लगा दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस केस को अब निर्णय पर पहुंचाया जाए। इसके बाद भी यौन शोषण केस की जांच को प्रभावित या उसमें देरी करने का प्रयास हुआ। एएसजी के वादे के बाद भी 30 जून 2022 को नीरजबाला का तबादला बेंगलुरु कर दिया गया। केस की दो पार्टी, जिसमें गृह सचिव एवं सीआरपीएफ डीजी शामिल थे, इन्होंने भरोसा दिलाया कि नीरजबाला का दिल्ली-एनसीआर में प्राथमिकता के आधार नोएडा तबादला किया जाएगा। चूंकि वे नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन हैं और एक अहम केस की जांच कर रही हैं, इसलिए नोएडा जाने के बाद भी वे अपना जांच कार्य बिना किसी बाधा के जारी रख सकती हैं।
डीआईजी ताकतवर हैं, तभी तो उसका तबादला नहीं हुआ
उनकी याचिका में लिखा था कि विभाग तो यौन शोषण के आरोपी के सिंह को आईजी बनाने के लिए बेताब था। ये केस नहीं होता है तो वे मार्च में ही आईजी बन जाते। हालांकि सील बंद कवर में उन्हें आईजी पदोन्नत करने के आदेश दिए गए। दूसरी तरफ नीरजबाला को इसलिए बेंगलुरु भेजा गया है कि ताकि पीड़ित लड़कियां अपना केस वापस ले लें। नीरजबाला, उनके लिए शक्ति स्तंभ बन नैतिक बल का काम कर रही थीं। आरोपी डीआईजी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका कहीं तबादला तक नहीं किया गया। 15 जनवरी 2022 को जो अतिरिक्त शपथ पत्र दिया गया है, उसके पैरा बीस में पीड़ित महिला जवानों का ब्यौरा है। अतिरिक्त शपथ पत्र में लिखा है कि सीआरपीएफ में व्यापक स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। बड़े अफसरों को खुश करने के लिए महिला जवानों को कथित तौर पर लुभाया जाता है। ये केवल यौनाचार का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का केस भी है। पैरा 15 में 19 जुलाई के आदेश में हाई कोर्ट ने कहा, 13 जुलाई 2021 के तबादला आदेश का मतलब, इस केस की जांच को प्रभावित करना था। उसमें हस्तक्षेप का मकसद दिख रहा था, इसलिए उस पर स्टे दिया गया था।