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CRPF: भ्रष्टाचार उजागर करने वाले डिप्टी कमांडेंट का उत्पीड़न, गृह सचिव, डीजी को दी शिकायत में सनसनीखेज खुलासा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 03 Oct 2023 07:53 PM IST
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सार
डिप्टी कमांडेंट ने शीर्ष अफसरों को लिखा है कि जब उन्होंने सीओ के भ्रष्टाचार और दूसरे गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उनका उत्पीड़न किया जाने लगा। उन्होंने उक्त अफसरों पर विभिन्न अवैध तरीकों से पैसा बनाने का कथित आरोप लगाया है...
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CRPF: Harassment of Deputy Commandant who exposed corruption, complaint given to Home Secretary, CRPF DG
CRPF - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में एक तरफ आत्महत्या की घटनाएं कम नहीं हो पा रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जवान ही नहीं, बल्कि अफसर भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला जम्मू कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ की 14वीं बटालियन का है। यहां पर 55 वर्षीय एक डिप्टी कमांडेंट ने अपने कमांडेंट और उनके सहयोगियों पर ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। बल की 33 साल से सेवा कर रहे शिकायतकर्ता डिप्टी कमांडेंट ने इस बाबत केंद्रीय गृह सचिव, सीआरपीएफ डीजी, स्पेशल डीजी और आईजी सहित कई अधिकारियों को उक्त मामले से अवगत कराया है। डिप्टी कमांडेंट का आरोप है कि उनका लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उन्हें इस अपमान से मुक्ति दिलाई जाए।

गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई तो उत्पीड़न

डिप्टी कमांडेंट को उनकी 33 वर्ष की सेवा के दौरान ईमानदारी, निष्ठा और परिश्रम के लिए जाना जाता है। वे कई बड़े अफसरों के साथ काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने सीआरपीएफ हेडक्वार्टर में भी काम किया है। अब डिप्टी कमांडेंट को अत्यधिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। अपने शीर्ष अफसरों को भेजी शिकायत में कमांडेंट, 2आईसी, एसी, एमओ/एसी, इंस्पेक्टर और कई अन्य का नाम लिखा है। डिप्टी कमांडेंट ने शीर्ष अफसरों को लिखा है कि जब उन्होंने सीओ के भ्रष्टाचार और दूसरे गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उनका उत्पीड़न किया जाने लगा। उन्होंने उक्त अफसरों पर विभिन्न अवैध तरीकों से पैसा बनाने का कथित आरोप लगाया है।

केरोसिन व घातक तंबाकू को लेकर आरोप

भ्रष्टाचार के मामलों में केरोसिन (अत्यधिक ठंड में जवानों की जीवन रेखा) की सर्दियों के मौसम में 35 लाख या उससे अधिक की अवैध बिक्री, यूनिट की कैंटीन में कई अनाधिकृत वस्तुएं (घातक तंबाकू उत्पादों सहित) जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है, बताई गई हैं। यहां पर भ्रष्टाचार का पैसा अधिकारी के पास जा रहा है। आरोपी अधिकारी के जीसी पिंजौर स्थित आवास पर बल की जवानों द्वारा बेगार कराई जा रही है। जनशक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगा है। एसएम के माध्यम से मसालों में कटौती हो रही है। निर्धारित खरीद प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। एमओ/एसी की सहायता से दवाओं/सीएपी वस्तुओं में कटौती की बात कही गई है। एयर कोरियर सर्विस 'एसीएस' में सीटों के आवंटन में पक्षपात का आरोप लगा है। कई लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। अनुशासनहीन अधिकारियों का जबरदस्त समर्थन किया गया। वजह, ये लोग भी उच्च अधिकारी की मदद कर रहे थे। एक ही वस्तु की कथित तौर पर दोबारा से खरीद दिखा दी गई। उन अफसरों का जवानों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। हार्ड ड्यूटी पर तैनात जवानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आईपीएस अधिकारियों के समक्ष मामला न पहुंचे

आरोपों में यह भी कहा गया कि यूनिट में सुरक्षा उपायों के मामले में भी भ्रष्टाचार झलकता है। केवल उन्हीं कल्याण/सुरक्षा उपायों को छुआ जा रहा है, जिनमें गबन की गुंजाइश है। कैंटीन में जानलेवा तंबाकू बेचना इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। यह भी जवानों के कल्याण के बहाने किया जा रहा था। ऑपरेशनल एरिया की दलील के आधार पर कार्यालय प्रक्रिया/नियम/विनियमों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपने एक बड़े अधिकारी को लिखित शिकायत दी, तो वे ऐसे गंभीर मुद्दों को विशेषकर आईपीएस अधिकारियों के समक्ष उठाने के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद डिप्टी कमांडेंट ने तीन बोर्डों को लिखित रूप में शिकायत दी। कैंटीन से अनाधिकृत वस्तुओं को हटाने तथा अभिलेखों में हेराफेरी करने की जांच का आग्रह किया गया। टीपी सिंह ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय गृह सचिव को भेजी थी, जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बल के डीजी व दूसरे अफसरों को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन वहां से भी भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया।

भ्रष्टाचार उजागर करते ही दे दिया ऐसा पद

बताया जाता है कि डिप्टी कमांडेंट ने अपने जीवन में करीब दौ सौ लोगों को बीड़ी-सिगरेट के नशे से बाहर निकाला है। उन्होंने 2020 तक राजस्थान सेक्टर के आईजी के साथ काम किया है। उन्हें मेडल भी मिला है। जब उन्होंने भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया तो उनका उत्पीड़न शुरू हो गया। उन्हें शोपियां की यूनिट से बाहर भेज दिया गया, जबकि उनका परिवार वहीं पर रहता है। यह यूनिट ऑपरेशनल एरिया में है। उन्हें एक ऐसे पद पर बैठाया गया, जो अभी तक कहीं नहीं है। उन्हें शोपियां से पांच किलोमीटर दूर डीसी 'ऑप्स' बनाकर भेजा गया, जबकि ये पद टूआईसी 'ऑप्स' का है। वह अधिकारी यूनिट में मौजूद है। अब हालत ऐसी है कि वे अपने परिवार से भी नहीं मिल सकते। अगर वे वहां पर जाते हैं तो उनका दूसरी तरह से उत्पीड़त होता है।

सीओ के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने पर भी कार्रवाई नहीं

शिकायत में लिखा है कि कमांडेंट के खिलाफ आरोपों का पता लगाने के लिए एक अन्य कमांडेंट को जिम्मेदारी दी गई। उसी समय एक बड़े अधिकारी मेरी आपत्ति से नाराज हो गए। उन्होंने मुख्य जांच के साथ ही मेरे पर भी एक अन्य जांच बैठा दी। तब तक भी उन्हें  यकीन था कि मुख्य आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके चलते उन्होंने अन्य किसी दफ्तर में अप्रोच नहीं की। इतना कुछ होने पर भी आरोपी के खिलाफ एक्शन नहीं हुआ और मेरे खिलाफ ही कार्रवाई का मसौदा तैयार कर दिया गया। अपनी शिकायत में तत्कालीन डीआईजी केएस देशवाल का भी नाम लिखा है। उस वक्त उनके पास अस्थायी चार्ज था। उनके संज्ञान में मामला लाए जाने के बाद भी कुछ नहीं हो सका। इस मामले में बल के शीर्ष अफसर से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।

किसी आईपीएस अफसर से जांच कराई जाए

इसके विपरित डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ ही मामले की तैयारी की जाने लगी। उन्हें डीसी एडजुटेंट के पद से हटा दिया गया। वह पद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सृजित किया गया था। उन्हें चार पांच किलोमीटर दूर गागरेन में भेज दिया गया। शिकायकर्ता डिप्टी कमांडेंट के परिवार में उनकी पत्नी और बेटी है। वे भी मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रही हैं। डीआईजी को इस मामले में सभी तय माध्यमों के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनके साथ बार-बार व्यक्तिगत रूप से, व्हाट्सएप के माध्यम से, सिग्नल के माध्यम से और मेल के माध्यम से संपर्क किया गया है, लेकिन वह चुप्पी साधे हुए हैं जैसे कि उन्होंने प्रतिज्ञा कर ली हो कि जो भी हो इस मेहनती शिकायत करने वाले अधिकारी के साथ कुछ भी हो सकता है। डिप्टी कमांडेंट ने अपनी शिकायत में लिखा है कि आजकल बल में यह बुरी आदत लग चुकी है कि जो कोई भी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोले, उसे परेशान कर दो। इस मामले की किसी आईपीएस अफसर से जांच कराई जाए।

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