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CRPF: सीआरपीएफ डीजी ने 3.25 लाख कार्मिकों को दी बड़ी राहत, अब फोर्स चीफ से सीधे कर सकेंगे 'मन की बात'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 03 Apr 2025 01:17 PM IST
सार

सीआरपीएफ में लंबे समय से खासतौर पर सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के कार्मिकों को यह शिकायत रही है कि वे डीजी के समक्ष अपने 'मन की बात' नहीं कह पाते। कमांडेंट रैंक तक के कई अफसर भी डीजी से मुलाकात कर अपना विषय रखना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सभी को अवसर नहीं मिल पाता।

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CRPF DG gave big relief to lakhs of personnel now they will be able to do 'Mann Ki Baat' directly with boss
CRPF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के डीजी जीपी सिंह ने 3.25 लाख नफरी वाले बल के कार्मिकों को बड़ी राहत दी है। अब फोर्स के सभी अधिकारी और जवान, महानिदेशक के साथ 'मन की बात' कर सकेंगे। जो कोई भी फोर्स पर्सनल, डीजी से मुलाकात करना चाहता है, उसके लिए बाकायदा एक नियमावली तैयार की गई है। डीजी से मिलने के लिए संबंधित कार्मिक को ईमेल करनी होगी। उसके बाद यह तय होगा कि वह मुलाकात व्यक्तिगत तौर पर ठीक रहेगी या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत होगी। खास बात है कि मुलाकात के लिए जितने भी आवेदन मिलेंगे, उनमें किसी को छंटनी की इजाजत नहीं होगी। डीजी के साथ 'मन की बात' होने के एक सप्ताह बाद उस विषय को लेकर लिखित आदेश जारी होगा, जो डीजी के समक्ष रखा गया है। यानी डीजी जो भी निर्णय देंगे, वह हर सूरत में सात दिन के भीतर लागू हो जाएगा।

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बता दें कि सीआरपीएफ में लंबे समय से खासतौर पर सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के कार्मिकों को यह शिकायत रही है कि वे डीजी के समक्ष अपने 'मन की बात' नहीं कह पाते। कमांडेंट रैंक तक के कई अफसर भी डीजी से मुलाकात कर अपना विषय रखना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सभी को अवसर नहीं मिल पाता। इस मामले में कई दफा 'पिक एंड चूज' नीति अपनाई जाती रही है। यानी जिसे बड़े अफसर चाहेंगे, वही डीजी से मिल सकता है। उसमें भी कई तरह की शर्तें लगा दी जाती कि डीजी के समक्ष कौन सी बात कहनी है और कौन सी नहीं। इतना ही नहीं, सब कुछ ठीक रहने पर भी मुट्ठीभर लोगों को ही सीआरपीएफ महानिदेशक से मिलने का समय मिल पाता था। 
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अब डीजी जीपी सिंह ने पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए मुलाकात के नए नियम तय किए हैं। इन नियमों में, सबसे अहम ईमेल रहेगी। जो कोई भी कार्मिक, डीजी से मिलता चाहता है, उसे डीजी की इस dg@crpf.gov.in मेल पर मुलाकात का आवेदन करना होगा। मुलाकात के जितने भी आवेदन आएंगे, उन्हें छांटा नहीं जाएगा। सभी ईमेल को सीरियल नंबर से लगाया जाएगा। इसके बाद यह तय होगा कि वह मुलाकात व्यक्तिगत तौर से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर होगी।
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कमांडेंट या उससे बड़े रैंक वाले अफसरों को डीजी से मिलना है तो उस दौरान 'आईजी पर्स' और 'एडीजी मुख्यालय' मौजूद रहेंगे। यह मुलाकात डीजी के चेंबर में हो या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर, दोनों ही स्थितियों में उक्त अफसर वहां मौजूद रहेंगे। इसके अलावा कोई अन्य अधिकारी, डीजी से अकेले में मुलाकात करना चाहता है तो वह डीजी की ईमेल पर सूचना देगा। अगर वह निजी मुलाकात करना चाहता है तो यह संबंधित अधिकारी द्वारा रखी जाने वाली बातचीत पर तय होगा। यानी उसके कारणों पर विचार करने के बाद मुलाकात की प्रक्रिया निर्धारित की जाएगा। यहां पर भी 'आईजी पर्स' और 'एडीजी मुख्यालय' मौजूद रहेंगे। बशर्तें उन्हें डीजी की तरफ से मुलाकात के दौरान मौजूद रहने से छूट न दी गई हो। 


डीजी से मिलने वालों की विस्तृत डिटेल डीजी की टेबल पर रहेगी। इसमें संबंधित कार्मिक की लाइफ टाइम पोस्टिंग डिटेल भी शामिल होगी। किसी मामले में कोर्ट में लंबित कोई मामला है तो वह भी डीजी के समक्ष रखा जाएगा। पर्सनल मुलाकात में डीजी जो भी निर्णय देंगे, उस बाबत आदेश जारी करने की समय सीमा एक सप्ताह तय की गई है। वह फाइल सात के भीतर डीजी की टेबल पर होनी चाहिए। डीजी से मिलने के लिए जितने भी आवेदन आएंगे, उनकी छंटाई करने का अधिकारी किसी को नहीं होगा। अगर इस बाबत कोई बात होगी तो वह डीजी से पूछकर ही होगी। मतलब, अब आवेदनकर्ता और डीजी के बीच कोई पर्दा नहीं रहेगा। निचले अधिकारी, अपनी मनमर्जी से किसी के आवेदन को खारिज या ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकेंगे। 

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