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CRPF Day Parade: 86वें सीआरपीएफ डे की परेड अब 17 अप्रैल को नीमच में होगी, क्यों बदली जा रही परेड की तिथि?
सार
सीआरपीएफ का स्थापना दिवस 19 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन यह तिथि अमूमन बदलती रही है। 84वें स्थापना दिवस की परेड छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित हुई थी। लेकिन इस बार सीआरपीएफ अपना स्थापना दिवस नीमच में ही आयोजित होगी।
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केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ'
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के 86वें स्थापना दिवस की डीजी परेड 15 अप्रैल को नीमच 'मध्य प्रदेश' में होगी। इसके दो दिन बाद 'सीआरपीएफ डे परेड' भी नीमच में ही आयोजित होगी। भले ही आधिकारिक तौर पर सीआरपीएफ का स्थापना दिवस 19 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन यह तिथि अमूमन बदलती रही है। 84वें स्थापना दिवस की परेड छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित हुई थी। यह आयोजन 19 मार्च को नहीं, बल्कि 25 मार्च को हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 84वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर परेड की सलामी ली थी। 85वें स्थापना दिवस की डीजी परेड यूपी के प्रयागराज में 17 मार्च 2024 को आयोजित की गई। इस बार भी पहले 19 मार्च, 11 अप्रैल व 13 अप्रैल को सीआरपीएफ डे परेड आयोजित करने की बात हुई, लेकिन फाइनल तौर से यह आयोजन अब अप्रैल माह में पहुंच गया। 10 फरवरी से देश के विभिन्न हिस्सों से नीमच पहुंचे जवान और अधिकारी, 'सीआरपीएफ डे' परेड के आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए अभ्यास कर रहे हैं।
तीन साल पहले बदल गया चलन
बता दें कि 2022 में यह तय हुआ था कि देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' अब सेना की तर्ज पर हर वर्ष 19 मार्च को 'सीआरपीएफ डे' समारोह आयोजित करेगा। तब तक किसी भी केंद्रीय अर्धसैनिक बल में 'डे' नहीं मनाया जाता था। सीएपीएफ में 'स्थापना दिवस' मनाने की परंपरा रही है। सीआरपीएफ मुख्यालय ने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि सरदार पटेल ने 1950 में 19 मार्च के दिन ही सीआरपीएफ को झंडा यानी 'प्रेजीडेंट कलर्स' प्रदान किया था। सीआरपीएफ, देश का इकलौता ऐसा अर्धसैनिक बल है, जिसकी स्थापना आजादी से पहले हो गई थी। इस बल के जांबाजों ने युद्ध के मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान की सेना को कड़ी टक्कर दी थी। जिस तरह से 'आर्मी डे' पर भव्य परेड होती है, उसी तरह हर साल 19 मार्च को 'सीआरपीएफ डे परेड' आयोजित करने का निर्णय लिया गया। पहले के चलन में सभी परिस्थितियां ठीक रहती तो 27 जुलाई को स्थापना दिवस मनाया जाता था। मौसम ठीक होने या मुख्य अतिथि की उपलब्धता के आधार पर इस तिथि को आगे-पीछे सरका दिया जाता था।
27 जुलाई को अस्तित्व में आया था ये बल
सीआरपीएफ, 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में अस्तित्व में आया था। उसके बाद 28 दिसंबर 1949 को सीआरपीएफ अधिनियम के लागू होने पर इसे 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' का दर्जा प्रदान किया गया। आजादी के बाद 28 दिसंबर, 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल का नाम 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' रखा गया था। तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने नव स्वतंत्र राष्ट्र की बदलती जरूरतों के अनुसार इस बल के लिए एक बहु आयामी भूमिका की कल्पना की थी। इस तरह से सीआरपीएफ में 19 मार्च, 27 जुलाई व 28 दिसंबर में से किसी एक दिन स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाता था। तीन वर्ष पहले शीर्ष नेतृत्व और फील्ड फॉर्मेशन के आला अफसरों से बातचीत कर एवं बल की सभी यूनिटों से सुझाव लेकर 19 मार्च की तारीख तय कर दी गई। इसे 'सीआरपीएफ डे' का नाम दिया गया।
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लद्दाख से लेकर पाकिस्तान बॉर्डर तक
भारत संघ में रियासतों के एकीकरण के दौरान इस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत के हॉट स्प्रिंग (लदाख) पर पहली बार 21 अक्तूबर 1959 को चीनी हमले को केरिपुबल ने नाकाम किया। बल के दस जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की याद में देश भर में हर साल 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान एक बार फिर बल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को सहायता प्रदान की। इस आक्रमण के दौरान केरिपुबल के आठ जवान शहीद हुए थे। वर्ष 1965 में सीआरपीएफ ने कच्छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के नापाक मनसूबों को धराशाही कर दिया था। सीआरपीएफ की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की 51वीं इंफेंट्री ब्रिगेड के 3500 जवानों का मुकाबला कर उन्हें पीछे धकेल दिया। पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए। सीआरपीएफ के छह जवानों ने अपनी शहादत दी थी। बल के अदम्य शौर्य और रण कौशल के चलते हर साल नौ अप्रैल को देश में शौर्य दिवस मनाया जाता है।
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तीन साल पहले बदल गया चलन
बता दें कि 2022 में यह तय हुआ था कि देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' अब सेना की तर्ज पर हर वर्ष 19 मार्च को 'सीआरपीएफ डे' समारोह आयोजित करेगा। तब तक किसी भी केंद्रीय अर्धसैनिक बल में 'डे' नहीं मनाया जाता था। सीएपीएफ में 'स्थापना दिवस' मनाने की परंपरा रही है। सीआरपीएफ मुख्यालय ने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि सरदार पटेल ने 1950 में 19 मार्च के दिन ही सीआरपीएफ को झंडा यानी 'प्रेजीडेंट कलर्स' प्रदान किया था। सीआरपीएफ, देश का इकलौता ऐसा अर्धसैनिक बल है, जिसकी स्थापना आजादी से पहले हो गई थी। इस बल के जांबाजों ने युद्ध के मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान की सेना को कड़ी टक्कर दी थी। जिस तरह से 'आर्मी डे' पर भव्य परेड होती है, उसी तरह हर साल 19 मार्च को 'सीआरपीएफ डे परेड' आयोजित करने का निर्णय लिया गया। पहले के चलन में सभी परिस्थितियां ठीक रहती तो 27 जुलाई को स्थापना दिवस मनाया जाता था। मौसम ठीक होने या मुख्य अतिथि की उपलब्धता के आधार पर इस तिथि को आगे-पीछे सरका दिया जाता था।
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27 जुलाई को अस्तित्व में आया था ये बल
सीआरपीएफ, 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में अस्तित्व में आया था। उसके बाद 28 दिसंबर 1949 को सीआरपीएफ अधिनियम के लागू होने पर इसे 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' का दर्जा प्रदान किया गया। आजादी के बाद 28 दिसंबर, 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल का नाम 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल' रखा गया था। तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने नव स्वतंत्र राष्ट्र की बदलती जरूरतों के अनुसार इस बल के लिए एक बहु आयामी भूमिका की कल्पना की थी। इस तरह से सीआरपीएफ में 19 मार्च, 27 जुलाई व 28 दिसंबर में से किसी एक दिन स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाता था। तीन वर्ष पहले शीर्ष नेतृत्व और फील्ड फॉर्मेशन के आला अफसरों से बातचीत कर एवं बल की सभी यूनिटों से सुझाव लेकर 19 मार्च की तारीख तय कर दी गई। इसे 'सीआरपीएफ डे' का नाम दिया गया।
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लद्दाख से लेकर पाकिस्तान बॉर्डर तक
भारत संघ में रियासतों के एकीकरण के दौरान इस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत के हॉट स्प्रिंग (लदाख) पर पहली बार 21 अक्तूबर 1959 को चीनी हमले को केरिपुबल ने नाकाम किया। बल के दस जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की याद में देश भर में हर साल 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1962 के चीनी आक्रमण के दौरान एक बार फिर बल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना को सहायता प्रदान की। इस आक्रमण के दौरान केरिपुबल के आठ जवान शहीद हुए थे। वर्ष 1965 में सीआरपीएफ ने कच्छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के नापाक मनसूबों को धराशाही कर दिया था। सीआरपीएफ की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की 51वीं इंफेंट्री ब्रिगेड के 3500 जवानों का मुकाबला कर उन्हें पीछे धकेल दिया। पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए। सीआरपीएफ के छह जवानों ने अपनी शहादत दी थी। बल के अदम्य शौर्य और रण कौशल के चलते हर साल नौ अप्रैल को देश में शौर्य दिवस मनाया जाता है।