लापरवाही पड़ेगी भारी: त्योहारों में बाजारों-मंदिरों में बढ़ी भीड़, मास्क पहनना भूले लोग, बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
लोकल सर्किल के सर्वे में शामिल 65,000 लोगों में से 13 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके इलाके में मास्क पहनने का पालन हो रहा है, जबकि केवल छह फीसदी लोग बोले कि उनके यहां सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जा रहा है। 30 फीसदी लोगों ने माना कि यात्राओं के दौरान अभी भी मास्क पहनने के नियमों का पालन किया जा रहा है...
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नवरात्र के बाद दशहरा-दिवाली आने वाली है। इससे बाजारों से लेकर मंदिरों में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। बाजार हों या माल, लोग आवश्यक सामानों और अपने प्रियजनों के लिए उपहारों की खरीद के लिए बाहर निकल रहे हैं। लेकिन इस दौरान लोग मास्क पहनना कम कर चुके हैं और शारीरिक नियमों का पलना करना लगातार कम करते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मास्क के प्रति लोगों की ये लापरवाही भारी पड़ सकती है।
लोकल सर्किल के सर्वे में शामिल 65,000 लोगों में से 13 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके इलाके में मास्क पहनने का पालन हो रहा है, जबकि केवल छह फीसदी लोग बोले कि उनके यहां सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जा रहा है। 30 फीसदी लोगों ने माना कि यात्राओं के दौरान अभी भी मास्क पहनने के नियमों का पालन किया जा रहा है।
सर्वे में सबसे ज्यादा चिंता वैक्सीनेशन केंद्रों को लेकर व्यक्त की गई है। इन केंद्रों पर भी केवल 61 फीसदी लोगों ने ही यह माना कि उनके केंद्रों पर मास्क नियमों का अनुपालन किया जा रहा था, जबकि 39 फीसदी लोगों ने माना कि उनके केंद्रों पर मास्क-सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। चूंकि वैक्सीनेशन केंद्र पर भारी संख्या में लोग आ-जा रहे हैं, ये केंद्र कोरोना के बड़े सुपर स्प्रेडर बनकर उभर सकते हैं।
कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के साथ ही लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है। सर्वे में शामिल 69 फीसदी लोगों ने माना है कि पिछले एक महीने के दौरान वे कहीं न कहीं ऐसी जगह अवश्य गये हैं जहां एक बंद भवन में कामकाज करना पड़ा है। इन जगहों में मॉल, अस्पताल, शॉपिंग काम्प्लेक्स या धार्मिक भवन रहे हैं। खुले आकाश की अपेक्षा एक भवन संक्रमण की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील जगह होती है। 73 फीसदी लोगों ने माना कि वे किसी खुली जगह पर गये हैं। ऐसी जगहों में आसपास के बाज़ार सबसे ज्यादा प्रमुख स्थान थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो लोग आपस में बातचीत कर रहे होते हैं और इस दौरान उन्होंने मास्क नहीं पहना होता है तो इससे संक्रमण फैलने की संभावना 90 फीसदी तक होती है, जिसे संक्रमण नहीं है, यदि उस व्यक्ति ने मास्क पहना हुआ है लेकिन जिसे संक्रमण हुआ है उसने मास्क नहीं पहना है तो असंक्रमित व्यक्ति के संक्रमिक होने की संभावना केवल 30 फीसदी रह जाती है। और यदि संक्रमित व्यक्ति और असंक्रमित व्यक्ति दोनों ने मास्क पहन रखा हो तो इस दौरान संक्रमण फैलने की संभावना न के बराबर ही रह जाती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में कोरोना मामलों के नोडल अफसर डॉ. संदीप नैयर ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना संक्रमण में भारी कमी आई है, यह सुखद संकेत है। लेकिन त्योहारों के सीजन में बाजारों-धार्मिक स्थलों पर लोगों की भीड़भाड़ बढ़ने और इस दौरान मास्क न पहनने और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन न करने से संक्रमण बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। यह कोरोना की एक नई लहर को दावत दे सकता है, इसलिए संक्रमण के प्रति लापरवाही बिलकुल सही नहीं है।