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मुंबई के लालबाग में गणपति दर्शन की भीड़ से हादसा: पंडाल के बाहर करंट से बच्ची समेत दो की मौत, चार घायल
Sun, 20 Sep 2026 08:22 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 20 Sep 2026 08:22 PM IST
सार
मुंबई के लालबाग स्थित कालाचौकी में गणेश पंडाल के पास रविवार तड़के अस्थायी पानी और कोल्ड ड्रिंक स्टॉल में करंट फैलने से आठ साल की बच्ची और एक महिला की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हुए। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मुंबई के लालबाग इलाके के कालाचौकी में गणेश पंडाल के पास रविवार तड़के करंट लगने से आठ साल की बच्ची और एक महिला की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। हादसा रात करीब 2.20 बजे दत्ताराम लाड मार्ग पर कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के ‘महागणपति’ पंडाल के प्रवेश द्वार के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे से पहले इलाके में भारी भीड़ और धक्का-मुक्की हो रही थी। बताया गया कि पंडाल के गेट के पास फुटपाथ पर बनाए गए अस्थायी पानी और कोल्ड ड्रिंक स्टॉल में शॉर्ट सर्किट के बाद करंट फैल गया। अधिकारियों के मुताबिक, स्टॉल में बिजली का करंट मौजूद था।
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अस्थायी स्टॉल में था बिजली का करंट
बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, हादसा पंडाल के प्रवेश द्वार से सटे फुटपाथ पर बने एक अस्थायी स्टॉल में हुआ। यह स्टॉल कालाचौकी इलाके की संकरी गलियों में था। स्टॉल पर तीन रेफ्रिजरेटर रखे थे और बड़ी मात्रा में मिनरल वाटर की बोतलें भी मौजूद थीं। यहां एक लोकप्रिय कोल्ड ड्रिंक कंपनी की ब्रांडिंग भी लगी थी। बताया गया कि शॉर्ट सर्किट के बाद स्टॉल के आसपास बिजली का करंट फैल गया। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हादसे में आठ साल की बच्ची और एक महिला की जान चली गई, जबकि चार अन्य लोग करंट की चपेट में आकर घायल हुए। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
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भीड़ और धक्का-मुक्की को लेकर स्थानीय लोगों के सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के वक्त इलाके में भारी भीड़ थी और भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। मंडल के पुराने पदाधिकारी अमरदीप गोसावी ने मीडिया से कहा कि शनिवार रात दत्ताराम लाड मार्ग पर करीब 50 हजार या उससे भी ज्यादा लोगों की भीड़ थी। स्थानीय लोगों ने पुलिस पर भीड़ प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सड़क पर पुलिसकर्मियों की पर्याप्त तैनाती नहीं थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी इंतजाम भी नजर नहीं आए। लोगों के मुताबिक, गणपति उत्सव के दौरान शनिवार की रात आमतौर पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।
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बैरिकेड टूटे, सड़क पर दोनों तरफ से फंसी भीड़
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस आमतौर पर शनिवार आधी रात के आसपास डॉ. आंबेडकर रोड और दत्ताराम लाड मार्ग के जंक्शन पर बैरिकेड लगाती है। इसका मकसद कालाचौकी की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करना और कुछ लोगों को बायकुला की ओर मोड़ना होता है। लेकिन हादसे के समय ‘मुख दर्शन’ की लाइन में जबरदस्त भीड़ थी। लोगों के दबाव से बैरिकेड मुड़ गए और कुछ टूट भी गए। इसके बाद दोनों दिशाओं से आ रही भीड़ ने पूरी सड़क को जाम कर दिया। खास तौर पर महागणपति पंडाल के गेट के बाहर हालात बेहद खराब हो गए और लोगों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया।
धक्का-मुक्की के दौरान स्टॉल का लोहे का ढांचा टूटा
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ में धक्का-मुक्की के दौरान कुछ लोग अस्थायी स्टॉल की तरफ धकेल दिए गए। इसी दौरान स्टॉल के लोहे के बीम टूट गए और संभव है कि वे बिजली के करंट के संपर्क में आ गए हों। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, पूरा हादसा कुछ ही सेकंड में हो गया और लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पंडाल की व्यवस्था संभाल रहे मंडल के कुछ कार्यकर्ता भी लोगों की मदद करने पहुंचे तो उन्हें भी बिजली का झटका लगा। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घायल व्यक्ति को करंट से अलग करने के लिए कार्यकर्ताओं ने बैनर में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की छड़ियों का सहारा लिया। इसके बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
घायलों को भीड़ के बीच से निकालकर अस्पताल ले गए
मंडल के कार्यकर्ता रोहन राणे उस समय पंडाल के अंदर थे। उन्हें जब हादसे की जानकारी मिली तो वे तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। राणे के मुताबिक, घायलों को पहले पास के आस्था नर्सिंग होम ले जाया गया। वहां से उन्हें बाद में मसिना और ग्लोबल अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोगों को गोद में उठाकर और व्हीलचेयर की मदद से अस्पताल तक ले जाया गया। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि रास्ता बनाना भी मुश्किल हो रहा था। बाद में कुछ घायलों को दोपहिया वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
लालबाग में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
गणपति उत्सव के दौरान मुंबई के लालबाग इलाके में शहर ही नहीं, बल्कि उपनगरों और देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। छुट्टी या वीकेंड से पहले की रात यहां भीड़ और बढ़ जाती है। लालबागचा राजा के ‘मुख दर्शन’ और ‘चरण स्पर्श’ के लिए बड़ी संख्या में लोग कतार में लगते हैं। ‘मुख दर्शन’ में श्रद्धालु दूर से गणपति के दर्शन करते हैं, जबकि ‘चरण स्पर्श’ में मूर्ति के चरण छूने की अनुमति होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख दर्शन की कतार गरम खाड़ा मैदान से निकलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मार्ग, दत्ताराम लाड मार्ग और टीबी करम मार्ग से होते हुए बायकुला तक जाती है।
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महागणपति पंडाल के गेट से करीब 100-150 मीटर दूर दत्ताराम लाड मार्ग पर यह कतार उत्तर और दक्षिण फुटपाथ तक फैली रहती है। एक ओर लालबागचा राजा के मुख दर्शन के लिए जाने वाले लोग और दूसरी ओर कालाचौकी की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ ने हालात बिगाड़ दिए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार आधी रात से रविवार तड़के के बीच लालबाग इलाके में लाखों लोग मौजूद हो सकते थे।