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त्रिपुरा: प्रदेश भाजपा में गहराया संकट, मंत्रिमंडल में फेरबदल की उम्मीद
Fri, 18 Jun 2021 04:48 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 18 Jun 2021 04:48 AM IST
सार
- त्रिपुरा प्रदेश भाजपा का बागी खेमा जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार और परिवर्तन की कर रहे उम्मीद
- भाजपा राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात कर अपनी शिकायतें दर्ज कराई
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नितिन गडकरी के साथ सीएम बिप्लव कुमार देव
- फोटो : ANI
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विस्तार
त्रिपुरा में प्रदेश भाजपा का संकट गहरा गया है, मुख्यमंत्री बिप्लव देव की कुर्सी खतरे में दिख रही है। भाजपा के नाराज और उपेक्षित नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर सुधार के साथ परिवर्तन की मांग की है।
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मसले के हल के लिए भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेता राज्य में दो दिनों से विचार-विमर्श कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा का बागी खेमा जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार और परिवर्तन की उम्मीद लगाए हैं। इसके मद्देनजर वे भाजपा राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष से मुलाकात कर अपनी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं।
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खतरे में त्रिपुरा मुख्यमंत्री बिप्लब देव की कुर्सी, नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठी
पार्टी उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष की अध्यक्षता में केंद्रीय नेतृत्व पिछले कुछ महीनों में राज्य इकाई में चल रहे विद्रोह को दूर करने में लगे हैं। सूत्रों को दावा है कि कि कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक स्तर पर गार्ड ऑफ गार्ड में भी बदलाव किया जा रहा है। लिहाजा संगठनात्मक स्तर पर प्रयोग किए जाने की संभावना है, जिनमें मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कुछ तरकश के तीरों को समायोजितों करने की योजना है। भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘हमने सभी संतोष जी से मुलाकात की।
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हमें एक प्रदेश अध्यक्ष चुनने को कहा गया है, जो संगठन को मजबूत रख सके। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष माणिक साहा एक अच्छे इंसान हैं लेकिन हमें एक मजबूत नेता की जरूरत है।’ वामपंथियों से गद्दी छीनने के बाद लंबे समय बाद किसी केंद्रीय भाजपा नेतृत्व की प्रदेश के छोटे समूहों से बातचीत हो रही है। बहरहाल, विधायकों और सांसदों ने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव संतोष ने सिर्फ संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है।
इससे पहले विधायकों का एक समूह त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने दिल्ली आया था। हालांकि, केंद्र ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और राज्य प्रभारी विनोद सोनकर से इस मुद्दे को हल करने के लिए कहा गया। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनावों में माणिक सरकार की कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद भाजपा ने राज्य में सत्ता में वापसी की थी। 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा के 36 विधायक हैं और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के 8 विधायक हैं।