फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Criminal Laws Bills Draft of three bills can be approved today opposition members had asked for time

Criminal Laws Bills: तीन विधेयकों का मसौदा आज हो सकता है मंजूर, विपक्षी सदस्यों ने मांगा था समय

Mon, 06 Nov 2023 06:54 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Mon, 06 Nov 2023 06:54 AM IST
सार

गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति की 27 अक्तूबर की बैठक में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले तीनों विधेयकों के मसौदे पर मुहर नहीं लग सकी थी।

विज्ञापन
Criminal Laws Bills Draft of three bills can be approved today opposition members had asked for time
Criminal laws - फोटो : Criminal laws

विस्तार

मौजूदा आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले तीन विधेयकों पर मंथन कर रही संसदीय समिति अपनी सोमवार को होने वाली बैठक में इनके मसौदे को स्वीकार कर सकती है। पूर्व में कुछ विपक्षी सदस्यों ने इन विधेयकों पर विस्तार से चर्चा के लिए और समय मांगा था।

विज्ञापन


नहीं लग सकी थी मसौदे पर मुहर
गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति की 27 अक्तूबर की बैठक में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले तीनों विधेयकों के मसौदे पर मुहर नहीं लग सकी थी। विपक्षी सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष बृज लाल से कहा था कि वह अपने कार्यकाल में तीन महीने का विस्तार मांगे और अल्पकालिक चुनावी लाभ के लिए इन विधेयकों के साथ खिलवाड़ बंद करें। 
विज्ञापन


इस बीच, भाजपा सूत्रों ने कहा कि समिति व्यापक परामर्श प्रक्रिया में लगी है और तीन महीने की निर्धारित समयसीमा में इसे पूरा कर लेगी। सूत्रों ने कहा कि विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद समिति मसौदा रिपोर्ट को अपना सकती है। गृह मंत्री अमित शाह ने  भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से जुड़े विधेयक लोकसभा में पेश किए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले तीन विधेयक बीते मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए थे। इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता, द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम पेश किया गया है। 


देश में अभियोजन प्रक्रिया की नींव हैं ये कानून
लोकसभा में पेश करने के बाद ये तीनों विधेयक संसद की समिति के पास जांच के लिए भेज दिए गए थे। संसद के अगले सत्र में इन विधेयकों पर सदन में चर्चा हो सकती है। जिन कानूनों को बदला जाएगा, वह भारत में अपराधों की अभियोजन प्रक्रिया की नींव हैं। इनमें से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से तय होता है कि कौन सा कृत्य अपराध है और उसके लिए क्या सजा होनी चाहिए। वहीं गिरफ्तारी जांच और मुकदमा चलाने की प्रक्रिया दंड प्रक्रिया संहिता में लिखी हुई है। साथ ही केस के तथ्यों को कैसे साबित किया जाएगा, यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम बताता है। सरकार का कहना है कि ये तीनों कानून देश में उपनिवेशवाद की विरासत हैं और इन्हें आज के हालात के अनुसार किया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed