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SC: 'अपराध से समाज में पैदा होता है भय, इसे बने रहने देना अन्याय', सुप्रीम कोर्ट से पांच दोषियों की अपील खारिज

Mon, 06 Jan 2025 11:22 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 06 Jan 2025 11:22 PM IST
सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने पांच दोषियों की अपील खारिज करते हुए बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध से समाज में पैदा होता है भय इसे बने रहने देना अन्याय है। कोर्ट ने आगे कहा कि- आपराधिक प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करना है।

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Crime creates fear in society, letting it continue is injustice, SC dismisses appeal of five convicts
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध से समाज में भय पैदा होता है और अगर ऐसी स्थिति को समाज में बने रहने दिया जाए तो यह अन्याय है। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ 2002 के एक हत्या मामले में पांच दोषियों की अपील खारिज कर दी।
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जस्टिस सुधांशु धूलिया और पीबी वराले की पीठ ने की सुनवाई
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा, प्रत्येक सभ्य समाज में आपराधिक प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य समाज में विश्वास और एकजुटता पैदा करने के अलावा व्यक्तिगत गरिमा की रक्षा करना और सामाजिक स्थिरता व व्यवस्था बहाल करना होता है। अदालतों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए एक तरफ अभियुक्तों के हितों और दूसरी तरफ राज्य/समाज के हितों के बीच संतुलन बनाने का काम सौंपा गया है। 
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जांच रिपोर्ट ठीक से नहीं बनाई गई- दोषियों के वकील ने दिया तर्क
इस मामले में दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि जांच रिपोर्ट ठीक से नहीं बनाई गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने राजनीतिक दुश्मनी के कारण आरोपियों को फंसाने के लिए रटे-रटाए बयान दिए। इस पर पीठ ने कहा कि हालांकि गवाहों के बयानों में असंगति थी, लेकिन इससे उनकी गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती। पीठ ने कहा, सिर्फ इसलिए कि सुजीश का शव दूसरे पीड़ित सुनील के शव से थोड़ी दूरी पर पाया गया, यह अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को खारिज करने का एकमात्र और निर्णायक कारक नहीं हो सकता।
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क्या है पूरा मामला?
1 मार्च 2002 को संघ/विहिप ने बंद का आह्वान किया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सीपीआई (एम) और आरएसएस के सदस्यों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान आरएसएस/विहिप से जुड़े 11 लोगों के एक समूह ने सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली भीड़ के डर से खुद को छिपा लिया, लेकिन उनमें से दो पर हमला किया गया और उन्हें मार दिया गया।

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