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जम्मू-कश्मीर में नया राजनीतिक माहौल बनाने की कवायद, कश्मीरियों को अब पाकिस्तान पर भरोसा नहीं

Sun, 22 Sep 2019 03:44 AM IST
देव कश्यप गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 22 Sep 2019 03:44 AM IST
सार

  • राज्य का दर्जा हासिल करने और कश्मीरियत बचाने के मुद्दे के साथ शुरू हो सकता है नया राजनीतिक नैरेटिव
  • 370 हटने और दो केंद्र शासित प्रदेश बनने से स्वायत्ता और आजादी जैसे मुद्दे गौण
  • एनसी, पीडीपी जैसी पुराने दलों की प्रासंगिकता फिलहाल अधर में, अलगाववादियों की दुकान बंदी के कगार पर
  • ज्यादातर कश्मीरियों को राजनीतिक समाधान के लिए अब पाकिस्तान पर भरोसा नहीं

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Creating new political environment in Jammu and Kashmir, now Kashmiri people not trust on Pakistan
हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

जम्मू- कश्मीर मामले से पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अगल थलग करने की कूटनीतिक सफलता के बाद अब वहां नया राजनीतिक महौल बनाने की कवायद चल रही है। सरकार के कूटनीतिकार इस कोशिश में हैं कि नई राजनीतिक पौध कश्मीर की स्वायत्ता और आजादी जैसे मुद्दे को पीछे छोड़ जम्मू-कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा दिलाने व कश्मीरी पहचान को बरकरार रखने जैसा नया नैरेटिव शुरू करे।

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सरकार का मानना है कि विकास और अन्य प्रशासनिक व सामाजिक काम के साथ नया राजनीतिक महौल बनने से हालात तेजी से समान्य होगा। सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) और पिपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसे जम्मू-कश्मीर के पुराने राजनीतिक दल के पास कोई नया मुद्दा नहीं है। राज्य में धारा 370 को खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के संवैधानिक फैसले ने स्वायत्ता और आजादी जैसे मुद्दे को फिलहाल खत्म ही कर दिया है।
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सरकार की कोशिश है कि वहां पंचायत और सिविल सोसायटी से नया राजनीतिक नेतृत्व नए राजनीतिक नैरेटिव के साथ सामने आए। कूटनीतिकारों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्ज वापस दिलाने और कश्मीरियत बरकरार रखने जैसे मुद्दे लेकर राजनीतिक दल जनता के बीच जा सकते हैं।
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कूटनीतिकारों के पास मौजूद खुफिया विश्लेषण के मुताबिक कश्मीर के मूल निवासी अब पाकिस्तान से किसी मदद की उम्मीद नहीं कर रहे। वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की राजनीतिक और आर्थिक हालात के मद्देनजर ज्यादातर कश्मीरी अपनी लड़ाई खुद लडने के पक्ष में हैं। इन हालात में पाकिस्तान से शह पर काम करने वाले कश्मीरी अलगावादियों की दुकान भी बंद होती दिख रही है।


सूत्रों के मुताबिक अब पाकिस्तान के पास घाटी में आतंकवाद के अलावा कोई राजनीतिक हथियार नहीं बचा है। घाटी में मौजूद करीब 250 पाक आतंकी जल्द ही सैन्य बल की कार्रवाई का शिकार होंगे। पाक घुसपैठ के लिए लगातार सीजफायर उल्लंघन कर फायरिंग कर रहा है। इधर सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए पहले से ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है।

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