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Genetic Diseases: समाज को दुर्लभ बीमारियों के बारे में करें जागरूक, मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अपील

Sat, 21 Sep 2024 09:58 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 21 Sep 2024 09:58 PM IST
सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने दुर्लभ बीमारियों के बारे में जागरूकता पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनुवांशिक बीमारियों के बारें में हम अनजान नहीं रह सकते हैं।

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Create awareness about rare diseases in society: CJI Chandrachud
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को समाज में दुर्लभ बीमारियों के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सांस्कृतिक, धार्मिक या पारंपरिक बाधाओं की परवाह किए बिना ऐसे माता-पिता और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति और समर्थन दिखाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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'सामान्य लोगों तक पहुंचे उन्नत चिकित्सा पद्धति'
मार्च 2021 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से शुरू की गई दुर्लभ बीमारियों की राष्ट्रीय नीति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों की परिभाषा को परिभाषित करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है और भारत जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र में जीन थेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धति तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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'दुर्लभ बीमारियों के बढ़ते बोझ कम करना होगा'
नारायण नेत्रालय फाउंडेशन की तरफ से जीन थेरेपी और प्रिसिजन मेडिसिन पर आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा- भारत जैसे देश में, जहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी है, जिसमें 4,600 से अधिक अलग-अलग जनसंख्या समूह हैं, जिनमें से कई अंतर्जातीय विवाह करते हैं, हम दुर्लभ बीमारियों के बढ़ते बोझ का सामना करते हैं। दुर्भाग्य से, ये अभिनव उपचार भारत और अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों में काफी हद तक संभव नहीं हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसे बदलना होगा।
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'सभी रोगियों के लिए ऐसे उपचार की पहुंच जरूरी'
अप्रैल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से लॉन्च किए गए कैंसर के लिए देश की पहली घरेलू जीन थेरेपी का उल्लेख करते हुए, CJI ने कहा, CAR T सेल थेरेपी अक्सर अपनी निषेधात्मक लागतों के कारण वैश्विक स्तर पर दुर्गम रही है। लेकिन आज पेश की गई थेरेपी न केवल क्रांतिकारी है, बल्कि मेक इन इंडिया पहल की भावना को मूर्त रूप देते हुए दुनिया का सबसे किफायती CAR T सेल उपचार भी है। उन्होंने कहा जबकि यह नवाचार चिंगारी है, हम सभी रोगियों, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों के लोगों के लिए ऐसे उपचारों तक पहुंच सुनिश्चित करने की एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि किस तरह हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों को स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ता है।


हाल ही में, दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के माता-पिता की तरफ से दायर याचिकाओं के एक समूह में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं, औषधियों और उपचारों पर सीमा शुल्क और शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए, साथ ही सीमा शुल्क अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इन वस्तुओं को अनावश्यक देरी के बिना शीघ्रता से मंजूरी दी जाए।

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