फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CPI supporting to Akhilesh Yadav in to defeating BJP in 2022 state assembly polls

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: 2022 में भाजपा को हराने की कवायद में जुटे वामपंथी, अखिलेश यादव को समर्थन देने की तैयारी

Thu, 24 Jun 2021 04:08 PM IST
Harendra Chaudhary अतुल सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अतुल सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Jun 2021 04:08 PM IST
सार

सीपीआई नेता अतुल कुमार अंजान कहते हैं कि अतीत में देखें तो 1989 में कांग्रेस को हराकर तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने में भी वामपंथियों की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज जब प्रदेश में भाजपा और योगी सरकार पूरी तरह नाकाम हो चुकी है और जनता बदलाव चाहती है तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक बड़ा गठबंधन बनाकर 2022 में भाजपा को हराना जरूरी है...

विज्ञापन
CPI supporting to Akhilesh Yadav in to defeating BJP in 2022 state assembly polls
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

उत्तर प्रदेश में बेशक वामपंथी पार्टियों को चुनावी राजनीति में कम करके आंका जाता रहा हो, लेकिन प्रदेश के कुछ जिलों में अपने बचे हुए जनाधार के बलबूते 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में वह नए उत्साह से जुट गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का दावा है कि अब भी प्रदेश की करीब सौ सीटें ऐसी हैं जहां उसका ठीकठाक वोट बैंक है और वह चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। सीपीआई की कोशिश है कि भाजपा और योगी सरकार के खिलाफ बनने वाले विपक्षी गठबंधन का वह भी अहम हिस्सा बने और समाजवादी पार्टी को एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभरने में अपना पूरा सहयोग दे।

विज्ञापन


सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव और किसानों के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले नेता अतुल कुमार अंजान कहते हैं कि वामपंथी पार्टियां सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में हमेशा से सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ रही हैं। अगर अतीत में देखें तो 1989 में कांग्रेस को हराकर तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने में भी वामपंथियों की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज जब प्रदेश में भाजपा और योगी सरकार पूरी तरह नाकाम हो चुकी है और जनता बदलाव चाहती है तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में एक बड़ा गठबंधन बनाकर 2022 में भाजपा को हराना जरूरी है।

विज्ञापन

अमर उजाला से बातचीत करते हुए अतुल अंजान बताते हैं कि उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से अनौपचारिक तौर पर बात की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। दरअसल अखिलेश यादव जिस तरह अपने साथ राष्ट्रीय लोकदल, महान दल, भीम पार्टी आदि से बात कर रहे हैं और गठबंधन में लाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे ये तो तय ही है कि एक बड़ा विकल्प आकार ले रहा है और मौजूदा समय में अखिलेश यादव ही योगी और भाजपा के सबसे मजबूत विकल्प हैं। प्रदेश को योगी राज से मुक्ति दिलाने के लिए जरूरी है कि इस गठबंधन को मजबूत किया जाए।

इन्हीं तमाम सवालों पर मंथन करने और चुनावी रणनीति तय करने के लिए 25 जून को वामपंथी पार्टियों की बैठक भी होने जा रही है, जिसमें सपा के साथ तालमेल और एक बड़े गठबंधन को आकार देने पर चर्चा होगी। एक तरफ भाजपा के भीतरी असंतोष और योगी के खिलाफ पार्टी में ही उठने वाली आवाज़ को दबाने की संघ के नेताओं की ओर से कोशिश हो रही है वहीं विपक्षी गठबंधन भी तेजी से मजबूत बनाने की कवायद चल रही है।

अंजान का कहना है कि सीपीआई प्रदेश की 74 से 100 सीटों पर अपनी दखल रखती है। पिछले चुनाव के नतीजे देखें तो साफ है कि इन इलाकों में हमारे कम से कम चार हजार से 18-20 हजार वोट तक हैं और इतने वोट किसी भी चुनाव नतीजे में निर्णायक होते हैं। कहीं हम दूसरे नंबर पर रहे तो कहीं तीसरे और चौथे नंबर पर। ऐसे में अगर गठबंधन में हमें कुछ चुनी हुई सीटें मिलें, तो हम जीत भी सकते हैं और अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में सहयोगियों को जितवा भी सकते हैं। अखिलेश यादव जिस तरह दूसरे क्षेत्रीय दलों के साथ बात कर रहे हैं, वामपंथियों के साथ भी कर सकते हैं। अतुल अंजान का मानना है कि किसी भी पार्टी को छोटा नहीं समझना चाहिए और उसकी अहमियत को कम करके नहीं आंकना चाहिए। चुनावी राजनीति में एक-एक वोट के मायने होते हैं।

अंजान का दावा है कि उत्तर प्रदेश में भी अगर दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह और खासकर तमिलनाडु की तरह गठबंधन की राजनीति हो और सीटों का उचित बंटवारा हो तो भाजपा को हराना कोई मुश्किल काम नहीं है। हाल के पंचायत चुनाव के नतीजों से ये बात साफ हो चुकी है कि प्रदेश की जनता अब भाजपा से ऊब चुकी है। कोरोना काल में सरकार की नाकामी और खस्ता कानून व्यवस्था के अलावा धर्म और संकीर्ण सोच की राजनीति से लोग परेशान हैं। ऐसे में एक बड़े और असरदार गठबंधन की ज़मीन पूरी तरह तैयार है।

अतुल अंजान का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी पर भरोसा नहीं किया जा सकता और वह ऐसे किसी गठबंधन में शामिल होगी, इसमें संदेह है। बुआ-भतीजे के गठबंधन का नतीजा पिछले चुनाव में देखा जा चुका है। वैसे भी मायावती अपने फायदे के लिए भाजपा के साथ चली जाएं तो इसमें संदेह नहीं। कांग्रेस की ज़मीनी हालत सबके सामने हैं। इसलिए सपा ही एकमात्र विकल्प है, साथ ही वो तमाम छोटे दल जो किसी न किसी रूप में अलग अलग क्षेत्रों में मजबूत हैसियत रखते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed