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करात ने चीफ जस्टिस से लगाई दुष्कर्म की सुनवाई में की गई टिप्पणी वापस लेने की गुहार

Wed, 03 Mar 2021 01:55 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 03 Mar 2021 01:55 AM IST
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CPI Leader Brinda Karat appeals to Chief Justice to withdraw remarks made in Sexual assault case hearing
वृंदा करात (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

माकपा की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) एसए बोबडे को पत्र लिखकर अपनी एक टिप्पणी वापस लेने की गुहार लगाई है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस ने दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई के दौरान की थी।

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चीफ जस्टिस ने आरोपी से पूछा था कि क्या वह पीड़िता से शादी के लिए तैयार है। करात ने अपने पत्र में कहा कि अदालत को ऐसे ‘पतित’ दृष्टिकोणों का समर्थन करने का आभास नहीं देना चाहिए।
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वामपंथी नेता ने कहा कि ऐसे सवाल, शब्द और कार्रवाई नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में जमानत देने के गंभीर निहितार्थ होंगे। उन्होंने चीफ जस्टिस से आग्रह करते हुए कहा कि कृपया पुनर्विचार करें और इन टिप्पणियों व सवालों को वापस लें। कृपया औरंगाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखें, जिसने आरोपी को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को जघन्य बताया था।
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करात ने कहा, 'जब लड़की महज 16 साल की थी तो इस अपराधी ने उसका मुंह बंद किया और दुष्कर्म किया। उसने अपना अपराध 10-12 बार दोहराया। लड़की ने आत्महत्या का प्रयास किया। क्या यह स्वीकृति दिखाता है? इस लड़की जैसे नाबालिग से जुड़े किसी भी मामले में कानून स्पष्ट है कि सहमति का कोई मुद्दा नहीं है।'


उन्होंने यह भी कहा कि सीजेआई को इस पर भी पुनर्विचार करना चाहिए कि ऐसे सवाल पीड़ितों की मनोदशा पर क्या असर करेंगे? इससे जो संदेश दिया गया है कि अपराध करने के बाद भी यदि अपराधी पीड़िता से शादी के लिए सहमत हो तो वह जेल से बच सकता है, फिर चाहे पीड़िता यह चाहती हो या नहीं। इस पर भी विचार करना चाहिए। करात ने कहा, न्याय की प्रकिया दुष्कर्म पीड़िता के हित को केंद्र में रखकर चलनी चाहिए। दुर्भाग्य से इस मामले में इसके विपरीत हुआ है।

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