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Hindi News ›   India News ›   CPI general secretary D. Raja wrote a letter to PM Modi, saying this law is destroying the rights given to the workers in democracy

डी. राजा ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, कहा- श्रमिकों को लोकतंत्र में मिले अधिकार को खत्म कर रहा ये कानून, जल्द वापस ले सरकार

Sat, 10 Jul 2021 09:19 AM IST
Kuldeep Singh डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 10 Jul 2021 09:19 AM IST
सार

  • डी. राजा ने कहा है कि यह कानून एक ऐसी सरकार लेकर आई है जो स्वयं को लोकतंत्र की रक्षक बताती है, लेकिन दूसरी ओर वह श्रमिकों को हड़ताल करने का भी अधिकार नहीं देना चाहती जो कि इस देश के लोकतंत्र ने उसे दे रखा है। उन्होंने नए कानून को ड्रैकोनियन करार दिया है।

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CPI general secretary D. Raja wrote a letter to PM Modi, saying this law is destroying the rights given to the workers in democracy
सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी डी राजा - फोटो : ANI

विस्तार

सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी डी. राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में श्रमिकों को हड़ताल करने के अधिकार को खत्म करना उनके मूल अधिकारों का हनन है।

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डी. राजा ने कहा है कि यह कानून एक ऐसी सरकार लेकर आई है जो स्वयं को लोकतंत्र की रक्षक बताती है, लेकिन दूसरी ओर वह श्रमिकों को हड़ताल करने का भी अधिकार नहीं देना चाहती जो कि इस देश के लोकतंत्र ने उसे दे रखा है। उन्होंने नए कानून को ड्रैकोनियन करार दिया है।
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डी. राजा ने यह पत्र इसेंशियल डिफेंस सर्विसेज ऑर्डिनेंस 2021 के विरोध में लिखा है जिसमें श्रमिकों के हड़ताल करने, इसमें शामिल होने को अपराध बना दिया गया है।
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डी. राजा ने अपने पत्र में लिखा है कि हड़ताल करने से रोकना श्रमिकों को मिले लोकतांत्रिक, कानूनी अधिकारों का हनन है। उन्होंने इस बात पर विरोध जताया है कि इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति हड़ताल का आह्वान भी करता है तो बिना किसी जांच के उसकी नौकरी खत्म की जा सकती है और उसे जेल में डाला जा सकता है। सीपीआई नेता के मुताबिक कोई श्रमिक बिना कारण के हड़ताल नहीं करता। 


जब उसके बातचीत के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तब अंतिम हथियार के रूप में इसे इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इस अधिकार को भी खत्म कर दिया जा रहा है तो इसका अर्थ है कि अब श्रमिकों के किसी भी अधिकार को कभी भी कुचला जा सकता है और वे इसके लिए कोई आवाज नहीं उठा पाएंगे।

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