यह दिवाली कौन मनाएगा- आप या कोरोना? नवंबर तक बिगड़ सकते हैं हालात
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सार्वजनिक परिवहन के साधनों में लोगों की आवाजाही बढ़ने और मास्क - शारीरिक दूरी के नियमों का पालन न करने का दुष्परिणाम कोरोना के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली-छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान लोगों के बीच मेल-मिलाप ज्यादा होने से कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। इसकी असली तस्वीर नवंबर माह तक सामने आ सकती है। हालात भयावह न हो, इसके लिए लोगोंं से ज्यादा भीड़भाड़ में न निकलने और मास्क पहनने की अपील की जा रही है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि नवंबर में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के बढ़ने का परिणाम कोरोना के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है। ठंड में बढ़ने वाला प्रदूषण कोरोना एयरोसोल को ज्यादा दूरी तक यात्रा करने के लिए उपयुक्त माहौल दे सकता है, जो और अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए, इस दौरान बाहर निकलने से बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। भीड़भाड़ वाली किसी भी जगह पर जाने के दौरान मास्क लगाए रखनेे और शारीरिक दूरी बनाए रखने से ही कोरोना से बचाव संभव है।
एक साल तक चल सकता है कोरोना का प्रकोप
डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि कोरोना की वैक्सीन मार्च-अप्रैल तक सामने आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा और इस समय तक वैक्सीन आ भी जाती है, तो भी इतने बड़े देश में सब तक वैक्सीन पहुंचाने में छः महीने से ज्यादा का समय लग सकता है। इसलिए यह मानकर चलने में कोई बुराई नहीं है कि अगले एक साल तक कोरोना की वैक्सीन सब तक उपलब्ध नहीं हो पाएगी। इसलिए तब तक कोरोना से बचाव ही लोगों को इस जानलेवा संक्रमण से बचा सकता है।
इस तरह आ रहे हैं नए मामले
दिल्ली में 7 नवंबर को कोरोना के 6953 नए मामले सामने आए। इस दिन हुए 57433 कोरोना जांच में से 12.11 प्रतिशत लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इस दिन कोरोना के कारण 79 लोगों को जान गंवानी पड़ी। पिछले दस दिनों में कोरोना के कारण मरने वालों का अनुपात 0.85 प्रतिशत पर बना हुआ है। इसके पूर्व शुक्रवार को भी राजधानी में कोरोना के 7178 मामले सामने आए थे और इनमें कुल 64 लोगों की जान चली गई थी। इसी प्रकार गुरुवार को 6715 मामले- 66 मौत और बुधवार को 6842 मामले और 51 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
फिर तेजी से भरने लगे आईसीयू के खाली बेड्स
कोरोना के मामले अचानक तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर हुआ है कि अस्पतालों में कोरोना के बेड्स एक बार फिर तेजी से भरने लगे हैं। शनिवार को दिल्ली के अस्पतालों में 15904 कुल बेड्स में से 7858 बेड भर चुके हैं। जबकि आठ हजार से ज्यादा बेड्स अभी भी खाली हैं। इसी दौरान कुछ जगहों पर दिल्ली सरकार के कोरोना ऐप और अस्पतालों में आईसीयू बेड्स की संख्या में अंतर बताया जा रहा है। कुछ अस्पतालों पर आरोप हैं कि उन्होंने आईसीयू बेड्स की सही जानकारी एप पर नहीं उपलब्ध करा रखी है। दिल्ली में अभी भी 24 हजार से ज्यादा लोग होम आइसोलेशन में रहकर अपना इलाज करा रहे हैं।
कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़ी
कोरोना के मामले बढ़ने से राजधानी में कंटेनमेंट जोन की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। शनिवार तक राजधानी में कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़कर 3857 तक पहुंच चुकी है। अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में कंटेनमेंट जोन की संख्या और भी बढ़ सकती है।