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कुरुक्षेत्र: कांग्रेस ने नहीं दोहराई बालाकोट वाली गलती, सोनिया ने खींची नई लकीर

विनोद अग्निहोत्री Updated Thu, 26 Mar 2020 10:01 PM IST
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कोरोना संकट पर कांग्रेस का रुख
कोरोना संकट पर कांग्रेस का रुख - फोटो : PTI
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सार

  • कोरोना वायरस के खिलाफ एकजुट हुआ पूरा देश
  • कांग्रेस नेतृत्व ने नहीं दोहराई सर्जिकल स्ट्राइक वाली गलती
  • प्रधानमंत्री मोदी के कदमों का समर्थन करके सोनिया ने खींची नई लकीर
  • अब तक सरकार को निशाने पर ले रहे राहुल गांधी ने भी बदले सुर

विस्तार

आखिर देश ने फिर साबित कर दिया कि संकट के समय पूरा देश सारे मतभेद और झगड़े भूलकर एकजुट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के कदमों का स्वागत और समर्थन देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से पक्ष विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक कटुता को मिटाकर राष्ट्रीय संकट के समय राजनीतिक सहयोग की नई इबारत लिखने जैसा है। सिर्फ सोनिया ही नहीं अब तक कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार को लगातार आड़े हाथों लेते रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों विशेषकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज को सही दिशा में उठाया गया पहला कदम बताकर यह संदेश दे दिया है कि इस बार कांग्रेस उड़ी और बालाकोट जैसी गलती नहीं करने वाली है।
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पीएम मोदी ने हाथ में ली कमान

उधर, कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीधे संभालने के बाद पूरा सरकारी तंत्र युद्धस्तर पर सक्रिय हो गया है। दरअसल जिस कोरोना संक्रमण को लेकर पूरा विश्व चिंतित था, लेकिन शुरुआती दौर में भारत की नौकरशाही उसे हल्के में लेकर सरकार को भरोसा दे रही थी कि भारत को उससे डरने की जरूरत नहीं है। इस वजह से जनवरी और फरवरी में जो जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए थे, उनमें देर होने से कोरोना संक्रमण भारत में तेजी से पांव पसारने लगा। इसे लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से भी ज्यादा केंद्र सरकार और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच शह मात का खेल चलता रहा।

राहुल करते रहे आगाह

राहुल अपने ट्वीट के जरिए बार बार कोरोना संक्रमण के संभावित खतरे के प्रति सरकार को आगाह करते रहे और सरकार अपनी नौकरशाही के भरोसे यह मानकर चल रही थी कि राहुल सिर्फ अपनी सियासी भड़ास निकाल रहे हैं। यहां तक कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन तक को विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के हवाले से नौकरशाही ने यह भरोसा दे दिया था कि कोरोना को लेकर घबराने या हड़बड़ी की कोई जरूरत नहीं है और इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने राहुल गांधी को ट्वीट के जरिए करारा जवाब दिया।

चीन के पड़ोसी ताइवान ने दिसंबर से ही अपने यहां आने वाली सभी विदेशी उड़ानों के देसी-विदेशी यात्रियों की कोरोना जांच हवाई अड्डे पर ही शुरू कर दी गई थी और उन्हें एकांतवास में भेजा जाने लगा था। नतीजा यह कि उस छोटे से देश ने कोरोना संक्रमण से खुद को बचा लिया। जबकि भारत में विदेश मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने सरकार को यही बताया कि यह संक्रमण सिर्फ चीन और उसके कुछ पूर्वी पड़ोसी देशों तक ही सीमित है। इसलिए सरकार ने अपने यहां विदेश से आने वालों की जांच और उड़ानों पर पाबंदी लगाने से ज्यादा संक्रमण के शिकार देशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने को तरजीह दी और इसे सफलता पूर्वक अंजाम भी दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में भी सिर्फ चीन और पूर्वी एशिया के कुछ देशों को चिन्हित करके उनके यात्रियों की जांच शुरू की गई।

एक मौत ने सरकार को सतर्क किया  

सरकार के कान तब खड़े हुए जब दिल्ली में कोरोना संक्रमण के शिकार कुछ मामले सामने आए और इटली से आए पर्यटकों के एक दल में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को हुई तब पूरे तंत्र को ऊपर से नीचे तक झकझोरा गया और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे मामले की कमान संभाली और ताबडतोड़ जरूरी और सख्त फैसले लिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की रात देश को संबोधित करते हुए कोरोना संक्रमण के खतरे की भयावहता का जिक्र करते हुए पूरे देश में लॉकडाउन यानी देश की सभी गतिविधियों (सिर्फ आपात और अनिवार्य सेवाओं को छोड़कर) को बंद करने की घोषणा और लोगों से उनके घरों तक ही सीमित रहने की अपील करके कोरोना संक्रमण के खिलाफ निर्णायक युद्ध का एलान कर दिया।

राहुल ने किए ट्वीट पर ट्वीट

पूरे देश ने उनकी अपील को एक स्वर से स्वीकार किया और लोग अपने घरों में सिमट गए हैं। बुधवार को राहुल गांधी ने भी कोरोना के खिलाफ क्या करना चाहिए इसे लेकर कुछ ट्वीट किए। राहुल अपने पहले ट्वीट में लिखते हैं- `हमारा देश कोरोना वायरस से युद्ध लड़ रहा है। आज सवाल ये है कि हम ऐसा क्या करें कि कम से कम जिंदगियां जाएं। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए सरकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मेरा मानना है कि हमारी रणनीति दो हिस्सों में बंटी हो।

राहुल का अगला ट्वीट है- कोविड-19 से जूझना। संक्रमण रोकने के लिए एकांत में रहना और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग करना। शहरी इलाकों में विशाल आपातकालीन अस्थाई अस्पताल का तुरंत विस्तार करना। इन चिकित्सा क्षेत्रों में पूर्ण आईसीयू की सुविधा उपलब्ध हो।

अर्थव्यवस्था शीर्षक वाले अपने अगले ट्वीट में राहुल का सुझाव है कि दिहाड़ी मजदूरों को फौरन सहायता चाहिए। उनके अकाउंट में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर हो। राशन मुफ्त उपलब्ध हो। इसमें देरी विनाशकारी होगी। व्यापार ठप है। टैक्स छूट मिले, आर्थिक सहायता भी मिले ताकि नौकरियां बच जाएं। छोटे बड़े व्यापारियों को ठोस आश्वासन मिले।` 

31 जनवरी से करते रहे आगाह

कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर राहुल गांधी का यह पहला ट्वीट नहीं है। अगर उनकी ट्विटर टाइमलाइन पर जाकर देखा जाए तो 31 जनवरी से वह एक-दो दिन के अंतराल के बाद लगातार इस भयावह खतरे के प्रति आगाह करते रहे हैं। 31 जनवरी 2020 को राहुल गांधी ने कोरोना पर अपने पहले ट्वीट में इस वैश्विक महामारी के खतरे को लेकर चेतावनी दी। राहुल ने लिखा- चीन में कोरोना वायरस ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली। आगे उन्होंने इसमें मारे गए लोगों और पीड़ित जिन्हें एकांतवास में भेजा गया था उनके प्रति अपने संवेदनाएं व्यक्त कीं। 12 फरवरी को अपने अगले ट्वीट में राहुल लिखते हैं- कोरोना वायरस देशवासियों और अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद गंभीर खतरा है। मुझे लगता है कि सरकार इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही है।

तीन मार्च को फिर राहुल ने ट्वीट किया- `हर देश के जीवन में कुछ एसे क्षण आते हैं जब उसके नेताओं की परीक्षा होती है।एक सच्चे नेता का ध्यान पूरी तरह उस भयावह संकट को दूर करने की तरफ होना चाहिए जो वायरस के जरिए भारत और उसकी अर्थव्यवस्था पर आने वाला है।` इसके बाद राहुल गांधी ने लगातार तीन मार्च, पांच मार्च, 13 मार्च, 18 मार्च, 21 मार्च,  23 मार्च और 24 मार्च को बेहद आक्रामक ट्वीट किए और सरकार पर कोरोना संकट को अनदेखा करने का आरोप लगाया। राहुल के इन ट्वीट से सरकार और विपक्ष के बीच तल्खी और बढ़ गई।

सोनिया ने किया सरकार का समर्थन

लेकिन गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न सिर्फ उनके द्वारा लॉकडाउन समेत उठाए गए सभी कदमों का स्वागत और समर्थन किया गया बल्कि यह आश्वासन भी दिया गया कि कांग्रेस पूरी तरह कोरोना के खिलाफ जंग में सरकार के हर प्रयास के साथ है। सोनिया ने अपने पत्र में कुछ सुझाव भी दिए जिनका जवाब सरकार ने अपने आर्थिक पैकेज की घोषणा से देश को दिया।

सोनिया के इस कदम ने उनकी राजनीतिक परिपक्वता के साथ-साथ सरकार और विपक्ष के बीच की दूरी को भी पाटने का काम किया है। दिन में वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद राहुल गांधी ने भी सरकार की घोषणा को सही दिशा में उठाया गया पहला कदम बताते हुए समर्थन किया। इसके पहले सोनिया ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कोरोना के खिलाफ क्या क्या जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए इसकी हिदायत दी थी। कुल मिलाकर कोरोना संक्रमण के खिलाफ जिस तरह पक्ष-विपक्ष एकजुट हुए हैं वो एक शुभ संकेत है जो भरोसा दिलाता है कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को छोड़कर जब सब कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में साथ हैं तो भारत यह जंग जरूर जीतेगा।

 
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