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COVID-19: महामारी के बाद से वर्क स्टेशन पर कम हुए महिलाओं के यौन उत्पीड़न के केस, इन शहरों में घटनाएं कम नहीं

Mon, 31 Oct 2022 06:35 PM IST
राहुल संपाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल संपाल Updated Mon, 31 Oct 2022 06:35 PM IST
सार

महानगरों की बात करें तो दिल्ली में 2021 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के सबसे अधिक मामले सामने आए, इसके बाद मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में मामले दर्ज किए गए। 

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COVID-19 Pandemic Women Assault decreases but these cities saw maximum rise special report news in hindi
महिलाओं का वर्कप्लेस। - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना महामारी के बाद देश में महिलाओं यौन उत्पीड़न के मामले में कमी देखने को मिल रही है। पिछले पांच वर्षों की शीर्ष 100 कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट से यौन उत्पीड़न की शिकायतों का डेटा एकत्र किया। इन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि,बीते कुछ वर्षों में वर्क स्टेशन पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में कमी देखी जा रही है। 2021-22 में प्रति 10,000 महिला कर्मचारियों में केवल आठ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की गई। वर्ष 2017 और 2021 के बीच 2019 में सबसे अधिक मामले सामने आए। बाद के दो वर्षों में इस तरह की शिकायतों में क्रमशः 3.8 फीसदी (2020) और 13.8 फीसदी (2021) की गिरावट दर्ज की गई।
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महानगरों की बात करें तो दिल्ली में 2021 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के सबसे अधिक मामले सामने आए, इसके बाद मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में मामले दर्ज किए गए। 2021 में भारतीय शहरों में कुल मामलों का 91.9 फीसदी हिस्सा इन पांच शहरों से था। विश्लेषण में सामने आया कि, महिलाएं पहले अक्सर ऐसी शिकायत दर्ज करने में झिझकती थी। उनका सोचना था कि शिकायत करने से क्या बदल जाएगा। मेरा मामला उठाए जाने के बाद भी क्या मैं कंपनी का हिस्सा रहूंगी या नहीं। क्या मैं शिकायत करने के बाद कंपनी में आगे बढ़ पाऊंगी या नहीं। महज दस में से केवल एक या दो ही महिला ही पहले शिकायत करने के लिए आगे आती थी। लेकिन अब महिलाएं खुलकर अपने साथ हो रही घटनाओं की बात कंपनी के संबंधित कमेटी से साझा करती है।
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जब लोग आफिस में थे ही नहीं तो कहां से आते मामले
महिला-पुरुष समानता और यौन अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के दायरे में आने वाली चीजों की समझ और जागरूकता कमी है। इसके कारण महामारी के दौरान शायद मामलों में कमी दिख रही है। कई कंपनियां अब भी मानती हैं कि कार्यस्थल से दूर रहकर काम करना और यौन उत्पीड़न आपस में विरोधाभास उत्पन्न करते हैं। जबकि सच यह है कि लोग आफिस में  ही नहीं तो यौन उत्पीड़न के केस कहां से आएगा।
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महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ स्वाती जैन कहती है कि, कोरोना काल के दौरान लगभग चार-पांच मामलों में महिलाओं को यौन उत्पीड़न पर मेरी राय की जरूरत थी क्योंकि इन मामलों में कुछ भी शारीरिक संबंध नहीं। लेकिन रेगुलर आने वाले भद्दे मैसेज से वो थोड़ी असहज हो जाती थी। आज व्हाट्सऐप पर तस्वीरें भेजना या व्यक्तिगत सवाल पूछना भी यौन उत्पीड़न में शामिल है। कार्यालय आधारित यौन उत्पीड़न में वीडियो कॉल और चैट के जरिये भी शोषण को भी माना जा सकता है। यदि किसी को बेबी या स्वीटी जैसे शब्द बोले जाएं तो यह भी यौन उत्पीड़न के अंतर्गत आएगा। महामारी के दौरान कंपनियों ने यौन उत्पीड़न रोकथाम प्रशिक्षण में निवेश करना बंद कर दिया था। हालांकि भारत में काम पर या कार्यालय परिसर में यौन उत्पीड़न के गिरते मामले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों में भी दिख रहे हैं।
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