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कोरोना: दूसरी लहर में लॉकडाउन से लेकर अनलॉक तक का सफर, जानिए अब तक के अपडेट
Mon, 31 May 2021 05:55 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 31 May 2021 05:55 PM IST
सार
भारत पिछले तीन महीने से कोरोना की दूसरी लहर की मार झेल रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य सरकारों ने दूसरी लहर के दौरान कई पाबंदियां लगाईं, जिसके बाद स्थिति कुछ सुधरी है। अब एक जून से कुछ राज्य छूट देने जा रहे हैं।
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बाजार खोलने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में मार्च के मध्य में कोरोना की दूसरी लहर ने दबे पांव दस्तक दी। दूसरी लहर इतनी खतरनाक और जानलेवा होगी, किसी ने सोचा नहीं था। इस दौरान सबसे ज्यादा युवा संक्रमित हुए। इसमें 60 फीसदी लोग 45 साल से कम उम्र के हैं। वहीं दूसरी लहर से मरने वालों में 55 फीसदी लोग 60 साल या उससे ऊपर के हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर एक महीने से भी कम समय में पहली लहर का पीक पार कर गई, जो पिछले साल सितंबर महीने में आया था। हालांकि पिछले साल जितनी मौतों की संख्या पार करने में डेढ़ महीने का वक्त लगा। फिलहाल हालात पहले से काफी सुधरे हैं, लेकिन स्थितियां पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हैं।
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कोरोना से देश के 12 राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसमें महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, गोवा समेत उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य शामिल हैं। यहां पर संक्रमण दर 30 फीसदी के पार पहुंच गई। शुरुआती दौर में महाराष्ट्र और कर्नाटक बुरी तरह से प्रभावित हुए। महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से मई के बीच सामने आए कोरोना मामलों में 55 फीसदी केस 40 साल या उससे कम उम्र के हैं। वहीं, कर्नाटक में 5 मार्च से 5 अप्रैल तक जितने मामले आए हैं, उनमें से 47 फीसदी मरीज 15 से 45 साल के बीच के हैं।
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लापरवाही ने फैलाई दूसरी लहर
भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार तेज होने के पीछे कई तर्क हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत उन देशों में शुमार है, जहां सतर्कता बरतने से तुरंत पीछा छुड़ा लिया गया। पहली लहर जैसे ही ढ़लान पर पहुंची कि केंद्र और राज्य सरकारों ने पाबंदियों में छूट देने शुरू कर दी। साल के पहले महीने की शुरुआत में ही सब कुछ खोल दिए गए । यहां तक कि लोग मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी भूल गए। एक्सपर्ट्स ने कहा कि जब पूरे देश को खोला गया तो उचित कोरोना बर्ताव की कमी, बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां, धार्मिक आयोजन, क्रिकेट मैच, सार्वजनिक परिवहन, मॉल, थियटर इन सबका योगदान रहा है, जहां बड़ी संख्या में भीड़ जुटी।
इसके अलावा सरकार ने टीकाकरण अभियान तेज नहीं किया। परिणाम ऐसा हुआ कि मार्च के बाद कोरोना के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी शुरू हो गई। अप्रैल और मई महीने में कोरोना ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। अप्रैल में रोजाना कोरोना के नए केस 3 लाख के पार होने लगे और मरने वालों की संख्या भी तीन हजार से ऊपर जाने लगी। वहीं मई में कोरोना के नए मामलों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए आंकड़े 4 लाख के पार पहुंच गए और मरने वालों की संख्या 4 हजार से ऊपर पहुंच गई।
देश का स्वास्थ्य ढांचा चरमराया
इस दौरान देश का स्वास्थ्य ढांचा चरमरा गया। देश में दवा, ऑक्सीजन, बेड समेत अन्य चीजों की कमी होने लगी। जिस तेजी से नए मरीज बढ़ रहे थे, उस अनुपात से ठीक होने वालों की तादाद ज्यादा नहीं थी। इधर पिछले साल से खोखली हो रही अर्थव्यवस्था को देखते हुए केंद्र ने इस बार लॉकडाउन लागू नहीं करने का फैसला लिया। केंद्र ने राज्यों के ऊपर अपने-अपने हिसाब से पाबंदियां लगाने के निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो 1 मार्च से 4 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और दिल्ली में करीब 80 हजार बच्चे कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।
पिछले साल 24 मार्च को लगा था लॉकडाउन
पहली लहर में पिछले साल 24 मार्च 2020 को भारत में पूर्ण लॉकडाउन लगा था, उस वक़्त भारत में कोरोना के कुल 500 मरीज़ भी नहीं थे। उसके बाद तीन महीनों तक धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सितंबर मे कोरोना 97 हजार के मामले के साथ पीक पर पहुंचा। हालांकि सरकार जून के बाद रेलवे, हवाई यात्रा समेत अन्य चीजों को धीरे-धीरे खोलने की अनुमति देने लगी, लेकिन देश की आर्थिक सेहत कमजोर पड़ गई। पिछले साल से सबके लेते हुए इस साल केंद्र की ओर से लॉकडाउन नहीं लगाया गया, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्यों सरकारों ने पहले नाइट कर्फ्यू लागू किया फिर सख्त प्रतिबंध लगाए गए। बावजूद इसके मामले कम नहीं हुए।
महाराष्ट्र में लगा सबसे पहला लॉकडाउन
जिसके बाद कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में 14 अप्रैल को 15 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाया गया। जो 1 जून तक प्रभावी है। कुछ जिलों में छूट के साथ यहां लॉकडाउन जैसी पाबंदियां 15 दिन के लिए बढ़ा दी गई हैं जिन 21 जिलों में 10 प्रतिशत से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट हैं, वहां पाबंदियां नहीं हटेंगी। महाराष्ट्र के बाद देश के कई राज्यों ने कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए लॉकडाउन हथियार को लागू किया। पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु समेत सभी राज्यों ने 15-15 दिनों का लॉकडाउन लगया, लेकिन धीरे-धीरे इसे बढ़ाया गया।
10 से ज्यादा राज्यों में लॉकडाउन लगे हुए एक महीने से ज्यादा हो गया है। दूसरी लहर की रफ्तार धीरे-धीरे धीमी पड़ने लगी है।अब इन राज्यों में छूट देने की कवायद शुरू हो गई है। दिल्ली में सोमवार (1 जून) से पाबंदियों में ढील देने का फैसला किया गया है। हालांकि, लॉकडाउन सात जून तक बढ़ा दिया गया है।
इन राज्यों में लंबा चलेगा लॉकडाउन
-कर्नाटक में 7 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा।
-तमिलनाडु में 7 जून तक लॉकडाउन जारी रहेगा।
-मध्यप्रदेश में 1 जून से धीरे-धीरे ढील दी जाएगी। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अनलॉक करने का एलान किया।
-ओडिशा में एक जून तक लॉकडाउन लगा हुआ है। 5 मई को पहली बार दो हफ्ते का लॉकडाउन लगा था, जिसे दो सप्ताह और बढ़ा दिया गया।
-पश्चिम बंगाल में 15 जून तक लॉकडाउन बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में 15 जून तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की।
-राजस्थान सरकार ने लॉकडाउन अवधि 8 जून तक बढ़ा दी है। हालांकि पॉजिटिविटी रेट जहां कम है , वहां 1 जून से कारोबारी गतिविधियों में छूट दी जा सकती है।
-पंजाब में कोरोना से जुड़े प्रतिबंध 8 जून तक लागू रहेंगे।
-बिहार में एक बार फिर से राज्य सरकार ने हालात की समीक्षा के बाद लॉकडाउन को बढ़ा दिया है। हालांकि व्यापारिक गतिविधियों में छूट दी जाएगी।
- झारखंड में 3 जून तक के लॉकडाउन लागू रखने का एलान किया गया है।
-हिमाचल प्रदेश में 7 जून तक प्रतिबंध लागू रहेंगे। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह ही खुलेंगी।