कोरोना महामारी को लेकर भारतीय दूसरे देशों से ज्यादा गंभीर और जागरूक
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कोरोना को लेकर देश के लोग दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में अधिक गंभीर और सतर्क दिखे। अंतरराष्ट्रीय संस्था आई स्क्वॉयर द्वारा 20 मार्च से दो अप्रैल के बीच 300 लोगों पर हुए अध्ययन में ये खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार 79 फीसदी भारतीय लोगों ने वायरस को खतरनाक माना जबकि 78 फीसदी ने इसे बड़ी समस्या कहा। 58 फीसदी लोग उदास दिखे, जो अमेरिका और जर्मनी से अधिक है। विश्वास, जानकारी और स्पष्टता के मामले में भी भारत 59 से 69 फीसदी के बीच रहा जबकि अमेरिका और जर्मनी में ये आंकड़ा नीचे रहा। रिपोर्ट के अनुसार शोध में शामिल आधे लोग जो किसी संक्रमित को जानते थे जिसका इलाज हुआ या क्वारंटीन रहा वो अपने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंतित दिखे। उनका मानना है कि वायरस जिंदगी का एक-एक पल प्रभावित कर सकता है।
बड़ी उम्र के लोग अधिक सतर्क दिखे
16 से 39 वर्ष के युवाओं की तुलना में 40 से 69 साल के लोग वायरस को लेकर अधिक सतर्क दिखे और उसके बारे में हर जानकारी रखना चाहते हैं। ये लोग साफ सफाई से लेकर क्षेत्र के लोगों के लिए सजग रहे लेकिन युवा थोड़ा निराश और हताश दिखा। लोग अपने लोगों से फोन के जरिए जुड़े और उनका हालचाल लेने में दिलचस्पी दिखाने लगे। कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा समय रहते लॉकडाउन करने से लोग अधिक सजग हुए और स्थिति को करीब से देखने में रुचि दिखाई।