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Covid-19 Compensation: कोरोना मुआवजे से जुड़े पोर्टल का व्यापक प्रचार न करने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, राज्यों को लगाई फटकार
Mon, 13 Dec 2021 10:16 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 13 Dec 2021 10:16 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि जब तक आम आदमी के बीच इसका प्रचार- प्रसार नहीं किया जाएगा तो उन्हें उस पोर्टल का पता नहीं चल पाएगा, जिससे वे ऑनलाइन आवेदन कर सकें।
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सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को निर्देश
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोविड-19 पीड़ितों के परिवारों को अनुग्रह मुआवजे के वितरण के संबंध में विकसित पोर्टल का व्यापक प्रचार नहीं करने को लेकर राज्यों की खिंचाई की। राज्यों द्वारा मुआवजे के प्रचार में कमी पर गौर करते हुए जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम आदमी को राज्यों द्वारा प्रदान की जाने वाली मुआवजे की योजना के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत नहीं कराया जा रहा है। पीठ ने कहा कि जब तक आम आदमी के बीच इसका प्रचार- प्रसार नहीं किया जाएगा तो उन्हें उस पोर्टल का पता नहीं चल पाएगा, जिससे वे ऑनलाइन आवेदन कर सकें।
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महाराष्ट्र से नवीनतम स्थिति के बारे में जानकारी मांगी
सोमवार को पीठ ने महाराष्ट्र से नवीनतम स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश वकील सचिन पाटिल ने न्यायालय को अवगत कराया कि निर्देशों के अनुसार, महाराष्ट्र ने शुरुआत में 15 दिसंबर, 2021 के बाद वितरण का प्रस्ताव दिया था लेकिन पहले ही भुगतान करना शुरू कर दिया गया है। कुल मिलाकर हमें 87 हजार आवेदन प्राप्त हुए और हमने वितरण शुरू किया। अब तक 8000 आवेदनों की स्वीकृति हो चुकी है और वितरण की प्रक्रिया चल रही है। इस पर पीठ ने कहा है कि न्यायालय द्वारा दबाव डालने के बाद ही वितरण शुरू हुआ है।
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विज्ञापन के सवाल पर पाटिल ने कोर्ट को बताया कि योजना के बारे में आम आदमी को जागरूक करने के लिए उसने 121 अखबारों में प्रकाशन कराया है। वहीं पोर्टल के प्रचार-प्रसार पर गुजरात सरकार की ओर से पेश वकील रजत नायर ने कहा कि हमने ऑल इंडिया रेडियो को इसका प्रचार करने के लिए कहा है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि ऑल इंडिया रेडियो कौन सुनता है? इस पर नायर ने बताया कि साथ ही स्थानीय रेडियो को भी निर्देश दिया गया है।
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जवाब में पीठ ने कहा कि राज्य को स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देना चाहिए क्योंकि यह योजना के संबंध में सूचना प्रसारित करने का सबसे प्रभावी तरीका होगा जिसके बाद नायर ने कहा कि इसी हफ्ते अखबारों में विज्ञापन दिया जाएगा। पीठ ने नायर को बुधवार को सुनवाई की अगली तारीख से पहले अखबार में विज्ञापन देने का निर्देश दिया।