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पत्नी को साथ रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती अदालतेंः सुप्रीम कोर्ट

Mon, 27 Nov 2017 05:54 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Nov 2017 05:54 AM IST
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Courts cannot force husband to keep wife says Supreme court

अदालतें पत्नी को साथ रखने के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। साथ ही पति जो की एक पायलट है, को छोड़ी गई पत्नी और बच्चे की देखभाल के लिए तुरंत दस लाख रुपये जमा करने को कहा। 

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सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को बहाल किया जो कि पति के समझौते का पालन करने से इनकार करने पर रद्द कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आदर्श गोयल और यूयू ललित की पीठ ने कहा, हम किसी पति को पत्नी को साथ रखने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं। यह एक मानवीय रिश्ता है।
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साथ ही अदालत ने पुरुष से कहा कि वह ट्रायल कोर्ट ने दस लाख रुपये जमा कराए, जिससे पत्नी अपनी तत्काल की जरूरतों को पूरा कर पाए। 
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जब पुरुष के वकील ने अदालत से कहा कि राशि कम कर दी जाए तो अदालत ने इनकार करते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट है, पारिवारिक अदालत नहीं और कोई बातचीत नहीं हो सकती है।

अगर आप दस लाख रुपये जमा करने को तैयार हैं, तो जमानत के आदेश बहाल हो जाएंगे। वकील दस लाख रुपये जमा करने को राजी हो गए, लेकिन उन्होंने अदालत से कुछ वक्त मांगा।

अदालत ने पैसे जमा करने के लिए उन्हें चार हफ्ते का वक्त दिया। साथ ही कहा कि पत्नी बिना किसी शर्त के ये पैसे निकाल सकती है। अदालत ने कहा कि इस राशि में सुधार किया जा सकता है।

दोनों पक्ष पारस्परिक समझौते के लिए आजाद हैं। जमानत इन्हीं शर्तों के अंतर्गत बहाल होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट तीन महीने के अंदर सुनवाई खत्म करे, जैसा मद्रास हाईकोर्ट भी आदेश दे चुका है। 

पति ने तोड़ा था पत्नी को साथ रखने का समझौता

Courts cannot force husband to keep wife says Supreme court
husband wife fight

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच ने 11 अक्तूबर को पायलट की अग्रिम जमानत रद्द करते हुए कहा कि उसने शिकायतकर्ता पत्नी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते की पहली ही शर्त यह थी कि वह पत्नी और बच्चे को अपनी नौकरी की जगह पर ले जाएगा। पर यह शर्त नहीं पूरी हुई।

जबकि पुनर्मिलन की शर्त पर ही पत्नी उसके खिलाफ विभागीय जांच रुकवाने को राजी हुई थी। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि इस झूठे वादे के चलते बच्चे की जिंदगी भी मुश्किल में फंस गई है क्योंकि उसके स्कूल से स्थानांतरण का सर्टिफिकेट भी ले लिया गया था।

पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का भी केस है। हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि जांच पूरी करके तीन महीने के अंतर ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट पेश की जाए। 

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