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सटीक: बिना सबूत किसी को भी समन न भेजें अदालतें, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में की बड़ी टिप्पणी

Sat, 18 Sep 2021 05:41 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 18 Sep 2021 05:41 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत हों, तभी धारा 319 का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। 
 

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Courts can't exercise power to summon as accused in casual, cavalier manner: SC
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति आरोपी नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि उसने अपराध किया है, तो ऐसे मामलों में अदालतें लापरवाह तरीके अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालतें ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल तभी कर सकती हैं, जब उसके खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत हों।  
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दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत जब किसी अपराध की जांच या मुकदमे के दौरान सबूतों से यह लगता है कि मामले में आरोपी नहीं बनाए गए किसी व्यक्ति ने अपराध किया है, तो अदालत ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है।
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न्यायमूर्ति के एम जोसफ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह एक और मामला है, जिसमें सीआरपीसी की धारा 319 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए किसी नए व्यक्ति के खिलाफ समन जारी करके उसे इस अदालत में लाया गया है। 

पीठ ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत हों, तभी धारा 319 का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने रमेश चंद्र श्रीवास्तव द्वारा दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते समय यह टिप्पणी की। श्रीवास्तव के ड्राइवर का शव 2015 में मिला था। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया और अदालत में बयान दिया है कि श्रीवास्तव को आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन उसने अपने दोस्तों की मदद से उसके पति की हत्या कर दी।

निचली अदालत ने मृतक की पत्नी के बयान के आधार पर श्रीवास्तव को आरोपी के रूप में तलब किया था। श्रीवास्तव ने तब निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट में उसकी याचिका खारिज कर दी गई, जिसके बाद उसने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने श्रीवास्तव की अपील को स्वीकार कर लिया और इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले व एक आरोपी के रूप में उसे तलब करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया।


पीठ ने कहा कि सत्र न्यायाधीश 30 सितंबर, 2021 को इस मामले की सुनवाई करेंगे। उक्त दिन सभी पक्षकार मौजूद रहेंगे। इसके बाद अदालत हरदीप सिंह मामले (2014 के फैसले) में इस अदालत द्वारा निर्धारित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश पारित करेगी। 

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