फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Courts can allow changes in criminal complaints if no prejudice caused: SC

Supreme Court: 'आपराधिक शिकायत में हो सकता है बदलाव, अगर आरोपी के अधिकार पर न पड़े असर', कोर्ट की टिप्पणी

Fri, 25 Jul 2025 09:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 25 Jul 2025 09:51 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में प्रक्रिया के नियमों का मकसद न्याय में मदद करना है, न कि उसे रोकना। अगर शिकायत में किया गया बदलाव आरोपी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, तो कोर्ट उसे मंजूरी दे सकता है। यह टिप्पणी कोर्ट ने 14 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में की, जिसमें शिकायत में 'देसी घी' की जगह 'दूध' लिखने के बदलाव की अनुमति को सही ठहराया गया।

विज्ञापन
Courts can allow changes in criminal complaints if no prejudice caused: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि न्याय प्रणाली में प्रक्रिया का मकसद मदद करना है, न कि न्याय को रोकना। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आपराधिक शिकायत में किए गए बदलाव से आरोपी को कोई नुकसान नहीं होता, तो कोर्ट ऐसे बदलाव को मंजूरी दे सकता है। 

विज्ञापन


जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी.विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि प्रक्रिया का मकसद न्याय में मदद करना है, उसे रोकना नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात एक आपराधिक शिकायत पर सुनवाई के दौरान कही, जो परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि तकनीकी प्रक्रियाएं न्याय में बाधा नहीं बननी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरोप में बदलाव किया जाता है और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं होता, तो सुनवाई जारी रह सकती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: इस्राइल के खिलाफ प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की माकपा की याचिका
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा, अगर बदलाव से आरोपी को नुकसान हो सकता है, तो कोर्ट नई सुनवाई शुरू कर सकती है या फिर पुराने मुकदमे को कुछ समय के लिए टाल सकती है। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 217 के तहत, जब आरोप बदले जाते हैं, तो अभियोजन पक्ष और आरोपी को गवाहों को फिर से बुलाने की इजाजत दी जाती है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को नुकसान पहुंचे या नहीं- यही सबसे जरूरी बात है, जिसे ध्यान में रखना चाहिए।

'शिकायत में बदलाव करना सीआरपीसी के खिलाफ नहीं'
कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत में बदलाव करना सीआरपीसी के नियमों के खिलाफ नहीं है। सीआरपीसी की धारा 216 कोर्ट को यह अधिकार देती है कि वह किसी भी आरोप को बदल सकती है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई आरोप बदला जता है, तो उसका मतलब केवल कानून की उस धारा को बदलना होता है, जो किसी तथ्य पर लागू होती है। खुद तथ्य नहीं बदले जाते। 

ये भी पढ़ें: '40 साल पुरानी FIR को नहीं समझ पा रहा CFSL', सिख विरोधी दंगा मामले में यूपी सरकार का सुप्रीम कोर्ट को जवाब

क्या था पूरा मामला
इस मामले में शिकायत यह थी कि तीन चेक दिए गए थे, जिनकी कुल रकम 14 लाख रुपये थी और वे बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ये चेक देसी घी (दूध से बने उत्पाद) की खरीद के लिए दिए गए थे। बाद में शिकायतकर्ता ने शिकायत में टाइपिंग की गलती बताते हुए बदलाव की मांग की और कहा कि असल में जो सामान बेचा गया था वह दूध था। निचली कोर्ट ने सितंबर 2023 में यह मानते हुए बदलाव की अनुमति दी थी कि अभी जिरह शुरू नहीं हुई है और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं होगा।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द
लेकिन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह बदलाव शिकायत की प्रकृति को बदलता है और इससे जीएसटी कानून के तहत टैक्स से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया और कहा कि यह एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रिया संबंधी गलती थी और इससे आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामूली बदलावों की इजाजत दी जा सकती है, जब तक कि उससे आरोपी के अधिकारों पर कोई बुरा असर न पड़े।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed