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जासूसी मामला: कोर्ट ने DRDO वैज्ञानिक के पॉलिग्राफ और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की याचिका खारिज की, जानें डिटेल्स
Sun, 17 Sep 2023 03:22 PM IST
कुमार विवेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Sun, 17 Sep 2023 03:22 PM IST
सार
Espionage case: पुणे में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) से संबद्ध एक प्रयोगशाला के तत्कालीन निदेशक कुरुलकर को एक पाकिस्तानी खुफिया संचालक को गोपनीय सूचना लीक करने के आरोप में तीन मई को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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Pradeep Kurulkar
- फोटो : ANI
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विस्तार
पुणे की एक विशेष अदालत ने डीआरडीओ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर की पॉलीग्राफ, वॉयस लेयर और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण जांच की मांग करने वाली महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की याचिका खारिज कर दी। कुरुलकर जासूसी के मामले में आरोपित हैं।
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विशेष न्यायाधीश वीआर काचरे ने शनिवार को एटीएस के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें अदालत से पॉलीग्राफ टेस्ट, वॉयस लेयर और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण परीक्षण के लिए कुरुलकर की सहमति लेने का अनुरोध किया गया था।
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पुणे में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) से संबद्ध एक प्रयोगशाला के तत्कालीन निदेशक कुरुलकर को एक पाकिस्तानी खुफिया संचालक को गोपनीय सूचना लीक करने के आरोप में तीन मई को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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बचाव पक्ष के वकील ऋषिकेश गानू ने कहा कि आरोपी को उक्त परीक्षणों से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और तर्क दिया कि पूरा मामला टेलीफोन संचार और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर आधारित है, जो एटीएस के पास हैं।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, "... मेरा मानना है कि आरोपी को उसकी सहमति के बिना पॉलीग्राफ टेस्ट या वॉयस लेयर और साइकोलॉजिकल एनालिसिस टेस्ट से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।"
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट और अच्छी तरह से स्थापित कानून है कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी तकनीक के अधीन नहीं किया जाना चाहिए, चाहे वह आपराधिक मामलों में जांच के संदर्भ में हो या अन्यथा। कोर्ट के अनुसार इसमें कहा गया है कि ऐसा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप होगा।
उन्होंने कहा, ''समग्र चर्चा को ध्यान में रखते हुए और श्रीमती सेल्वी व अन्य बनाम कर्नाटक राज्य के ऐतिहासिक फैसले पर भरोसा करते हुए मेरा विचार है कि दोनों आवेदन खारिज किए जा सकते हैं। इससे पहले एटीएस ने मामले में अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया था कि कुरुलकर एक पाकिस्तानी खुफिया संचालक की ओर आकर्षित हुए थे और उन्होंने अन्य गोपनीय रक्षा परियोजनाओं के साथ भारतीय मिसाइल प्रणालियों के बारे में उससे बात की थी।