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Supreme Court: अब कोर्ट की वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं होगी वायरल; बिना अनुमति अपलोड पर रोक; अदालत क्या बोली?

Tue, 28 Jul 2026 11:45 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 28 Jul 2026 11:45 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर कहा है कि उसकी या हाई कोर्ट की न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अनुमति के बिना सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं किया जाएगा। हालांकि, मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों की कोर्ट रिपोर्टिंग इस आदेश से प्रभावित नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
 

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Court recordings will not go viral on social media Supreme Court bans uploading without permission
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना निकाला, प्रसारित किया, उससे आर्थिक लाभ कमाया या सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने देशभर में अदालतों की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए एक समान ढांचा लागू करने की मांग वाली रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम निर्देश दिया।

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बिना अनुमति रिकॉर्डिंग साझा करने पर क्या-क्या प्रतिबंध रहेंगे?
अंतरिम व्यवस्था के तहत शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निकालना, प्रसारित करना, उससे कमाई करना, पोस्ट करना, री-पोस्ट करना, अपलोड करना, ट्रांसमिट करना, संशोधित करना, स्टोर करना या होस्ट करना प्रतिबंधित रहेगा।
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क्या मीडिया की कोर्ट रिपोर्टिंग पर भी असर पड़ेगा?
सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का प्रभाव मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा कि इस आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार आउटलेट्स द्वारा कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 
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किन-किन पक्षों को बनाया गया मामले का पक्षकार?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट के साथ-साथ प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों और प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्मों को भी मामले में पक्षकार बनाया। अदालत ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी हाई कोर्ट और सोशल मीडिया मध्यस्थों जिनमें लिंक्डइन, मेटा प्लेटफॉर्म्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, गूगल, एक्स कॉर्प और यूट्यूब शामिल हैं को नोटिस जारी किया।

केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिए गए हैं?
केंद्र सरकार को शीर्ष अदालत के समक्ष उन नोडल मंत्रालयों की पहचान करते हुए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जो याचिका में मांगी गई राहतों को लागू करेंगे। आदेश में कहा गया, 'भारत संघ को निर्देश दिया जाता है कि वह इस रिट याचिका में की गई मांगों को लागू करने के लिए नोडल मंत्रालयों के संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत करे।'

हाई कोर्ट से किस बात की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है?
सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत द्वारा जारी कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से जुड़े मॉडल नियमों को अपनाने के संबंध में सभी हाई कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि सभी हाई कोर्ट यह बताएं कि उन्होंने इन मॉडल नियमों को अपनाने की दिशा में क्या प्रगति की है। साथ ही अपनी रिपोर्ट में लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग के प्रभाव तथा उसकी व्यावहारिकता का भी उल्लेख करें।


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आदेश को सार्वजनिक करने के लिए क्या कहा गया है?
पीठ ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल इस आदेश को आम जनता की जानकारी के लिए अपनी-अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करें। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की है।

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