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PMLA: विशेष कोर्ट से मेहुल चोकसी को बड़ा झटका, भगोड़ा घोषित करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज
Fri, 13 Dec 2024 11:17 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 13 Dec 2024 11:17 PM IST
सार
मेहुल चोकसी को एफईओ घोषित करने की मांग करने वाली अर्जी में ईडी ने दावा किया कि वह जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में संदिग्ध परिस्थितियों में देश छोड़कर चला गया था। लेकिन बाद में दायर जवाबी हलफनामे में उसने दावा किया कि आरोपी को यह अनुमान था कि धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो जाएगा और इसलिए उसने देश से भागने से पहले अपनी संपत्ति बेचने की कोशिश की।
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मेहुल चोकसी
- फोटो : ANI
विस्तार
मुंबई की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से करोड़ों डॉलर के पीएनबी घोटाले में उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए जारी किए गए नोटिस के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
अदालती आदेश 'गलत तथ्यों' पर नहीं था आधारित
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामलों के विशेष न्यायाधीश एसएम मेंजोगे ने कहा कि नोटिस जारी करने वाला अदालती आदेश 'गलत तथ्यों या गलत धारणाओं' पर आधारित नहीं था। मेहुल चोकसी और उसका भतीजा नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में कथित धोखाधड़ी में मुख्य आरोपी हैं, जो 2018 में सामने आई थी।
मेहुल चोकसी ने अपनी याचिका में क्या किया दावा
मेहुल चोकसी ने अधिवक्ता विजय अग्रवाल और राहुल अग्रवाल के माध्यम से दायर अपनी याचिका में दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी उन सबूतों और आधारों के बारे में अपनी दलीलें बदलती रही, जिनके आधार पर वह उसे एफईओ घोषित करना चाहती है। वकीलों ने ईडी की कई दलीलों और जवाबों का हवाला देते हुए अपनी 'विरोधाभासी' दलीलें पेश कीं। इस साल सितंबर में दाखिल अनुपालन रिपोर्ट में, अदालत के निर्देशानुसार, ईडी ने एंटीगुआ और बारबुडा के लिए वीजा के लिए आवेदन करने को भारत छोड़ने और कैरेबियाई राष्ट्र की नागरिकता प्राप्त करने की योजना के रूप में जोड़ा, चोकसी की याचिका में कहा गया है। वकील विजय अग्रवाल ने तर्क दिया कि मेहुल चोकसी ने जनवरी 2018 में चिकित्सा उपचार के लिए भारत छोड़ा था और उस वर्ष फरवरी में अपराध दर्ज किया गया था।
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चूंकि पासपोर्ट प्राधिकरण की तरफ से उसका भारतीय पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया था, इसलिए वह जांच में भाग लेने के लिए भारत नहीं लौट सका। वकील ने तर्क दिया कि उसे एफईओ घोषित करने के लिए ईडी आवेदन में उल्लिखित आधार बदली हुई परिस्थितियों में मौजूद नहीं हैं, इसलिए नोटिस वापस लिया जाना चाहिए।
भारत वापस आ सकता है मेहुल चोकसी- ईडी
विशेष लोक अभियोजक हितेन वेनेगांवकर और कविता पाटिल की तरफ से प्रतिनिधित्व किए गए ईडी ने तर्क दिया कि सभी प्रासंगिक दस्तावेज रिकॉर्ड में हैं और उसके रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ईडी ने कहा कि मेहुल चोकसी को नोटिस मिल गया है और वह सक्षम अधिकारियों से यात्रा दस्तावेज प्राप्त करके भारत वापस आ सकता है। जांच एजेंसी ने बताया कि उसने आज तक अपने भारतीय पासपोर्ट के निलंबन के आदेश को भी चुनौती नहीं दी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों के अवलोकन के बाद उन्हें ईडी के रुख में कोई बदलाव नहीं मिला।
किसे घोषित किया जा सकता है FEO?
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत, यदि कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ आर्थिक अपराध के संबंध में वारंट जारी किया गया है, आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़ देता है, तो उसे एफईओ घोषित किया जा सकता है। मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी को ईडी और सीबीआई की तरफ से कुछ बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके पीएनबी को 13,400 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में वांछित किया गया है। नीरव मोदी को पहले ही अदालत की तरफ से एफईओ घोषित किया जा चुका है और वह 2019 से लंदन की जेल में बंद है।
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अदालती आदेश 'गलत तथ्यों' पर नहीं था आधारित
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामलों के विशेष न्यायाधीश एसएम मेंजोगे ने कहा कि नोटिस जारी करने वाला अदालती आदेश 'गलत तथ्यों या गलत धारणाओं' पर आधारित नहीं था। मेहुल चोकसी और उसका भतीजा नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में कथित धोखाधड़ी में मुख्य आरोपी हैं, जो 2018 में सामने आई थी।
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मेहुल चोकसी ने अपनी याचिका में क्या किया दावा
मेहुल चोकसी ने अधिवक्ता विजय अग्रवाल और राहुल अग्रवाल के माध्यम से दायर अपनी याचिका में दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी उन सबूतों और आधारों के बारे में अपनी दलीलें बदलती रही, जिनके आधार पर वह उसे एफईओ घोषित करना चाहती है। वकीलों ने ईडी की कई दलीलों और जवाबों का हवाला देते हुए अपनी 'विरोधाभासी' दलीलें पेश कीं। इस साल सितंबर में दाखिल अनुपालन रिपोर्ट में, अदालत के निर्देशानुसार, ईडी ने एंटीगुआ और बारबुडा के लिए वीजा के लिए आवेदन करने को भारत छोड़ने और कैरेबियाई राष्ट्र की नागरिकता प्राप्त करने की योजना के रूप में जोड़ा, चोकसी की याचिका में कहा गया है। वकील विजय अग्रवाल ने तर्क दिया कि मेहुल चोकसी ने जनवरी 2018 में चिकित्सा उपचार के लिए भारत छोड़ा था और उस वर्ष फरवरी में अपराध दर्ज किया गया था।
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चूंकि पासपोर्ट प्राधिकरण की तरफ से उसका भारतीय पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया था, इसलिए वह जांच में भाग लेने के लिए भारत नहीं लौट सका। वकील ने तर्क दिया कि उसे एफईओ घोषित करने के लिए ईडी आवेदन में उल्लिखित आधार बदली हुई परिस्थितियों में मौजूद नहीं हैं, इसलिए नोटिस वापस लिया जाना चाहिए।
भारत वापस आ सकता है मेहुल चोकसी- ईडी
विशेष लोक अभियोजक हितेन वेनेगांवकर और कविता पाटिल की तरफ से प्रतिनिधित्व किए गए ईडी ने तर्क दिया कि सभी प्रासंगिक दस्तावेज रिकॉर्ड में हैं और उसके रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ईडी ने कहा कि मेहुल चोकसी को नोटिस मिल गया है और वह सक्षम अधिकारियों से यात्रा दस्तावेज प्राप्त करके भारत वापस आ सकता है। जांच एजेंसी ने बताया कि उसने आज तक अपने भारतीय पासपोर्ट के निलंबन के आदेश को भी चुनौती नहीं दी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों के अवलोकन के बाद उन्हें ईडी के रुख में कोई बदलाव नहीं मिला।
किसे घोषित किया जा सकता है FEO?
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत, यदि कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ आर्थिक अपराध के संबंध में वारंट जारी किया गया है, आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़ देता है, तो उसे एफईओ घोषित किया जा सकता है। मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी को ईडी और सीबीआई की तरफ से कुछ बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके पीएनबी को 13,400 करोड़ रुपये का चूना लगाने के आरोप में वांछित किया गया है। नीरव मोदी को पहले ही अदालत की तरफ से एफईओ घोषित किया जा चुका है और वह 2019 से लंदन की जेल में बंद है।