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Court: MBBS की छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में प्रेमी दोषी करार, पांच साल के कारावास की सजा

Mon, 28 Aug 2023 06:21 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 28 Aug 2023 06:21 PM IST
सार

Court: पुडुचेरी की एक अदालत ने एमबीबीएस की छात्रा प्रियदर्शिनी की आत्महत्या के मामले में एक स्थानीय निवासी एस प्रदीप को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

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Court convicts man for abetment to suicide of MBBS student in 2012
Court Order - फोटो : Social Media

विस्तार

पुडुचेरी की एक अदालत ने एमबीबीएस की छात्रा प्रियदर्शिनी की आत्महत्या के मामले में एक स्थानीय निवासी एस प्रदीप को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वह मेडिकल की चतुर्थ वर्ष की छात्रा से रिलेशनशिप में था। अधिकारियों ने सोमवार को यहां यह जानकारी दी। 

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उन्होंने बताया कि प्रियदर्शिनी की मां की याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया था। छात्रा ने 16 मई 2012 की रात को छात्रावास के अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को पता चला कि प्रियदर्शिनी प्रदीप से प्यार करती थी, जिसने प्रदीप से दूरी बनाना शुरू कर दिया था, जिससे उनके बीच मतभेद पैदा हो गए थे। 

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सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, 'यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने पीड़िता को एक एसएमएस भेजा था, जिसमें उसके चरित्र पर आक्षेप लगाया गया था, जो उसे अंदर से तोड़ने वाला बिंदु साबित हुआ और उसने 16 मई, 2012 की देर शाम या रात को अपने छात्रावास के कमरे में छत के पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।'

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उन्होंने कहा कि चेन्नई के फोरेंसिक विज्ञान विभाग (एफएसडी) ने प्रियदर्शिनी के मोबाइल फोन से एसएमएस बरामद किया था, जिसके बाद सीबीआई ने प्रदीप के खिलाफ 24 नवंबर, 2017 को आरोप-पत्र दायर किया था। छह साल की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने प्रदीप को दोषी करार दिया है।
 

सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप वाले मामलों में दोषसिद्धि प्राप्त करना मुश्किल है क्योंकि एक अकाट्य और मजबूत संबंध होना चाहिए कि एक विशेष कार्रवाई ने पीड़ित को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया। जैसा कि एक पत्र या लिखित शब्द जिसमें पीड़ित को अपनी जान लेने के लिए कहा गया हो। मैं कहूंगा कि यह उन कुछ मामलों में से एक है जहां अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया है।

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