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Crypto Currencies: क्रिप्टो करेंसी पर कानून के विरोध में अर्जी SC ने की खारिज,  कहा- यह किस तरह की याचिका है?

Fri, 09 Sep 2022 09:25 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 09 Sep 2022 09:25 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सर्कुलर केवल सलाह देता है और सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है।

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Court cannot stop govt from bringing law in Parliament on crypto currencies: SC
क्रिप्टो करेंसी (सांकेतिक) - फोटो : istock

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह सरकार को क्रिप्टो मुद्राओं पर संसद में एक कानून लाने से नहीं रोक सकता और आभासी मुद्राओं पर केंद्र को सिफारिशें करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति के गठन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। क्रिप्टो मुद्राएं डिजिटल या आभासी मुद्राएं हैं। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने एक निजी फर्म द्वारा दायर जनहित याचिका को गलत करार दिया और इसे खारिज कर दिया।

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अदालत ने कहा, यह किस तरह की याचिका है? सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समिति बनाई है, तो आपने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की? आप प्रस्तावित कानून को चुनौती देना चाहते हैं। आप आरटीआई से जवाब नहीं ले रहे हैं। फर्म की ओर से पेश वकील प्रभात कुमार ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में घोषणा की थी कि क्रिप्टो मुद्राएं कानूनी निविदा नहीं हैं और न ही वे सुरक्षित हैं और अब सरकार कह रही है कि वे एक कानून बनाएंगे। 
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पीठ ने कहा कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सर्कुलर केवल सलाह देता है और सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लागू करते हुए याचिकाकर्ता वित्त मंत्रालय, आर्थिक मामलों के विभाग में भारत सरकार के 2 सितंबर 2021 के एक पत्र को चुनौती देना चाहता है।  
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क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल मुद्रा होती है जिसमें एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल इसकी इकाइयों के सृजन के लिए किया जाता है। यह केंद्रीय बैंक की निगरानी से परे फंड का अंतरण करता है। न्यायालय ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी के बारे में सरकार की कानून लाने की तैयारी एक संवैधानिक मामला है और इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से जारी परिपत्र बाध्यकारी नहीं है।
 

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