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सुप्रीम कोर्ट से कार्ति को ब्रिटेन-फ्रांस जाने की इजाजत, निर्भया मामले पर भी महत्वपूर्ण आदेश

पीटीआई, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Feb 2020 06:50 PM IST
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कार्ति चिदंबरम (फाइल फोटो)
कार्ति चिदंबरम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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सार

उच्चतम न्यायालय ने आपराधिक मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई की जांच का सामना कर रहे कार्ति चिदंबरम को टेनिस टूर्नामेन्ट में शामिल होने के लिये इस महीने ब्रिटेन और फ्रांस जाने की शुक्रवार को इजाजत दे दी। वहीं निर्भया मामले पर भी सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

विस्तार

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कार्ति को 14 से 28 फरवरी तक विदेश यात्रा की इजाजत दी, जिसके लिए पहले लगाई शर्तों का अनुपालन करना होगा। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को शीर्ष न्यायालय के महासचिव के पास 10 करोड़ रुपये जमा करने के बाद विदेश यात्रा की इजाजत दी थी।

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न्यायालय ने उन्हें एक शपथपत्र भी देने का निर्देश दिया था, जिसमें यह वादा किया गया हो कि वह लौटेंगे और जांच में सहयोग करेंगे। कार्ति जिन मामलों का सामना कर रहे हैं, उनमें एक मामला उनके पिता के केंद्रीय वित्त मंत्री रहने के दौरान 305 करोड़ रुपये के विदेशी कोष प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मिली मंजूरी से संबद्ध है।

निर्भया मामले पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख

वहीं निर्भया मामले पर भी सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने शुक्रवार को साफ किया कि ट्रायल कोर्ट निर्भया के दोषियों के नए डेथ वारंट जारी कर सकता है। पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को मेरिट के आधार पर सुनवाई करने के लिए कहा है और स्पष्ट किया कि दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की मांग वाली केंद्र व दिल्ली सरकार की लंबित याचिका ट्रायल कोर्ट के डेथ वारंट जारी करने की राह में बाधा नहीं बनेगी। पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख 20 फरवरी मुकर्रर की है।

जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने केंद्र की अर्जी पर सुनवाई 17 फरवरी तक टाल दी। पीठ ने कहा जब ट्रायल कोर्ट इस मामले पर 17 को सुनवाई करेगा, तो बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट उसके फैसले का इंतजार करे। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए 20 फरवरी को सूचीबद्ध किया गया है। 

पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत के समक्ष दोषियों की कोई याचिका लंबित नहीं है और तीन गुनहगारों की दया याचिका भी राष्ट्रपति की ओर से खारिज हो चुकी है। वहीं, चौथे दोषी पवन ने अभी तक कोई याचिका नहीं दी है। ऐसे में निचली अदालत फांसी की नई तारीख जारी कर सकती है।

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