फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   couple has sold all their jewellery to set up oxygen generation plant for soldiers in siachen

सियाचिन में जवानों के लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए इस दंपत्ति ने बेच दी अपनी ज्वेलरी

Fri, 27 Apr 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Updated Fri, 27 Apr 2018 09:43 AM IST
विज्ञापन
couple has sold all their jewellery to set up oxygen generation plant for soldiers in siachen
- फोटो : ANI

आज अगर हम अपने घरों में महफूज हैं तो सिर्फ सैनिकों की वजह से। दुनिया के सबसे ऊंचे जंग के मैदान सियाचीन की बात करें तो वहां ऑक्सीजन की इतनी कमी है कि कई बार सोते हुए भी सैनिकों की जान चली जाती है। वहां ठंड में तापमान शून्य से 55 डिग्री नीचे पहुंच जाता है। बेस कैंप से भारत की चौकी तक सैनिक कमर में रस्सी बांधकर चलते हैं कि अगर कोई बर्फ में धंस जाए तो उसे बचाया जा सके। 20-22 दिनों तक सैनिकों को ऐसे ही चलना पड़ता है। यहां के रास्ते कई हिस्सों में बंटे होते हैं। यहां की सबसे बड़ी परेशानी है ऑक्सीजन की कमी। ऐसे में आम लोगों का भी कर्तव्य बनता है कि वह उनके लिए कुछ करें।

विज्ञापन


महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले दंपत्ति ने सियाचीन में रहने वाले जवानों की इस परेशानी को देखते हुए एक फैसला लिया है। दंपत्ति ने ऑक्सीजन जेनेरेशन प्लांट लगाने के लिए अपनी सारी ज्वेलरी बेच दी है। उनका कहना है कि वहां ऑक्सीजन का लेवल बहुत कम है जिस कारण वहां ऑक्सीजन प्लांट बहुत आवश्यक है। उनका कहना है कि यह उनका कर्तव्य बनता है कि वह जवानों के लिए कुछ करें। इसलिए उन्होंने वहां बनने वाले ऑक्सीजन प्लांट में कुछ राशि दान करने का विचार किया है।
विज्ञापन

   

सुमिधा और योगेश चिताडे के मुताबिक उन्होंने अपनी ज्वेलरी बेचकर करीब 1 लाख 25 हजार रुपये जुटाए हैं। 1.10 करोड़ की लागत से बनने वाले ऑक्सीजन प्लांट में वह भी कुछ योगदान करना चाहते थे। सुमिधा का कहना है कि वह सेना के कल्याण के लिए 1999 से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब वह सियाचीन बेस कैंप में थीं तो उन्हें पता चला कि वहां का मौसम बेहद कठोर है। गर्मियों में तापमान शून्य से 35 डिग्री नीचे होता है और सर्दियों में शून्य से 55 डिग्री नीचे पहुंच जाता है। 

वहीं योगेश जो कि सेना से समयपूर्व रिटायर हो चुके हैं। उनका कहना है कि चंडीगढ़ से ऑक्सीजन सिलेंडर्स को 22,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचाया जाता है। कभी-कभी कोई हेलीकॉप्टर भी नहीं होता है जो वहां तक सिलेंडर पहुंचा सके। लेकिन अगर वहां प्लांट लग जाता है तो परिवहन लागत भी बचेगी और सैनिकों की मदद भी हो पाएगी। 


बता दें कि पावर प्लांट की सहायता से ऑक्सीजन सिलेंडर्स को भरा जाता है जिसका लाभ करीब 9,000 सैनिकों को मिलता है। दंपत्ति ने अपना एक चेरिटेबल ट्रस्ट भी शुरू किया है जिसे पुणे के चेरिटेबल कमीश्नर द्वारा रजिस्टर्ड किया गया है। वहां इनके अलावा 5 अन्य ट्रस्टी भी हैं जो खुद भी कुछ पैसे योगदान करना चाहते हैं।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed