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इन 49 सिफारिशों पर चलता है देश का पुलिस सिस्टम, मूशाहारी समिति ने 120 दिन में सौंपी थी अपनी रिपोर्ट

Mon, 21 Sep 2020 12:24 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Sep 2020 12:24 PM IST
सार

पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1970), रिबेरो समिति (1998), पद्मनाभैया समिति (2000) और आपराधिक न्याय पर मलिमथ समिति (2002) गठित की थी...

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country police system runs on these 49 recommendations, Mushahari Committee submitted its report in 120 days
police force - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

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देश में पुलिस सुधारों के लिए गठित आरएस मूशाहारी समीक्षा समिति ने 120 दिन में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी। मूशाहारी समिति की 49 सिफारिशों में से अधिकांश सिफारिशें राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन ने लागू कर दी हैं। राज्य सुरक्षा आयोग, केंद्रीय पुलिस संगठन के लिए आईपीएस कैडर, पुलिस की आंतरिक सुरक्षा संबंधी भूमिका और पुलिस सेवा में सीधी भर्ती का स्तर जैसी सिफारिशें ड्रॉप कर दी गई थीं। यानी इनके लिए कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं समझी गई।


गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री जी.किशन रेड्डी के अनुसार, 'पुलिस' भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-2 (राज्य सूची) के अंतर्गत एक राज्य का विषय है। यह मुख्य रूप से राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासनों की जिम्मेदारी है कि वह पुलिस बल की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए। संसद के मौजूदा सत्र में लोकसभा सदस्य दीपक बैज के पूछे गए सवाल कि क्या कुछ वर्षों के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच में मिली-भगत के अनेक मामले उजागर हुए हैं। इसका जवाब देते हुए रेड्डी ने कहा, समाज के कुछ वर्गों अथवा अपराधियों और पुलिस के बीच किसी विशेष मिली-भगत का पता उपयुक्त न्यायालयों के निर्णयों और राज्य की एजेंसियों की तरफ से हुई जांच में ऐसा लगता है।

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2006 में बना था आदर्श पुलिस अधिनियम

पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आदर्श पुलिस अधिनियम 2006 में पुलिस जवाबदेही आयोग व जिला जवाबदेही प्राधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त पुलिस सुधारों के संबंध में प्रकाश सिंह मामले में भारत के उच्चतम न्यायालय का एक निर्देश पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों को देखते हुए राज्य एवं जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरणों का गठन करने के लिए था। ये दिशा निर्देश कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को भेजे गए थे। पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग (1970), रिबेरो समिति (1998), पद्मनाभैया समिति (2000) और आपराधिक न्याय पर मलिमथ समिति (2002) गठित की थी।

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दिसंबर 2004 में गठित हुई थी आरएस मूशाहारी समिति...

सरकार ने पुलिस सुधारों पर पिछले आयोगों और समितियों की सिफारिशों की समीक्षा करने के लिए आरएस मूशाहारी की अध्यक्षता में दिसंबर 2004 में एक समीक्षा समिति गठित की थी। मार्च 2005 में पेश रिपोर्ट में पुलिस सुधार के लिए 49 सिफारिशों का जिक्र किया गया था। विभिन्न समितियों द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार, पुलिस सुधारों के कार्यान्वयन को प्रोत्साहन देने के लिए प्रारंभ में योजना के कुल वार्षिक अनुदान का दस फीसदी रखने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2019-20 से इस प्रोत्साहन घटक को कुल आवंटन के बीस फीसदी तक बढ़ा दिया गया है।

ये हैं मूशाहारी समिति द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशें

सिपाहियों और एसआई की भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा का निर्धारण, राज्य पुलिस भर्ती बोर्डों की स्थापना, सिपाहियों के लिए वेतनमान और काम के घंटों के साथ पदोन्नति की संभावना, सभी स्तरों पर पुलिस कर्मियों का प्रशिक्षण, पदोन्नति को प्रशिक्षण से जोड़ना, प्रशिक्षण और तैनाती के बीच सह संबंध, पुलिस आवास, पुलिस बल में पूर्ण राशन, पुलिस आयुक्त प्रणाली, पुलिस प्रमुख के चयन का तरीका और कार्यकाल, पुलिस स्थापना बोर्ड, पुलिस महानिरीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को पर्याप्त वित्तीय शक्तियां, पुलिस बलों का आधुनिकीकरण, पुलिस प्रशिक्षण सुविधाओं का उन्नयन, फोरेंसिक विज्ञान अवसंरचना में सुधार, केंद्रीय संगठन के लिए सामान्य केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान कैडर, पुलिस स्टेशनों का कंप्यूटरीकरण, पुलिस थानों का पुनर्गठन, पुलिस स्टेशन में मूलभूत सुविधाएं, कुछ पुलिस कर्तव्यों की आउटसोर्सिंग, भ्रष्ट पुलिस कर्मियों को हटाना, जनता के प्रति पुलिस की जवाबदेही, पुलिस शिकायत बोर्ड, गिरफ्तारियों की संख्या में कमी, नया पुलिस अधिनियम, अभियोजन निदेशालय, पुलिस को कानूनी सलाह, साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 व 26 के तहत स्वीकारोक्ति, संघीय अपराध, संगठित अपराध, आर्थिक अपराधों से निपटना, गैर संज्ञेय और संज्ञेय अपराधों के बीच अंतर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 और 162 में संशोधन और कैदियों की पहचान अधिनियम में संशोधन, मूशाहारी समिति द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशों का हिस्सा है।

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