निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: फिर भी क्यों बढ़ रही बेरोजगारी? सरकार के सामने खड़ी हो सकती है बड़ी मुश्किल
ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि उत्पादन और नौकरियों के अवसरों में बढ़ते मिस-मैच को उत्पादन तकनीकी में आ रहे बदलाव से समझा जा सकता है। पिछले समय के मुकाबले अब उत्पादन में लगातार मशीनीकरण, डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग बढ़ रहा है...
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उत्पादन को सीधे तौर पर नौकरियों के अवसर से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि उत्पादन और सेवाओं में जितना ज्यादा बढ़ोतरी होगी, रोजगार के अवसरों में भी उतनी ही ज्यादा वृद्धि होगी। लेकिन इस समय जबकि देश में उत्पादन में तेज वृद्धि हुई है और निर्यात 400 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, इसके बाद भी बेरोजगारी स्तर में वृद्धि चिंता पैदा करने वाली है। रिकॉर्ड निर्यात के इस दौर में भी देश में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 7.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है। शहरों में बेरोजगारी दर 8.1 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 7.2 फीसदी तक पहुंच चुकी है। आने वाले समय में सरकार के लिए यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है।
इस संदर्भ में चिंताजनक पहलू यह है कि जिन शहरी क्षेत्रों को औद्योगिक उत्पादन ज्यादा होता है, उन राज्यों में भी बेरोजगारी दर काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। जैसे देश की राजधानी दिल्ली (सेवाओं और उत्पादन को मिलाकर) कुल उत्पादन के मामले में अहम स्थान रखती है, लेकिन यहां बेरोजगारी दर 9.3 फीसदी के चिंताजनक स्तर पर बनी हुई है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत के औद्योगिक केंद्रों वाले हरियाणा में बेरोजगारी दर 31 फीसदी पर दर्ज की गई है। पर्यटन और खनन क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान रखने वाले गोवा में बेरोजगारी दर 12 फीसदी है।
इसी प्रकार, लुधियाना-अमृतसर के औद्योगिक उत्पादन और कृषि उपज के लिए प्रसिद्ध पंजाब में बेरोजगारी दर 9.0 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। महाराष्ट्र के विभिन्न इलाके उत्पादन के मामले में पूरे देश में सबसे ऊंचा स्थान रखते हैं, लेकिन वहां भी बेरोजगारी दर 4.3 फीसदी है।
ज्यादा ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में, जहां कृषि बड़ी आबादी के रोजगार का साधन होती है, उन राज्यों में बेरोजगारी कम दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर केवल 2.7 फीसदी, मध्यप्रदेश में 2.7 फीसदी, उत्तराखंड में 4.6 फीसदी, ओडिशा में 1.0 फीसदी और कर्नाटक में 2.0 फीसदी दर्ज की गई है।
क्यों है यह मिस-मैच?
ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि उत्पादन और नौकरियों के अवसरों में बढ़ते मिस-मैच को उत्पादन तकनीकी में आ रहे बदलाव से समझा जा सकता है। पिछले समय के मुकाबले अब उत्पादन में लगातार मशीनीकरण, डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग बढ़ रहा है। एक उदाहरण के लिए, पहले किसी एक कंपनी में 100 कर्मचारी मिलकर जितना उत्पादन करते थे, अब उसी कंपनी में दस मशीनें 1000 कर्मचारियों के बराबर उत्पादन कर रही हैं। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी तो दिखाई पड़ती है, लेकिन इसी के साथ नौकरियों के अवसरों में वृद्धि नहीं होती।
कर्मचारियों की भागीदारी या तो पहले के स्तर पर बनी हुई है, बढ़ती आबादी के अनुसार नहीं बढ़ रही है या लगातार कम हो रही है। बड़े औद्योगिक संस्थानों में श्रमबल लगातार कम किया जा रहा है, जबकि उनका स्थान मशीनें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी पर काम करने वाले रोबोट और कंप्यूटर आधारित मशीनें ले रही हैं। यही कारण है कि ज्यादा उत्पादन दिखने के बाद भी बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी दिखाई पड़ रही है।
उत्पादन और बेरोजगारी के इस मिस मैच को उत्पादन केंद्रों और आबादी के अनुपात में भी समझा जा सकता है। जिन क्षेत्रों में उत्पादन हो रहा है, वहां रोजगार के लिए पहुंचने वाली आबादी की संख्या भी बहुत ज्यादा है, लिहाजा वहां अच्छे उत्पादन के बाद भी बेरोजगारी दर ज्यादा दिखाई पड़ती है।
सरकार को क्या करना चाहिए
आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार को लगातार मूलभूत ढांचे में निवेश बढ़ाना चाहिए। मूलभूत ढांचे में निवेश से सबसे ज्यादा नौकरियों का सृजन होता है। सरकार को रोजगार के नए अवसरों को सृजित करने पर भी ध्यान देना चाहिए। प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देने से भी अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरियों के अवसरों में बढ़ोतरी होती है।
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि इस समय उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है और आने वाले समय में इसका लाभ ज्यादा नौकरियों के रूप में सामने आएगा। कभी-कभी तकनीकी के ट्रांजिशन फेज में तकनीकी के प्रयोग से नौकरियों के अवसरों में कमी दिखाई पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद वही क्षेत्र ज्यादा नौकरियों का उत्पादन करने लगता है। कृषि क्षेत्र में उपकरणों के उपयोग के बाद भी लगातार रोजगार के अवसर बनना या कंप्यूटरीकरण के बाद भी अवसरों में वृद्धि होना इसी का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि कुछ नुकसान होने के बाद भी तकनीक को आने से रोका नहीं जा सकता। तकनीक को रोकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादों को गुणवत्ता और मूल्यों के मामले में पिछड़ने का खतरा बना रहता है, लिहाजा उत्पादन और सेवाओं में तकनीकी और इसे रोका भी नहीं जाना चाहिए।