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भ्रष्ट अफसरों पर और नकेल कसेगी सरकार, सबूत मिलने पर होगी कार्रवाई
Thu, 11 Jul 2019 05:21 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Thu, 11 Jul 2019 05:21 AM IST
सार
- लोकसभा में कार्मिक राज्य मंत्री ने दी जानकारी
- केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया
- 312 कर्मचारियों को जनहित में दे दी सेवानिवृत्ति
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Jitendra Singh
विस्तार
अफसर और कर्मचारी अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं और उनके खिलाफ सबूत मिलते हैं तो सरकार ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगी। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सरकार के पास ऐसे भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
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उन्होंने बताया कि निष्ठा के अभाव और अक्षमता के आधार पर सरकार ऐसे भ्रष्ट सरकारी कर्मियों को समय से पहले ही सेवानिवृत्त कर सकती है। वह द्रमुक सांसद ए राजा के सवाल का जवाब दे रहे थे। जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि जुलाई 2014 से लेकर मई 2019 तक ग्रुप एक कुल 36,756 और ग्रुप बी के 82,654 अफसरों के कामकाज की समीक्षा की गई।
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बीते माह ही सरकार ने 15 वरिष्ठ कस्टम अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से जबरन सेवानिवृत्त कर दिया था, इनमें से एक प्रधान आयुक्त और चार आयुक्त थे। इसके अलावा 12 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप और यौन शोषण के आरोपों में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।
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उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 400 से ज्यादा भ्रष्ट कर्मचारियों को दंडित करने की चेतावनी दी थी और करीब 200 कर्मचारियों को पहले ही सेवानिवृत्त करने का फैसला लिया था।
312 भ्रष्ट और अक्षम कर्मियों को सेवानिवृत्ति
केंद्र सरकार ने अक्षम और भ्रष्टाचार में लिप्त रहे 312 कर्मचारियों को जनहित में सेवानिवृत्ति दे दी। लोकसभा में बुधवार को कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह एक लिखित जवाब में बताया कि एफआर 56 (जे) के प्रावधानों के तहत ग्रुप ए के 125 और ग्रुप बी के 187 अफसरों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।