कोरोना वायरस : विशेषज्ञ बोले- न वायरस में बदलाव हो रहा, न नए स्ट्रेन से फैल रहा संक्रमण, जानें तो फिर क्या है वजह...
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विस्तार
देश में अचानक से बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामले में फिलहाल एक बात स्पष्ट है कि अभी अपने यहां न कोरोना वायरस में बदलाव हो रहा है ना नए विदेशी स्ट्रेन का संक्रमण फैल रहा है। देश में अब तक महज कोरोना के नए स्ट्रेन के 300 मामले आए हैं। इतने कम मामलों के आधार पर यह कहना मुश्किल है कि देश में इस वक्त जो कोरोना की लहर है, वह नए स्ट्रेन की वजह से है। इसलिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। देश में लापरवाही की वजह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। यह कहना है सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी हैदराबाद के प्रमुख डॉक्टर राकेश मिश्रा का। यह संस्थान कोरोना वायरस के म्यूटेशन पर नजर रखने से लेकर सीरो सर्वे समेत वायरस स्क्रीनिंग पर काम करता है। अमर उजाला डॉट कॉम से डॉ. राकेश मिश्रा ने आज के हालातों पर बातचीत की। यहां पढ़े कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों पर राकेश मिश्रा का क्या कहना है...
सवाल: देश में अचानक कोरोना संक्रमण बढ़ने लगे। अपने यहां साउथ अफ्रीका, यूके, ब्राजील के स्ट्रेन को देखा गया है। क्या मामले बढ़ने की वजह ये नए स्ट्रेन हैं?
जवाब : नहीं। अभी जो कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, उसमें अधिकांश में संक्रमण का स्रोत भारत के बाहर का नहीं है। हमने हाल ही में कोरोना पॉजिटिव कुछ मरीजों के सैंपल की जांच की, लेकिन किसी भी मरीज में नया वैरिएंट नहीं मिला। इसका मतलब है कि जो केस बढ़े है, वे नए स्ट्रेन की वजह से नहीं हैं और देश में नए स्ट्रेन का संक्रमण नहीं बढ़ा है। इसलिए, फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। कोरोना के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि लोगों ने सुरक्षा मानकों का पालन करना बंद कर दिया है, लोग लापरवाह हो गए हैं और उन्होंने कोरोना से बचने वाला प्रोटोकॉल बंद कर दिया है।
सवाल : देश में कुछ राज्यों खासकर महाराष्ट्र में लगातार कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है इसकी क्या वजह हो सकती है?
जवाब: कोरोना के मामलों में दोबारा बढ़ने की सही वजह का अभी तक हम पता नहीं लगा पाए हैं। इसकी कई वजहें हो सकती हैं, पहले इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि देश के बाहर से आए नए वैरिएंट की वजह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें ऐसे कोई संकेत नहीं मिले। देशभर में अभी नए वैरिएंट के केवल 300 मामले देखे गए हैं, इतने कम केस के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। नए वैरिएंट के प्रभाव को जानने के लिए हमें एक बड़े जनसमूह में लंबे समय तक अध्ययन करना होगा, लेकिन अभी जो संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं, उसमें वायरस में किसी तरह का बदलाव या नए वायरस जैसी समानता नहीं देखी गई है, लेकिन क्योंकि लोग अभी कोरोना अनुरूपी व्यवहार का पालन नहीं कर रहे हैं, इसलिए यह मुमकिन है कि मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाएं और इससे चेन रिएक्शन भी हो सकता है जिससे तेजी से कोरोना केस बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवाल: पिछले साल भी इन दिनों ही कोरोना के मामले में बढ़ोतरी हुई थी, इस बार भी हालात कुछ वैसे ही बन रहे हैं, क्या यह तीसरी लहर है?
जवाब: नई लहर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भारत में गर्मियों के दिन काफी कठिन होते हैं। लोग दोपहर में घरों में कैद रहते हैं, एसी और कूलर चलाना जरूरी हो जाता है और अमूमन सभी शाम को टहलने के लिए घर से बाहर निकलते हैं। यह व्यवहार कोरोना के मामले बढ़ने की एक बड़ी वजह हो सकता है। हम नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं।
सवाल: अब तो वैक्सीन है हमारे पास। कारगर भी है, तो हमें क्या कोरोना से डरने की जरूरत है?
जवाब: डरने की नहीं, लेकिन बहुत सजग रहने की जरूरत है। कोरोना से बचाव की सभी गाइडलाइन्स का पालन बेहद जरूरी है। हमारे पास वैक्सीन का हथियार है, लेकिन वैक्सीन आने के बाद लोग संक्रमण के प्रति गंभीर नहीं है। संक्रमण के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए हमारे पास वैक्सीन है और टीकाकरण कार्यक्रम सफलता पूर्वक संचालित किया जा रहा है। अब हमने टीकाकरण कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के क्लीनिक और अस्पतालों को भी शामिल कर लिया है, इसलिए संभव है कि अब एक समय में हम अधिम मात्रा में लोगों को कोरोना का वैक्सीन दे पाएगें और इस तरह हम कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ पाएगें।
सवाल: आप वायरस पर किस तरह नजर रखते हैं?
जवाब: कई तरीकों से हम वायरस की निगरानी करते हैं। क्षेत्रीय स्तर पर वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए हमने एक आसान तरीका निकाला है, इसके लिए वायरस के आरएनए की पहचान एक बड़ी आबादी के लोगों के मल के नमूनों से की जाती है, इसमें वायरस मॉलिक्यूल के कल्चर (बढ़ोतरी) की जांच की जाती है। इस तरह की स्क्रीनिंग से हम यह पता लगाते है कि किस इलाके की आबादी में वायरस संक्रमण का कितना प्रकोप है। यह वायरस को ट्रैक करने का अब तक का सबसे आसान तरीका है। समूह के बीच संक्रमण का पता लगाने के लिए हाल ही में हमने सीरो सर्वेक्षण भी करना शुरू किया है, जिसमें जनसंख्या के आधार पर संक्रमण के स्तर का पता लगाया जा सकता है। इन दोनों ही तकनीक का प्रयोग हम अन्य तरह के पायथोजन संक्रमण का पता लगाने के लिए भी कर सकते हैं।
सवाल: कोरोना संक्रमण का प्रभाव लोगों में अलग-अलग देखने को मिलते हैं, कोई खास वजह?
जवाब: कोरोना संक्रमण के इस पहलू को सबसे कम समझा गया है। हमने अधिकांश समय बीमारी से लड़ने और इसको नियंत्रित करने में ही दिया किया है। अब हमें इस बात पर गंभीर अध्ययन करना चाहिए कि कोरोना संक्रमण के क्लीनिकल प्रभाव क्या और कैसे कैसे हो सकते हैं, यह शरीर के अन्य अंगों पर किस तरह प्रभावित करता है। कोरोना वायरस के स्वरूप और इसके असर की सही जानकारी के लिए अभी कुछ साल तक अध्ययन करना होगा।